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Gonda News: फाइलों मेें वेंडिंग जोन, सड़क पर सजीं दुकानें
Sat, 21 Oct 2023 11:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 21 Oct 2023 11:59 PM IST
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अफसरों की अनदेखी से लोग परेशान, महिला अस्पताल के पास फंसती रहती एंबुलेंस
संवाद न्यूज एजेंसी
गोंडा। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने जिले के कार्यभार ग्रहण करने के बाद सबसे पहले वेंडिग व पार्किंग जोन बनाकर शहर को हजरतगंज बनाने का दावा किया था। लेकिन डीएम का प्लान फाइलों में कैद होकर ही रह गया। शहर के महत्वपूर्ण मार्गों पर जाम की समस्या से आम लोग परेशान हैं। जिला महिला अस्पताल पूरी तरह से दुकानदारों के साथ ही रेहड़ी, ठेला व खुमचे वालों से घिरा हुआ है। अस्पताल में प्रवेश के लिए गेट के सामने ही लगे रेहड़ी-ठेलों को हटाने के लिए तीमारदारों को उनका मनुहार करना पड़ता है। अस्पताल चौराहे के पास ही पुलिस चौकी है। मगर इन पर कोई अंकुश नहीं है। कब्जेदारों के आगे प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं और अस्पताल के एक गेट पर मरीजों के लिए ताला लगा दिया गया है। अब सिर्फ दुकानदारों का ही कब्जा है और वह खुलकर अपना काम करते हैं, बस मरीजों को ही दूसरे रास्तों से घूमकर अस्पताल जाना पड़ता है। शहर के गुरुनानक चौक से गुड्डूमल चौराहे तक पुलिस की निगरानी में अवैध रूप से सड़कों पर कब्जा है। वह भी जिला महिला अस्पताल के गेट पर, ऐसा कब्जा है कि एक भी एम्बुलेंस अस्पताल में नहीं जा सकती है। अस्पताल के चारो तरफ नगर पालिका ने पहले दुकानें बनाकर किराए पर दे दीं। इन दुकानों के सामने भी रेहड़ी, खोमचा और ठेले वालों की दुकानें सज जाती हैं। जिससे अस्पताल के गेट पर मरीजों को अंदर जाने के लिए दुकानदारों से मनुहार करनी पड़ती है।
गेट पर ही बाइक खड़ी कर गायब रहते हैं लोग
महिला अस्पताल के गेट तक तो मेडिकल स्टोर की दुकानें खुली हैं। इसके अलावा गेट के सामने ही तमाम लोग बाइक खड़ी करके अंदर चले जाते हैं या फिर अपना काम करते हैं। ऐसे में अस्पताल में कोई एम्बुलेंस अगर मरीज लेकर आ जाए तो सड़क पर जाम ही लगता है। चंद कदम पर पुलिस चौकी होने के बाद भी यहां पर कब्जे जैसी स्थिति रहती है। ऐसे में मरीजों को गेट से पैदल ही जैसे तैसे जाना पड़ता है।
अस्पताल के सामने अतिक्रमण से मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। एंबुलेंस व मरीजों के रास्तें में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। -डॉ. रक्षारानी चतुर्वेदी, सीएमएस, महिला अस्पताल
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गोंडा। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने जिले के कार्यभार ग्रहण करने के बाद सबसे पहले वेंडिग व पार्किंग जोन बनाकर शहर को हजरतगंज बनाने का दावा किया था। लेकिन डीएम का प्लान फाइलों में कैद होकर ही रह गया। शहर के महत्वपूर्ण मार्गों पर जाम की समस्या से आम लोग परेशान हैं। जिला महिला अस्पताल पूरी तरह से दुकानदारों के साथ ही रेहड़ी, ठेला व खुमचे वालों से घिरा हुआ है। अस्पताल में प्रवेश के लिए गेट के सामने ही लगे रेहड़ी-ठेलों को हटाने के लिए तीमारदारों को उनका मनुहार करना पड़ता है। अस्पताल चौराहे के पास ही पुलिस चौकी है। मगर इन पर कोई अंकुश नहीं है। कब्जेदारों के आगे प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं और अस्पताल के एक गेट पर मरीजों के लिए ताला लगा दिया गया है। अब सिर्फ दुकानदारों का ही कब्जा है और वह खुलकर अपना काम करते हैं, बस मरीजों को ही दूसरे रास्तों से घूमकर अस्पताल जाना पड़ता है। शहर के गुरुनानक चौक से गुड्डूमल चौराहे तक पुलिस की निगरानी में अवैध रूप से सड़कों पर कब्जा है। वह भी जिला महिला अस्पताल के गेट पर, ऐसा कब्जा है कि एक भी एम्बुलेंस अस्पताल में नहीं जा सकती है। अस्पताल के चारो तरफ नगर पालिका ने पहले दुकानें बनाकर किराए पर दे दीं। इन दुकानों के सामने भी रेहड़ी, खोमचा और ठेले वालों की दुकानें सज जाती हैं। जिससे अस्पताल के गेट पर मरीजों को अंदर जाने के लिए दुकानदारों से मनुहार करनी पड़ती है।
गेट पर ही बाइक खड़ी कर गायब रहते हैं लोग
महिला अस्पताल के गेट तक तो मेडिकल स्टोर की दुकानें खुली हैं। इसके अलावा गेट के सामने ही तमाम लोग बाइक खड़ी करके अंदर चले जाते हैं या फिर अपना काम करते हैं। ऐसे में अस्पताल में कोई एम्बुलेंस अगर मरीज लेकर आ जाए तो सड़क पर जाम ही लगता है। चंद कदम पर पुलिस चौकी होने के बाद भी यहां पर कब्जे जैसी स्थिति रहती है। ऐसे में मरीजों को गेट से पैदल ही जैसे तैसे जाना पड़ता है।
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अस्पताल के सामने अतिक्रमण से मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। एंबुलेंस व मरीजों के रास्तें में कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए। -डॉ. रक्षारानी चतुर्वेदी, सीएमएस, महिला अस्पताल
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