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Gonda News: जब अफसर ही नदारद तो कैसे हो महिलाओं की सुनवाई
Sun, 25 May 2025 11:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 25 May 2025 11:51 PM IST
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गोंडा। जिले के परिवार परामर्श केंद्र में सुनवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। जिम्मेदार अधिकारी समय से नहीं पहुंचते और कई बार सुनवाई पूरी होने तक उनका अता-पता नहीं चलता। नतीजतन महज एक-दो मामलों में ही सुलह हो पाती है। सुनवाई के अभाव और असुविधाजनक माहौल के चलते कई पीड़ित अब इन केंद्रों से दूरी बना रहे हैं।
रविवार को रिजर्व पुलिस लाइन में कुल 53 मामलों की सुनवाई प्रस्तावित थी। दोपहर करीब 11:15 बजे तक परामर्शदाता गंगाधर शुक्ल, शशि भारती और संतोष ओझा सुनवाई करते नजर आए, जबकि महिला थानाध्यक्ष सहित अन्य पुलिस अधिकारी गायब रहे। करीब 12 बजे महिला थानाध्यक्ष प्रतिभा सिंह केंद्र पर पहुँचीं, लेकिन तब तक कई मामलों की सुनवाई बंद करनी पड़ी।
महिला थानाध्यक्ष के अनुसार दो मामलों में सुलह-समझौता कराया गया जबकि एक में विधिक कार्रवाई की संस्तुति की गई। 23 मामलों को बंद करना पड़ा। जिनमें या तो पक्ष उपस्थित नहीं हुए या आपसी सहमति से जीवन यापन कर रहे थे। मगर असुविधा और अव्यवस्थाओं के चलते अधिकांश लोग अब इस प्रक्रिया से किनारा कर रहे हैं।
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सुनवाई से नदारद रहे कई जोड़े
परिवार परामर्श केंद्र में समुचित सुनवाई न होने से शिकायतकर्ता विश्वास खो रहे हैं। सुनवाई स्थल एक स्कूल भवन में है, जहां आवाज की गूंज इतनी अधिक है कि परामर्शदाताओं को आपस में संवाद करने में भी बाधा आ रही है। यहां अफसरों और परामर्शदाताओं का कोई निश्चित समय नहीं होता, जिससे व्यवस्था चरमरा गई है। ऐसे में सुनवाई के लिए बुलाए गए 53 मामलों में से 28 जोड़े शामिल ही नहीं हुए।
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रविवार को रिजर्व पुलिस लाइन में कुल 53 मामलों की सुनवाई प्रस्तावित थी। दोपहर करीब 11:15 बजे तक परामर्शदाता गंगाधर शुक्ल, शशि भारती और संतोष ओझा सुनवाई करते नजर आए, जबकि महिला थानाध्यक्ष सहित अन्य पुलिस अधिकारी गायब रहे। करीब 12 बजे महिला थानाध्यक्ष प्रतिभा सिंह केंद्र पर पहुँचीं, लेकिन तब तक कई मामलों की सुनवाई बंद करनी पड़ी।
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महिला थानाध्यक्ष के अनुसार दो मामलों में सुलह-समझौता कराया गया जबकि एक में विधिक कार्रवाई की संस्तुति की गई। 23 मामलों को बंद करना पड़ा। जिनमें या तो पक्ष उपस्थित नहीं हुए या आपसी सहमति से जीवन यापन कर रहे थे। मगर असुविधा और अव्यवस्थाओं के चलते अधिकांश लोग अब इस प्रक्रिया से किनारा कर रहे हैं।
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सुनवाई से नदारद रहे कई जोड़े
परिवार परामर्श केंद्र में समुचित सुनवाई न होने से शिकायतकर्ता विश्वास खो रहे हैं। सुनवाई स्थल एक स्कूल भवन में है, जहां आवाज की गूंज इतनी अधिक है कि परामर्शदाताओं को आपस में संवाद करने में भी बाधा आ रही है। यहां अफसरों और परामर्शदाताओं का कोई निश्चित समय नहीं होता, जिससे व्यवस्था चरमरा गई है। ऐसे में सुनवाई के लिए बुलाए गए 53 मामलों में से 28 जोड़े शामिल ही नहीं हुए।