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Gonda News: जलस्तर घटा, मुसीबतें जस की तस

Thu, 01 Oct 2026 11:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Thu, 01 Oct 2026 11:49 PM IST
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Water level decreased, problems remained the same
विश्नोहरपुर/उमरी बेगमगंज। सरयू का जलस्तर घटने लगा है लेकिन माझा क्षेत्र में बाढ़ की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर जलस्तर 106.130 मीटर रहा, जो खतरे के निशान से छह सेंटीमीटर ऊपर है। पानी घटने के बावजूद ब्योंदा माझा से नवाबगंज के लोलपुर तक बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। करीब दो दर्जन गांव और मजरे बाढ़ से प्रभावित हैं। संपर्क मार्गों पर पानी व कीचड़ होने से आवागमन मुश्किल है।
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ब्योंदा माझा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। पूरा गांव पानी से घिरा है। कई मजरे भी बाढ़ की जद में हैं। ग्राम प्रशासक केशवराम यादव ने बताया कि दत्तनगर से गांव आने वाला मार्ग जलभराव के कारण बंद हो गया है। बाजार से गांव आने-जाने के लिए नाव और स्टीमर ही सहारा है।
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नकहरा, सेमरा और इंदरपुर के संपर्क मार्गों के आसपास भी पानी भरा है। इंदरपुर के तिलकराम ने बताया कि कई परिवार मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों और सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं। दत्तनगर में करीब 10 दिन से बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
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फसल बर्बाद, अगली फसल की तैयारी की चिंता
बाढ़ ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। दीनानाथ यादव व अतुल सिंह का कहना है कि खेतों में गिरी धान की फसल पूरी तरह जलमग्न है। कई जगह बची फसल की बालियों में दाने नहीं पड़े हैं। गन्ने की फसल को भी जलभराव से नुकसान हुआ है। फसल बर्बाद होने के बाद किसानों के सामने आर्थिक नुकसान के साथ अगली फसल की तैयारी की चुनौती है।
दत्तनगर के पशुपालक लाला यादव ने बताया कि बाढ़ के पानी से हरा चारा और भूसा खराब हो गया है। पशुपालकों के सामने चारे का संकट और गहरा गया है। कई परिवार मवेशियों के साथ दूसरे गांवों या सुरक्षित स्थानों पर टिके हैं। माझाराठ में बृहस्पतिवार को प्रशासन ने लंच पैकेट वितरित किए। प्रभावित परिवारों को राहत किट भी दी जा रही है। ग्रामीणों ने राहत सामग्री के साथ पशुओं के लिए पर्याप्त भूसे की व्यवस्था कराने की मांग की है।

डीएम प्रियंका निरंजन ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से राहत सामग्री वितरित की जा रही है। लंच पैकेट और राशन किट के साथ भूसा व अन्य जरूरी सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारियों को भी सक्रिय किया गया है।
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