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Gonda News: 20 वर्षों में घटे मैदान, स्क्रीन में कैद हो रहा बचपन

Tue, 28 Jul 2026 11:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Tue, 28 Jul 2026 11:28 PM IST
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time is now spent on mobile screens
मैदान पर खेलते बच्चे।
गोंडा। पिछले दो दशकों में बच्चों की जीवनशैली तेजी से बदली है। कभी स्कूल के बाद खेल के मैदानों में क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी और खो-खो खेलने वाले बच्चे अब घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी खेल मैदान सिकुड़ते जा रहे हैं। कई जगहों पर मैदानों पर भवन निर्माण और अतिक्रमण हो चुका है। इसका सीधा असर बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर पड़ रहा है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए लेकिन अधिकांश बच्चे इस लक्ष्य से काफी दूर हैं। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की समस्या, मोटापा, नींद में कमी, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में गिरावट जैसी परेशानियां बढ़ रही हैं। शिक्षक सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि कि पहले खेल बच्चों की दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा होता था, लेकिन अब पढ़ाई के बाद अधिकांश समय मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम में गुजर जाता है। इससे बच्चों में टीम भावना व नेतृत्व क्षमता भी विकसित नहीं हो पाने से उनका सामाजिक व्यवहार भी प्रभावित हो रहा है।
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मोबाइल से कमजोर हो रही आंखें
मैदान की गतिविधियों में कमी आने के बाद बच्चे मोबाइल के आदी होते जा रहे हैं। जिससे उनकी आंखें कमजोर होती जा रही हैं। बच्चों की आंखों में सूखापन व उनकी आंखें टेढ़ी होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को बहुत देर तक मोबाइल फोन को न देखने दें।
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मनोज श्रीवास्तव, वरिष्ठ नेत्र परीक्षण अधिकारी



स्क्रीन टाइम सीमित करना जरूरी
मोबाइल और ऑनलाइन गेम की बढ़ती लत बच्चों में चिड़चिड़ापन, तनाव, एकाग्रता की कमी और सामाजिक दूरी जैसी समस्याएं पैदा कर रही है। लगातार स्क्रीन देखने से नींद भी प्रभावित होती है। अभिभावक बच्चों का स्क्रीन टाइम तय करें और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित करें।

डॉ. नुपुर पॉल, मनोचिकित्सक मेडिकल कॉलेज



अभिभावक बनें रोल मॉडल
बच्चे वही सीखते हैं जो घर में देखते हैं। यदि परिवार के सदस्य भी हर समय मोबाइल पर रहेंगे तो बच्चों में भी यही आदत विकसित होगी। परिवार को रोज कुछ समय बिना मोबाइल के खेल, सैर या अन्य शारीरिक गतिविधियों के लिए निकालना चाहिए। इससे बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।
ऋषि शुक्ल, शिक्षक पीएमश्री जीआईसी
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