फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Today will tie rakhi on the wrist of brothers

भाई की कलाई पर आज बांधी जाएगी राखी

Wed, 17 Aug 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा Updated Wed, 17 Aug 2016 11:44 PM IST
विज्ञापन
Today will tie rakhi on the wrist of brothers
राखी की खरीदारी करतीं युवतियां - फोटो : अमर उजाला
भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षा बंधन त्यौहार पर गुरुवार को मनाया जाएगा। कल गुरुवार को बहनें भाइयों के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर रक्षा का संकल्प लेंगी। वहीं भाई बहन को रक्षा सूत्र की लाज निभाने का वायदा करते हुए उपहार देंगे। इसे बुधवार को दिन भर बाजारों में चहल पहल रही। बहनों ने भाइयों के लिए सुंदर व महंगी राखियां खरीदीं।
विज्ञापन


भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षा बंधन का त्यौहार गुरुवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसे लेकर करीब पखवारे भर से तैयारियां चल रही हैं। बाजार में राखियों व मिठाइयो की तरह-तरह की दुकानें सजी हुई हैं। बुधवार को दिन बहनें भाइयों के लिए कपड़े, मिठाइयां व राखियां खरीदती दिखीं।
विज्ञापन


उधर भाई भी बहनों को उपहार देने के लिए तैयारियों में जुटे रहे। पंडित तापेश्वरी प्रसाद मिश्र ने बताया कि राखी सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक ही बंधवाना ज्यादा शुभ होगा। इसके बाद पचखा का योग है जिसमें कम से कम पांच रक्षा बंधन बांधा चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस त्यौहार को लेकर अलग-अलग किवदंतियां हैं जो आस्था को मजबूत करती हैं। कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर बलि राजा  के अभिमान को इसी दिन चकानाचूर किया था। इसलिए यह त्योहार 'बलेव' नाम से भी  प्रसिद्ध है।

महाभारत में पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की कलाई से बहते खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी  का किनारा फाड़ कर बांधा  जिससे उनका खून बहना बंद हो गया। तभी से कृष्ण ने  द्रोपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था। वर्षों बाद जब पांडव द्रोपदी को  जुए में हार गए थे और भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था तब कृष्ण ने  द्रोपदी की लाज बचाई थी।


एक जनश्रुति के अनुसार चित्तौड़ की राजमाता कर्मवती ने मुग़ल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजकर अपना भाई बनाया था और वह  भी संकट के समय बहन कर्मवती की रक्षा के लिए चित्तौड़ आ पहुंचा था। समय- समय पर भाई- बहनों के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन कर्तव्यों का याद दिलाता रहा है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed