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लोकायुक्त के पास पहुंचा घपले का मामला
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sat, 11 Jun 2016 11:40 PM IST
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मार्केट रेट से कई गुना ऊंचे दाम पर अस्पताल के लिए सामान खरीदकर लाखों रुपये के घोटाले की नींव तैयार करने के मामले में सीएमओ डॉ. अमर सिंह कुशवाहा की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शासन से चल रही प्रकरण की जांच के बाद अब यही मामला लोकायुक्त दरबार जा पहुंचा। जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने लोकायुक्त से मामले की जांच कराते हुए मामले में आरोपी सीएमओ के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की मांग की है।
17 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग में हुए इस घोटाले की पोल अमर उजाला ने ‘85 की बाल्टी 800 रुपये में खरीदी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर खोली थी। इसके बाद से मामले की जांच प्रमुख सचिव, अपर निदेशक, निदेशक प्रशासन स्तर से चल रही है।
अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी का आरोप है कि सीएमओ ने जिले में रहकर अपने पद व गरिमा का दुरुपयोग किया है। जो सामान बाजार में काफी कम कीमत में उपलब्ध है, उसकी खरीदारी सीएमओ ने काफी ऊंचे रेट पर किया जाना दर्शाकर इसकी आड़ में लाखों रुपये का घोटाला किया है।
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जबकि स्टेथोस्कोप से लेकर अन्य स्वास्थ्य उपकरणों की खरीदारी में भी अपनी चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिए उन्होंने इसकी पृष्ठभूमि तैयार की। सीएमओ ने जो सामान स्वास्थ्य विभाग से आए बजट के तहत खरीदा, उसकी बाजार में कुल कीमत दो लाख रुपये भी नहीं है, जबकि भुगतान करीब छह लाख रुपये का किया गया।
जिसे लेकर अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने लोकसेवक की श्रेणी में आने वाले सीएमओ डॉ. अमर सिंह कुशवाहा के मामले की पूरी जांच कराते हुए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग उठाई है।
17 अप्रैल को अमर उजाला में ‘रुपये 85 की बाल्टी रुपये 800 में खरीदी’ शीर्षक से प्रकाशित खबर व इसी मामले में शासन से आई जांच को लेकर अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. सविता भट्ट ने सीएमओ डॉ. अमर सिंह कुशवाहा से उनका जवाब मांगा है।
10 जून को सीएमओे को लिखे पत्र में अपर निदेशक डॉ. सविता भट्ट ने सीएमओ को चेतावनी दी है कि इस मामले में उनसे पहले भी इसकी आख्या पुख्ता प्रमाणों के साथ मांगी गई थी। लेकिन उसका जवाब अभी तक अपेक्षित है। इसलिए अगर वह एक दिन में इस पूरे प्रकरण के बाबत अपना जवाब उन्हें नहीं देते हैं, उनके खिलाफ शासन को पत्र लिखा जाएगा।
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17 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग में हुए इस घोटाले की पोल अमर उजाला ने ‘85 की बाल्टी 800 रुपये में खरीदी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर खोली थी। इसके बाद से मामले की जांच प्रमुख सचिव, अपर निदेशक, निदेशक प्रशासन स्तर से चल रही है।
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अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी का आरोप है कि सीएमओ ने जिले में रहकर अपने पद व गरिमा का दुरुपयोग किया है। जो सामान बाजार में काफी कम कीमत में उपलब्ध है, उसकी खरीदारी सीएमओ ने काफी ऊंचे रेट पर किया जाना दर्शाकर इसकी आड़ में लाखों रुपये का घोटाला किया है।
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जबकि स्टेथोस्कोप से लेकर अन्य स्वास्थ्य उपकरणों की खरीदारी में भी अपनी चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिए उन्होंने इसकी पृष्ठभूमि तैयार की। सीएमओ ने जो सामान स्वास्थ्य विभाग से आए बजट के तहत खरीदा, उसकी बाजार में कुल कीमत दो लाख रुपये भी नहीं है, जबकि भुगतान करीब छह लाख रुपये का किया गया।
जिसे लेकर अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने लोकसेवक की श्रेणी में आने वाले सीएमओ डॉ. अमर सिंह कुशवाहा के मामले की पूरी जांच कराते हुए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग उठाई है।
17 अप्रैल को अमर उजाला में ‘रुपये 85 की बाल्टी रुपये 800 में खरीदी’ शीर्षक से प्रकाशित खबर व इसी मामले में शासन से आई जांच को लेकर अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. सविता भट्ट ने सीएमओ डॉ. अमर सिंह कुशवाहा से उनका जवाब मांगा है।
10 जून को सीएमओे को लिखे पत्र में अपर निदेशक डॉ. सविता भट्ट ने सीएमओ को चेतावनी दी है कि इस मामले में उनसे पहले भी इसकी आख्या पुख्ता प्रमाणों के साथ मांगी गई थी। लेकिन उसका जवाब अभी तक अपेक्षित है। इसलिए अगर वह एक दिन में इस पूरे प्रकरण के बाबत अपना जवाब उन्हें नहीं देते हैं, उनके खिलाफ शासन को पत्र लिखा जाएगा।