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नहीं पूरा करा पाए नॉन इंटरलॉकिंग कार्य, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने जताई नाराजगी

Sun, 13 Mar 2022 11:23 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Mar 2022 11:23 PM IST
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Train,non interlocking of the track
गोंडा। पूर्वोत्तर रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही से करीब तीन साल से अधिक समय से गोंडा रेलवे यार्ड का नान इंटरलॉकिंग का कार्य बाधित है। इंटरलॉकिंग कार्य न होने से करीब 80 लाख लोग परेशान हैं। जबकि, लाखों रुपये की लागत से बने दो नए प्लेटफार्म पर छुट्टा मवेशियों का अड्डा बन गया है। गोंडा रेलवे यार्ड में नान इंटरलॉकिंग कार्य न होने पर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने नाराजगी व्यक्त की है।
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गोंडा रेलवे यार्ड में इंटरलॉकिंग कार्य पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। पांच वर्ष पूर्व गोंडा से बलरामपुर और बहराइच छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने का कार्य पूरा किया गया था। साथ ही ट्रेनों के आवागमन के लिए लाखों रुपये की लागत से दो नए प्लेटफार्म चार व पांच बनाए गए। नए प्लेटफार्म बनाने का उद्देश्य था कि गोंडा से बलरामपुर व बहराइच से आने-जाने वाली ट्रेनें सीधे इस प्लेटफार्म पर आकर खड़ी होंगी। यहीं से गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, छपरा, बरौनी, नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जम्मू, अहमदाबाद, चंडीगढ़, लुधियाना के लिए ट्रेनों का सीधा संचालन शुरू हो जाएगा।
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लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही से गोंडा रेलवे यार्ड में नान इंटरलॉकिंग कार्य नहीं हो सका। इंटरलॉकिंग कार्य के लिए मुख्यालय व गोरखपुर से महाप्रबंधक, प्रमुख चीफ इंजीनियर और ट्रैक से संबंधित अधिकारी के अलावा मंडल व लखनऊ के डीआरएम के साथ मंडल इंजीनियरिंग के अधिकारियों ने कई बार गोंडा रेलवे स्टेशन पहुंचकर जायजा लिया। करीब चार वर्ष बीतने के बाद भी नान इंटरलॉकिंग का कार्य पूर्वोत्तर रेलवे के लिए एक चुनौती बना है। नान इंटरलॉकिंग कार्य न होने से गोंडा, बलरामपुर व बहराइच के करीब 80 लाख से अधिक लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नान इंटरलाकिंग न होने से गोंडा से बलरामपुर आने-जाने वाली ट्रेनें नए प्लेटफार्म पर नहीं आ सकती हैं। बहराइच से आने जाने वाली ट्रेनें प्लेटफार्म पर तो आ सकती हैं मगर गोरखपुर, लखनऊ, मुंबई व अन्य महानगरों के लिए उनका सीधा संचालन नहीं हो पा रहा है। एक जोड़ी डेमू ट्रेन गोंडा से बहराइच के बीच चलाई जाती है। इंटरलॉकिंग कार्य न होने से रेलवे बोर्ड के चेयरमैन व सीईओ विनय त्रिपाठी ने पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे जल्द से जल्द पूरा करने का आदेश दिया है।
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