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सूख गए वाटर होल व तालाब

Mon, 04 Apr 2016 11:09 PM IST
अमर उजाला/बलरामपुर
अमर उजाला/बलरामपुर Updated Mon, 04 Apr 2016 11:09 PM IST
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Water holes and ponds have dried
सूखा तालाब - फोटो : अमर उजाला
वन्य जीवों की सुविधा तथा उनकी सुरक्षा पूरी तरह से भगवान भरोसे है। गर्मी के सीजन में वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए लाखों रुपये की लागत से बनाए जाने वाले वाटर होलों के बारे में डीएफओ ही कुछ नहीं जानते।
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ऐसे में वन्य जीव-मानव संघर्ष की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है। यही नहीं बीती शनिवार की रात पानी की तलाश में बाहर निकले गजराज की मौत हाईटेंशन तार की चपेट में आने से हो गई।
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लापरवाही के चलते जंगल क्षेत्र के प्राकृतिक जलस्रोत भी सूख गए है। अधिकांश पहाड़ी नालों व नदियों में पानी ही नहीं है। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते वन्य क्षेत्रों में स्थित प्राकृतिक जलाशय भी सूखे हुए हैं।
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ऐसे में वन्य जीवों की प्यास कैसे बुझेगी, इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है। विभागीय अधिकारी आनन-फानन में अपनी कमियां छिपाने में जुट गए हैं। 

सेंचुरी वन क्षेत्र में वन संपदा तथा वन्य जीवों की सुविधा व सुरक्षा के लिए सरकार हर साल भारी भरकम बजट देती है। गर्मी के सीजन में वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए जंगलों में वन विभाग द्वारा लाखों रुपये की लागत से जगह-जगह वाटर होल बनवाने का नियम है।

इन वाटर होलों में जमीन के नीचे से तथा बारिश के पानी को एकत्र किया जाता है, ताकि वन्य जीव अपनी प्यास बुझा सकें और वह पानी की तलाश में जंगल से बाहर न जाएं। 

वन्य जीवों के लिए सोहेलवा सेंचुरी में वाटर होल कहां बनाए गए हैं, इस बात की जानकारी विभाग के अधिकारियों को ही नहीं है। सोमवार को वाटर होल के बारे में पूछने पर जरवा रेंज के रेंजर वीके आनंद वाटर होलों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके।

वीके आनंद का कहना था कि इस बारे में डीएफओ से बात कीजिए। वन्य क्षेत्र के आसपास गांवों के लोगों से वाटर होल के बारे में पूछने पर उनका कहना था कि वाटर होल क्या होता है, यह उन्हें नहीं पता। 

गर्मी शुरू होते ही सोहेलवा सेंचुरी में रहने वाले जानवर पानी की तलाश में बस्तियों की तरफ रुख करने लगे हैं। गत वर्षों में बरहवा तथा बनकटवा रेंज के निकटवर्ती गांवों में तेंदुओं का हमला लगातार हो रहा था।

बीते शनिवार की रात बरहवा रेंज में रहने वाले जंगली हाथी नैकिनिया गांव की तरफ पहुंच गए। ग्रामीणों की मानें तो यह हाथी पानी की तलाश में गांव की तरफ आए थे। इनमें से एक हाथी की हाईटेंशन तार की चपेट में आकर मौत हो गई। 

शनिवार की रात नैकिनियां गांव की तरफ पानी की तलाश में आए जंगली हाथी की हाईटेंशन तार से हुई मौत के बाद वन विभाग हरकत में आ गया है। वाटर होलों के बारे में जानकारी लेने के बाद आनन-फानन में विभागीय अधिकारी व कर्मी अपनी कमी छिपाने में जुट गए हैं। अब देखना यह है कि गजराज के साथ ही हुई घटना के बाद वन विभाग वन क्षेत्र में पानी का क्या इंतजाम करता है।


वेटलैंड के नाम से मशहूर सोहेलवा सेंचुरी भी कुदरत के कहर से अब अछूता नहीं बचा है। गत वर्षो में हुई कम बारिश का असर वेटलैंड में भी दिखने लगा है। सेंचुरी क्षेत्र में बहने वाली पहाड़ी नदियों व नाले भी अप्रैल में ही सूख गए हैं।

जंगल क्षेत्र में स्थित प्राकृतिक जलाशयों में भी धूल उड़ रही है। ऐसे में वन्य जीवों को पानी के संकट से बचाना वन विभाग के लिए चुनौती बन गया है।


 
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