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पंचायत चुनाव में बागियों ने जिले में नहीं खिलने दिया कमल

Tue, 04 May 2021 11:19 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 04 May 2021 11:19 PM IST
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The rebels did not allow the lotus to bloom in the panchayat elections
गोंडा। सत्ता की चकाचौंध में मैदान में उतरे भाजपा के प्रत्याशी 65 जिला पंचायत वार्डों में अपनी हनक नहीं दिखा सके। भाजपा की पूरी टोली में शामिल मंत्री, सांसद, विधायक व मंत्री से लेकर प्रदेश स्तर के कई बड़े नेताओं ने गांवों व वार्डों में चौपाल लगाकर सरकार की उपलब्धियों को गिनाया था।
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इसके बावजूद भाजपा 65 में से केवल 16 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी। भाजपा का खेल बिगाड़ने में सबसे ज्यादा योगदान पार्टी बागियों का रहा है। उन्होंने न सिर्फ भाजपा की रणनीति पर पानी फेला बल्कि खुद जीतकर साबित कर दिया किया उनको टिकट न देने का फैसला गलत था।
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जिले में समाजवादी पार्टी ने भी 20 प्रत्याशियों की सूची जारी की थी, लेकिन सपा इनमें से 13 सीटों पर विजय हासिल करने में कामयाब रही। बसपा ने केवल आठ सीटों पर समर्थित प्रत्याशी उतारे थे जिसमें से दो पर विजय हासिल करने में कामयाब रही। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने भी अपना खाता खोल लिया है। दलों के समर्थन से उतरे अधिकांश दावेदारों को मतदाताओं ने धूल चटा दिया।
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65 सीटों में 33 सीटों पर केवल निर्दल उम्मीदवार ही विजयी रहे। इनमें छह वे उम्मीदवार शामिल हैं जो भाजपा के मुखर कार्यकर्ता रहे और उन्हें चुनाव लड़ने पर बागी करार देते हुए पार्टी से निकाल दिया गया था, लेकिन वे विजय हासिल करने में कामयाब रहे।
यदि संगठन ने सूझबूझ के साथ उम्मीदवारों को उतारा होता तो शायद ये सीटें भी भाजपा के खाते में शामिल होतीं। कई अन्य सीटों पर बागी भाजपा के कार्यकर्ता तो नहीं जीते पर उन्होंने पंचायत चुनाव में कमल खिलने नहीं दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा अपनी दावेदारी करेगी। हालांकि भाजपा जिन पर दांव लगा रही थी वह तो चुनाव हार गए। संगठन की ओर से संकेत मिलने के बाद ही भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पीयूष मिश्र को जिताने की पुरजोर कोशिश की गई लेकिन वह चुनाव हार गए और भाजपा भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए जादुई आंकड़ा 33 सीट हासिल नहीं कर सकी।
अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के पास 33 सीटों का होना आवश्यक है, जबकि भाजपा के पास जीती हुई 16 तथा बागी कार्यकर्ताओं की 6 सीटों को मिलाकर केवल 22 का ही आंकड़ा पूरा हो रहा है।
माना जरा है कि पंचायत चुनाव के बाद गोंडा-बलरामपुर एमएलसी सीट के लिए चुनाव होना है। इसमें जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी व प्रमुखों की भूमिका ही रहती है। यही वोटर बनकर एमएलसी की कुर्सी दिलाते हैं। गोंडा-बलरामपुर एमएलसी सीट से मौजूदा समय सपा का कब्जा है।

पूर्व जिलाध्यक्ष सपा महफूजुर्रहमान उर्फ महफूज खां मौजूदा समय एमएलसी हैं। माना जा रहा है कि यह सीट हमेशा सत्ता की होती है। इसलिए भी कार्यकर्ताओं के साथ पंचायत चुनाव में जीतने वाले सभी सदस्यों को भी पटरी पर लाया जाए।
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