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Gonda News: गांवों में टीम पहुंची नहीं, कागजों पर 32 लाख को खिलायी दवाई
Tue, 29 Aug 2023 11:18 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 29 Aug 2023 11:18 PM IST
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गोंडा। फाइलेरिया उन्मूलन अभियान स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की बाजीगरी की भेंट चढ़ गया। मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान के तहत सोमवार शाम तक जिले के 32 लाख 37 हजार 527 लोगों को फाइलेरियारोधी दवा खिला दी गई, जबकि जमीनी हकीकत कागजी आंकड़ों से बिल्कुल इतर है। शहर के तमाम इलाकों के साथ ही अधिकांश गांवों में न तो अब तक स्वास्थ्य टीम पहुंची और न ही दवाएं खिलाई गईं।
जिले को मच्छरजनित रोग फाइलेरिया से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 10 अगस्त से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान की शुरुआत की गई। इसके तहत जिले के 38 लाख 96 हजार 724 लोगों को फाइलेरियारोधी दवा खिलानी थी। स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के अनुसार सोमवार तक शाम 32 लाख 37 हजार 527 लोगों को दवा खिला दी गई। जबकि कस्बों व गांवों के लोगों का दावा है कि दवा खिलाने कोई आया ही नहीं।
मनकापुर संवाद के अनुसार स्थानीय कस्बा निवासी ज्योति द्विवेदी ने बताया कि उनके घर या मोहल्ले में कोई स्वास्थ्यकर्मी दवा खिलाने नहीं आया। वह खुद स्वास्थ्य केंद्र पर दवा मांगने गईं मगर बताया गया कि घर पर टीम जाएगी। महेवा गोपाल निवासी जनार्दन सिंह ने बताया कि गांव में कोई दवा खिलाने नहीं आया। सिसवा निवासी कृष्णकांत द्विवेदी ने बताया कि उनके गांव में भी दवा नहीं खिलाई गई।
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बक्सरा आज्ञाराम के सिपाही लाल, अंबरपुर निवासी कमलेश मौर्य, भिटौरा दिलीप पुरवा निवासी श्रीराम सिंह के परिवार में भी किसी सदस्य को दवाई नहीं खिलाई गई। करनैलगंज संवाद के अनुसार फाइलेरिया उन्मूलन अभियान सिर्फ अस्पतालों तक सीमित रह गया। गांवों में टीम नहीं पहुंची। शहर के नई बाजार निवासी मो. हफीज, सकरौरा निवासी अरविंद कुमार, अमन व राकेश, बालूगंज निवासी राम जियावन, नारायनपुर माझा निवासी रामचंदर के परिवार में भी किसी को दवा नहीं खिलाई गई।
आम लोगों को छोड़िए अभी तक सरकारी कर्मचारियों को भी दवा नहीं खिलाई गई। मुजेहना बीआरसी के कार्यालय सहायक अमरेंद्र यादव, अभय कुमार, आजीविका मिशन के बीएमएम कुलदीप सिंह व राजकुमार सिंह ने बताया कि उन्हें या उनके परिवार के किसी भी सदस्य को दवा नहीं खिलाई गई। इसके अलावा कलेक्ट्रेट के पास अंबेडकर चौराहा, एलबीएस चौराहा, गुरुनानक चौराहा, पंतनगर आदि इलाकों में स्थित सरकारी व निजी कार्यालयों में भी स्वास्थ्य टीमें नहीं पहुंचीं।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि अभियान के दौरान जो भी व्यक्ति दवा खाने से वंचित रह गया है। उसके लिए दो सितंबर से मॉपअप राउंड चलाया जाएगा। आशा व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से दिए गए आंकड़ों की पड़ताल होगी।
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जिले को मच्छरजनित रोग फाइलेरिया से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 10 अगस्त से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान की शुरुआत की गई। इसके तहत जिले के 38 लाख 96 हजार 724 लोगों को फाइलेरियारोधी दवा खिलानी थी। स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के अनुसार सोमवार तक शाम 32 लाख 37 हजार 527 लोगों को दवा खिला दी गई। जबकि कस्बों व गांवों के लोगों का दावा है कि दवा खिलाने कोई आया ही नहीं।
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मनकापुर संवाद के अनुसार स्थानीय कस्बा निवासी ज्योति द्विवेदी ने बताया कि उनके घर या मोहल्ले में कोई स्वास्थ्यकर्मी दवा खिलाने नहीं आया। वह खुद स्वास्थ्य केंद्र पर दवा मांगने गईं मगर बताया गया कि घर पर टीम जाएगी। महेवा गोपाल निवासी जनार्दन सिंह ने बताया कि गांव में कोई दवा खिलाने नहीं आया। सिसवा निवासी कृष्णकांत द्विवेदी ने बताया कि उनके गांव में भी दवा नहीं खिलाई गई।
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बक्सरा आज्ञाराम के सिपाही लाल, अंबरपुर निवासी कमलेश मौर्य, भिटौरा दिलीप पुरवा निवासी श्रीराम सिंह के परिवार में भी किसी सदस्य को दवाई नहीं खिलाई गई। करनैलगंज संवाद के अनुसार फाइलेरिया उन्मूलन अभियान सिर्फ अस्पतालों तक सीमित रह गया। गांवों में टीम नहीं पहुंची। शहर के नई बाजार निवासी मो. हफीज, सकरौरा निवासी अरविंद कुमार, अमन व राकेश, बालूगंज निवासी राम जियावन, नारायनपुर माझा निवासी रामचंदर के परिवार में भी किसी को दवा नहीं खिलाई गई।
आम लोगों को छोड़िए अभी तक सरकारी कर्मचारियों को भी दवा नहीं खिलाई गई। मुजेहना बीआरसी के कार्यालय सहायक अमरेंद्र यादव, अभय कुमार, आजीविका मिशन के बीएमएम कुलदीप सिंह व राजकुमार सिंह ने बताया कि उन्हें या उनके परिवार के किसी भी सदस्य को दवा नहीं खिलाई गई। इसके अलावा कलेक्ट्रेट के पास अंबेडकर चौराहा, एलबीएस चौराहा, गुरुनानक चौराहा, पंतनगर आदि इलाकों में स्थित सरकारी व निजी कार्यालयों में भी स्वास्थ्य टीमें नहीं पहुंचीं।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि अभियान के दौरान जो भी व्यक्ति दवा खाने से वंचित रह गया है। उसके लिए दो सितंबर से मॉपअप राउंड चलाया जाएगा। आशा व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से दिए गए आंकड़ों की पड़ताल होगी।