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डोंगल न एक्टिव होने से नहीं शुरु हुआ आधा दर्जन पंचायतों में काम-काज
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बेलसर (गोंडा)। विकास खंड परसपुर में छह नवसृजित ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का डोंगल सक्रिय न होने से छह माह बाद ग्राम प्रधानों के हाथ खाली हैं। ग्राम प्रधानों से विकास की आश लगाए बैठे लोगों को धक्का लग रहा है।
विकास खंड परसपुर में 68 ग्राम पंचायतों में से 2021 में सात नव सृजित ग्राम पंचायतों का गठन किया गया था। नवसृजित ग्राम पंचायतों में नए ग्राम प्रधानों का चुनाव होने के बाद शपथ व कार्यभार ग्रहण करा दिया गया। लेकिन अभी तक इन ग्राम प्रधानों को दिए गए डोंगल को सक्रिया नहीं हो सका। डोंगल सक्रिय न होने से प्रधानों के हाथ छह माह बाद खाली हैं। उधारी के पैसों से काम चलाया जा रहा है। इतना ही नहीं ग्राम प्रधानों के साथ चुनाव में जीत दिलाने में मददगार जो विकास की उम्मीद लगाए थे, वह ग्राम प्रधानों द्वारा पूरी न कर पाने से दूरी बढ़ती जा रही है।
नव सृजित ग्राम पंचायतों में अधिकांश नए लोगों ने आजमाइश किया था। उन लोगों को अपने लोगों को संतुष्ट करने के लिए उधारी के पैसे से काम चलाना पड़ रहा है। एक नव निर्वाचित ग्राम पंचायत के प्रधान ने बताया कि पहली बार हम इस क्षेत्र में आए हैं। यदि हम अपने लोगों के बीच किए गए वादों को पूरा करने में विफल हो जाएंगे तो आगे की राजनीति खत्म हो जाएगी। इन ग्राम पंचायतों में करीब पचास लाख रुपये डंप हैं, लेकिन सक्रिय न होने से विकास कार्य करने के बाद फर्मों को भुगतान नहीं हो पा रहा है।
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ग्राम पंचायत कंपनी के प्रधान प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि चुनाव के दौरान ग्राम पंचायत में नाली, खडंजा, पुलिया सहित अन्य विकास कार्य करने का वादा किया था। जीत के छह माह बाद खाली हाथ बैठे हैं। नव सृजित ग्राम पंचायत खजुरी, कपनी, धमरैया, सालपुर पाठक, लोहंगपुर, धनुही, बेलमत्थर परेटाखैरा, पूरे तिवारी, कुडियांव, उतरौला, सरैयां चौबे तथा तुलसीपुर हैं, जहां विकास कार्य ठप पड़े हैं।
खंड विकास अधिकारी वर्षा सिंह ने बताया कि नव सृजित ग्राम पंचायतों में इस प्रकार की समस्या साइट के कारण थी। बताया कि नव सृजित ग्राम पंचायत की मैपिंग होती है। मैपिंग में मिस मैच के कारण समस्या थी, लेकिन समस्या दूर हो रही है। अब केवल कपनी ग्राम पंचायत का डोंगल सक्रिय होना बाकी रह गया है, जिसको जल्द ही सक्रिय कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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विकास खंड परसपुर में 68 ग्राम पंचायतों में से 2021 में सात नव सृजित ग्राम पंचायतों का गठन किया गया था। नवसृजित ग्राम पंचायतों में नए ग्राम प्रधानों का चुनाव होने के बाद शपथ व कार्यभार ग्रहण करा दिया गया। लेकिन अभी तक इन ग्राम प्रधानों को दिए गए डोंगल को सक्रिया नहीं हो सका। डोंगल सक्रिय न होने से प्रधानों के हाथ छह माह बाद खाली हैं। उधारी के पैसों से काम चलाया जा रहा है। इतना ही नहीं ग्राम प्रधानों के साथ चुनाव में जीत दिलाने में मददगार जो विकास की उम्मीद लगाए थे, वह ग्राम प्रधानों द्वारा पूरी न कर पाने से दूरी बढ़ती जा रही है।
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नव सृजित ग्राम पंचायतों में अधिकांश नए लोगों ने आजमाइश किया था। उन लोगों को अपने लोगों को संतुष्ट करने के लिए उधारी के पैसे से काम चलाना पड़ रहा है। एक नव निर्वाचित ग्राम पंचायत के प्रधान ने बताया कि पहली बार हम इस क्षेत्र में आए हैं। यदि हम अपने लोगों के बीच किए गए वादों को पूरा करने में विफल हो जाएंगे तो आगे की राजनीति खत्म हो जाएगी। इन ग्राम पंचायतों में करीब पचास लाख रुपये डंप हैं, लेकिन सक्रिय न होने से विकास कार्य करने के बाद फर्मों को भुगतान नहीं हो पा रहा है।
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ग्राम पंचायत कंपनी के प्रधान प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि चुनाव के दौरान ग्राम पंचायत में नाली, खडंजा, पुलिया सहित अन्य विकास कार्य करने का वादा किया था। जीत के छह माह बाद खाली हाथ बैठे हैं। नव सृजित ग्राम पंचायत खजुरी, कपनी, धमरैया, सालपुर पाठक, लोहंगपुर, धनुही, बेलमत्थर परेटाखैरा, पूरे तिवारी, कुडियांव, उतरौला, सरैयां चौबे तथा तुलसीपुर हैं, जहां विकास कार्य ठप पड़े हैं।
खंड विकास अधिकारी वर्षा सिंह ने बताया कि नव सृजित ग्राम पंचायतों में इस प्रकार की समस्या साइट के कारण थी। बताया कि नव सृजित ग्राम पंचायत की मैपिंग होती है। मैपिंग में मिस मैच के कारण समस्या थी, लेकिन समस्या दूर हो रही है। अब केवल कपनी ग्राम पंचायत का डोंगल सक्रिय होना बाकी रह गया है, जिसको जल्द ही सक्रिय कराने का प्रयास किया जा रहा है।