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Gonda News: मेडिकल कॉलेज में टीबी मरीज की मौत पर हंगामा
Sat, 10 Aug 2024 11:01 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 10 Aug 2024 11:01 PM IST
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गोंडा। महाराजा देवीबख्श सिंह राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं। बालपुर के पास स्थित माधवपुर चकत्ता निवासी क्षयरोगी की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा काटा। मरीज के बेटे ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन थियेटर से लेकर स्टाफ नर्सों तक ने वसूली की, इसके बावजूद उपचार में लापरवाही बरती गई।
मृत क्षयरोगी के बेटे रोहित ने बताया कि उनके पिता को मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टर ने ऑपरेशन कर फेफड़े से पस निकालने का सुझाव दिया। बाहर से 1700 रुपये की जांच कराई गई। ऑपरेशन थियेटर में ले जाने के पहले ओटी के पास खड़े एक व्यक्ति ने तीन हजार रुपये की मांग की। रोहित के मुताबिक उनके पास दो हजार रुपये ही थे, उन्होंने उक्त व्यक्ति को ये रकम दे दी। इसके बाद वार्ड में 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से स्टाफ नर्सों ने वसूली की। मगर पिता की हालत गंभीर होने पर भी कोई देखने तक न आया। इसी लापरवाही के चलते उनकी मौत हो गई।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन नहीं हुआ था, बल्कि ओटी में ले जाकर पाइप के जरिए फेफड़े से मवाद निकाला गया था। मरीज की हालत गंभीर थी। इलाज के नाम पर वसूली की लिखित शिकायत मिलने के बाद जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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मृत क्षयरोगी के बेटे रोहित ने बताया कि उनके पिता को मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टर ने ऑपरेशन कर फेफड़े से पस निकालने का सुझाव दिया। बाहर से 1700 रुपये की जांच कराई गई। ऑपरेशन थियेटर में ले जाने के पहले ओटी के पास खड़े एक व्यक्ति ने तीन हजार रुपये की मांग की। रोहित के मुताबिक उनके पास दो हजार रुपये ही थे, उन्होंने उक्त व्यक्ति को ये रकम दे दी। इसके बाद वार्ड में 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से स्टाफ नर्सों ने वसूली की। मगर पिता की हालत गंभीर होने पर भी कोई देखने तक न आया। इसी लापरवाही के चलते उनकी मौत हो गई।
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मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन नहीं हुआ था, बल्कि ओटी में ले जाकर पाइप के जरिए फेफड़े से मवाद निकाला गया था। मरीज की हालत गंभीर थी। इलाज के नाम पर वसूली की लिखित शिकायत मिलने के बाद जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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