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विदेशी परिंदों से गुलजार हुए तराई के जलाशय
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Fri, 06 Jan 2017 10:26 PM IST
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जलाशयों के ऊपर उड़ते विदेशी पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
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सोहेलवा सेंचुरी में स्थित करीब एक दर्जन प्राकृतिक जलाशय इस समय तरह-तरह के विदेशी मेहमान परिंदों से गुलजार है। सुबह-शाम इन मेहमानों का कलरव लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करता है। हर साल करीब तीन महीने के लिए विदेशी मेहमान यहां आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा साइबेरियन पक्षी होते हैं। प्रवास के दौरान इन मेहमानों को स्थानीय शिकारियों का भी शिकार होना पड़ता है। हालांकि वन विभाग का दावा है कि पक्षियों की सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
तराई क्षेत्र के प्राकृतिक जलाशयों को परिंदों के लिए काफी समृद्ध स्थान माना जाता है। इन जलाशयों में हर साल सर्दी के मौसम में मध्य एशिया, साइबेरिया तथा अन्य देशों के परिंदे प्रवास पर आते हैं। गर्मी का मौसम शुरू होते ही यह परिंदे वापस अपने देश चले जाते हैं।
मेहमान परिंदों में प्रमुख रूप से सींकपर, नीलसर, लालसर, कामनटील, गैड़ेवाल, व्रहमनी डक, कामन क्रूट, साइबेरियन सारस, म्रेटर फ्लेमिंगो, उत्तरी पिनबेल व यल्लो वैगटेल आदि पक्षी शामिल हैं। ये विदेशी प्रवासी परिंदे हर साल सोहेलवा सेंचुरी स्थित प्राकृतिक जलाशय भगवानपुर, बघेलखंड, कोहरगड्डी, चित्तौड़गढ़ व रेहरा आदि में आते हैं।
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तराई क्षेत्र के प्राकृतिक जलाशयों में विदेशी मेहमान परिंदों का आगमन दिसंबर के दूसरे सप्ताह में शुरू होता है। 10-15 दिन के अंदर जलाशय मेहमान परिंदों के कलरव से गुंजायमान हो जाते हैं। यह माना जाता है कि सर्दी के मौसम में इन परिंदों के जलाशय में पर्याप्त भोजन आदि मौजूद रहता है। परिंदों का प्रवास करीब तीन महीने तक रहता है।
सर्दी के मौसम में जलाशयों में आने वाले मेहमान परिंदों का स्थानीय शिकारी शिकार भी करते हैं। हालांकि वन विभाग ने परिंदों के शिकार पर पाबंदी लगाई है लेकिन इन पक्षियों को मांसाहारी शौकीनों को बेचकर अच्छी कमाई करने वाले शिकारी चोरीछिपे इनका शिकार कर ही लेते हैं। सीमा क्षेत्र के कई हाट बाजारों व गांवों में इन पक्षियों को खरीदा जा सकता है।
डीएफओ करन सिंह गौतम ने कहा कि प्राकृतिक जलाशयों में हर साल आने वाले विदेशी मेहमान परिंदों की सुरक्षा का ख्याल रखा जाता है। इनके शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है। पकड़े जाने पर शिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाती है। सभी रेंज अधिकारियों को परिंदों की निगरानी करने का निर्देश भी दिया गया है।
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तराई क्षेत्र के प्राकृतिक जलाशयों को परिंदों के लिए काफी समृद्ध स्थान माना जाता है। इन जलाशयों में हर साल सर्दी के मौसम में मध्य एशिया, साइबेरिया तथा अन्य देशों के परिंदे प्रवास पर आते हैं। गर्मी का मौसम शुरू होते ही यह परिंदे वापस अपने देश चले जाते हैं।
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मेहमान परिंदों में प्रमुख रूप से सींकपर, नीलसर, लालसर, कामनटील, गैड़ेवाल, व्रहमनी डक, कामन क्रूट, साइबेरियन सारस, म्रेटर फ्लेमिंगो, उत्तरी पिनबेल व यल्लो वैगटेल आदि पक्षी शामिल हैं। ये विदेशी प्रवासी परिंदे हर साल सोहेलवा सेंचुरी स्थित प्राकृतिक जलाशय भगवानपुर, बघेलखंड, कोहरगड्डी, चित्तौड़गढ़ व रेहरा आदि में आते हैं।
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तराई क्षेत्र के प्राकृतिक जलाशयों में विदेशी मेहमान परिंदों का आगमन दिसंबर के दूसरे सप्ताह में शुरू होता है। 10-15 दिन के अंदर जलाशय मेहमान परिंदों के कलरव से गुंजायमान हो जाते हैं। यह माना जाता है कि सर्दी के मौसम में इन परिंदों के जलाशय में पर्याप्त भोजन आदि मौजूद रहता है। परिंदों का प्रवास करीब तीन महीने तक रहता है।
सर्दी के मौसम में जलाशयों में आने वाले मेहमान परिंदों का स्थानीय शिकारी शिकार भी करते हैं। हालांकि वन विभाग ने परिंदों के शिकार पर पाबंदी लगाई है लेकिन इन पक्षियों को मांसाहारी शौकीनों को बेचकर अच्छी कमाई करने वाले शिकारी चोरीछिपे इनका शिकार कर ही लेते हैं। सीमा क्षेत्र के कई हाट बाजारों व गांवों में इन पक्षियों को खरीदा जा सकता है।
डीएफओ करन सिंह गौतम ने कहा कि प्राकृतिक जलाशयों में हर साल आने वाले विदेशी मेहमान परिंदों की सुरक्षा का ख्याल रखा जाता है। इनके शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है। पकड़े जाने पर शिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाती है। सभी रेंज अधिकारियों को परिंदों की निगरानी करने का निर्देश भी दिया गया है।