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72 गांवों में बाढ़ का खतरा
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sun, 26 Jun 2016 11:41 PM IST
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क्षतिग्रस्त बांध
- फोटो : अमर उजाला
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यह खबर सुनने में अटपटी जरूर लग सकती है, लेकिन सच है। घाघरा नदी के किनारे बसे 72 गांवों के एक लाख आठ हजार लोगों पर अब चूहों की करतूत की काली छाया मंडरा रही है, इन्हें अब कभी बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ सकती है। कारण चूहों द्वारा लगातार छेद किए जाने से एल्गिन-चरसड़ी बांध को खतरा पैदा हो गया है।
जिले की करनैलगंज तहसील में जून का महीना शुरू होते ही करीब एक लाख आबादी को बाढ़ का खौफ सताने लगता है। बांध की स्थिति को देख कर लोग अपनी खेतीबाड़ी का कार्य शुरू करते हैं। प्रतिवर्ष बांध की मरम्मत और बाढ़ से क्षेत्र को बचाने की प्रशासनिक कवायदें भी तेज हो जाती हैं, फिर भी बाढ़ से बने खतरे को ग्रामीण नजरअंदाज नहीं करते हैं। कारण बांध की देखरेख के लिए लगे अधिकारी उस बिंदु पर काम कराना भूल जाते हैं, जहां से बांध को खतरा हो सकता है।
यही कारण है कि एल्गिन-चरसड़ी बांध को बचाने के लिए स्पर, ठोकर, बनाने में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये बाढ़ के पानी में बह जाता है और बाढ़ की विभीषिका तभी नहीं रुक पाती है। हर साल की तरह इस बार भी एल्गिन-चरसड़ी बांध की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं, लेकिन इस बार बांध को रेन कट से अधिक चूहों ने नुकसान पहुंचाया है। बांध में करीब सौ से अधिक रैट होल हैं, जिन्हें चूहों ने बांध में इस पार से उस पार तक बना रखा है।
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घाघरा नदी में जैसे-जैसे बाढ़ का पानी बढ़ेगा, वैसे-वैसे बांध से रिसाव शुरू हो जाता है। जो अधिक पानी बढ़ने पर बांध को तेजी से काट सकता है। यही नहीं बालू से बने बांध पर बरसात में बालू व मिट्टी बह जाने से बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। इनकी भी मरम्मत नहीं कराई गई है।
घाघरा की बाढ़ से बांध को बचाने के लिए स्परों का निर्माण एवं धारा को मोड़ने के लिए मशीन से खुदाई का कार्य तेजी से चल रहा है, मगर जर्जर बांध की हालत जस की तस है। इस ओर किसी अधिकारी का ध्यान नहीं जा रहा है। जो करीब गाेंडा जिले की करीब एक लाख से अधिक आबादी के लिए खतरा बन सकता है।
वर्ष 2011-12 में बांध कटने पर कुल 72 गांव, 20 हजार 967 परिवार, 1 लाख 8 हजार आबादी प्रभावित हुई थी। 11 बाढ़ चौकियां बनाई गईं थीं तथा करीब 470 नावें लगाई गई थीं। 10 हजार 243 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ था।
बांध के डैंजर जोन में करीब एक किलोमीटर की दूरी में बालू भरी बोरियों से बड़े-बड़े स्परों एवं ठोकरों का निर्माण कराया गया है तथा विदेशी मशीन ड्रेगन से नदी की गहराई को बढ़ाकर धारा को मोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। इसके लिए लगातार नदी में कांबिंग की जा रही है।
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जिले की करनैलगंज तहसील में जून का महीना शुरू होते ही करीब एक लाख आबादी को बाढ़ का खौफ सताने लगता है। बांध की स्थिति को देख कर लोग अपनी खेतीबाड़ी का कार्य शुरू करते हैं। प्रतिवर्ष बांध की मरम्मत और बाढ़ से क्षेत्र को बचाने की प्रशासनिक कवायदें भी तेज हो जाती हैं, फिर भी बाढ़ से बने खतरे को ग्रामीण नजरअंदाज नहीं करते हैं। कारण बांध की देखरेख के लिए लगे अधिकारी उस बिंदु पर काम कराना भूल जाते हैं, जहां से बांध को खतरा हो सकता है।
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यही कारण है कि एल्गिन-चरसड़ी बांध को बचाने के लिए स्पर, ठोकर, बनाने में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये बाढ़ के पानी में बह जाता है और बाढ़ की विभीषिका तभी नहीं रुक पाती है। हर साल की तरह इस बार भी एल्गिन-चरसड़ी बांध की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं, लेकिन इस बार बांध को रेन कट से अधिक चूहों ने नुकसान पहुंचाया है। बांध में करीब सौ से अधिक रैट होल हैं, जिन्हें चूहों ने बांध में इस पार से उस पार तक बना रखा है।
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घाघरा नदी में जैसे-जैसे बाढ़ का पानी बढ़ेगा, वैसे-वैसे बांध से रिसाव शुरू हो जाता है। जो अधिक पानी बढ़ने पर बांध को तेजी से काट सकता है। यही नहीं बालू से बने बांध पर बरसात में बालू व मिट्टी बह जाने से बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। इनकी भी मरम्मत नहीं कराई गई है।
घाघरा की बाढ़ से बांध को बचाने के लिए स्परों का निर्माण एवं धारा को मोड़ने के लिए मशीन से खुदाई का कार्य तेजी से चल रहा है, मगर जर्जर बांध की हालत जस की तस है। इस ओर किसी अधिकारी का ध्यान नहीं जा रहा है। जो करीब गाेंडा जिले की करीब एक लाख से अधिक आबादी के लिए खतरा बन सकता है।
वर्ष 2011-12 में बांध कटने पर कुल 72 गांव, 20 हजार 967 परिवार, 1 लाख 8 हजार आबादी प्रभावित हुई थी। 11 बाढ़ चौकियां बनाई गईं थीं तथा करीब 470 नावें लगाई गई थीं। 10 हजार 243 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ था।
बांध के डैंजर जोन में करीब एक किलोमीटर की दूरी में बालू भरी बोरियों से बड़े-बड़े स्परों एवं ठोकरों का निर्माण कराया गया है तथा विदेशी मशीन ड्रेगन से नदी की गहराई को बढ़ाकर धारा को मोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। इसके लिए लगातार नदी में कांबिंग की जा रही है।