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Gonda News: मैं बैरी सुग्रीव पियारा, कारण कौन नाथ मोहि मारा
Mon, 19 Oct 2026 10:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 19 Oct 2026 10:56 PM IST
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गोंडा में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
इटियाथोक। करुआपारा के रामजानकी मंदिर में आयोजित रामलीला में रविवार रात सीता हरण व लंका दहन की लीला देखकर दर्शक भाव विभोर हो उठे। हनुमान जी द्वारा सोने की लंका जलाने के सजीव मंचन से पंडाल श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इससे पूर्व राम-सुग्रीव भेंट, बालि वध और अशोक वाटिका विध्वंस का मंचन हुआ। राम और बालि के संवाद की दर्शकों ने खूब सराहना की। श्रीराम के बाणों से छलनी होकर जमीन पर गिरने के बाद बालि ने प्रश्न कियाः ‘मैं बैरी सुग्रीव पियारा। कारण कौन नाथ मोहि मारा।’
प्रभु श्रीराम ने बालि के इस प्रश्न का बहुत ही तार्किक और मार्मिक उत्तर देते हुए कहा-‘अनुज बधू, भगिनी, सुत नारी। सुन सठ कन्या सम ये चारी। इन्हहि कुदृष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधे कछु पाप न होई।’ अंत में पुत्र अंगद का हाथ थामने की श्रीराम से प्रार्थना करके बालि ने प्राण त्याग दिए। श्रीराम की भूमिका प्रभात पांडेय, लक्ष्मण की आकाश तिवारी, हनुमान की राकेश तिवारी, रावण की काशी ओझा, मेघनाद की अनिल, सुग्रीव की ओम प्रकाश, जामवंत की धनलाल, बालि की लल्ला ओझा व अंगद की भूमिका वीरेंद्र ने निभाई।
इसी प्रकार अयाह के कोटरा माता मंदिर में राम-सुग्रीव मित्रता और अशोक वाटिका विध्वंस का मंचन हुआ। श्रीराम ने बालि वध कर सुग्रीव को राजा बनाया। हनुमान जी ने लंका पहुंचकर सीता को अंगूठी दी। बाद में उन्होंने अशोक वाटिका उजाड़ दी। रावण की सभा में निर्भय होकर प्रभु का संदेश दिया। इस अवसर पर संतोष, लल्ला चौधरी, भोलानाथ, कृष्ण मोहन आदि मौजूद रहे।
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मेघनाद और अहिरावण वध का हुआ मंचन
करनैलगंज। रामलीला महोत्सव में रविवार को मेघनाद वध और सती सुलोचना व सोमवार को अहिरावण वध का मंचन हुआ। लक्ष्मण के बाण से मेघनाद का शीश कटकर रामदल में गिरा। सुलोचना रामदल पहुंचकर सतीत्व का प्रमाण देते हुए कटे शीश से हंसने का अनुरोध करती है। शीश हंसने पर वह उसे लेकर सती हो जाती है। संचालन पंडित रामचरित्र महाराज ने किया। इस अवसर पर अरुण वैश्य, मोहित पांडेय, कामतानाथ वर्मा आदि मौजूद रहे। (संवाद)
सीता हरण और लंका प्रवेश का हुआ मंचन
खरगूपुर। कस्बे की रामलीला में सीता हरण, शबरी उद्धार व हनुमान जी के लंका प्रवेश का मंचन हुआ। शूर्पणखा की नाक कटना और खर-दूषण वध आकर्षण का केंद्र रहा। रावण द्वारा सीता हरण, जटायु उद्धार, शबरी प्रसंग, बालि वध व सीता की खोज का मंचन किया गया। लंका प्रवेश देख दर्शक भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर आशीष त्रिपाठी, सूरज, देवराज आदि मौजूद रहे। (संवाद)
परशुराम-लक्ष्मण संवाद देख दर्शक रोमांचित
पसका। सहजौरा स्थित सम्मय माता स्थान पर आयोजित रामलीला में कलाकारों ने विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया। संरक्षक प्रमोद ने बताया कि ताड़का वध, खर-दूषण वध, धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन हुआ। शिव धनुष टूटने पर परशुराम के क्रोधित होने और लक्ष्मण के साथ उनके संवाद ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस मौके पर अजय, अनिल, अनंत, निश्चलानंद, तारकेश्वर, शशांक, चंद्र प्रकाश, बबलू, कमल, सत्यदेव आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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प्रभु श्रीराम ने बालि के इस प्रश्न का बहुत ही तार्किक और मार्मिक उत्तर देते हुए कहा-‘अनुज बधू, भगिनी, सुत नारी। सुन सठ कन्या सम ये चारी। इन्हहि कुदृष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधे कछु पाप न होई।’ अंत में पुत्र अंगद का हाथ थामने की श्रीराम से प्रार्थना करके बालि ने प्राण त्याग दिए। श्रीराम की भूमिका प्रभात पांडेय, लक्ष्मण की आकाश तिवारी, हनुमान की राकेश तिवारी, रावण की काशी ओझा, मेघनाद की अनिल, सुग्रीव की ओम प्रकाश, जामवंत की धनलाल, बालि की लल्ला ओझा व अंगद की भूमिका वीरेंद्र ने निभाई।
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इसी प्रकार अयाह के कोटरा माता मंदिर में राम-सुग्रीव मित्रता और अशोक वाटिका विध्वंस का मंचन हुआ। श्रीराम ने बालि वध कर सुग्रीव को राजा बनाया। हनुमान जी ने लंका पहुंचकर सीता को अंगूठी दी। बाद में उन्होंने अशोक वाटिका उजाड़ दी। रावण की सभा में निर्भय होकर प्रभु का संदेश दिया। इस अवसर पर संतोष, लल्ला चौधरी, भोलानाथ, कृष्ण मोहन आदि मौजूद रहे।
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मेघनाद और अहिरावण वध का हुआ मंचन
करनैलगंज। रामलीला महोत्सव में रविवार को मेघनाद वध और सती सुलोचना व सोमवार को अहिरावण वध का मंचन हुआ। लक्ष्मण के बाण से मेघनाद का शीश कटकर रामदल में गिरा। सुलोचना रामदल पहुंचकर सतीत्व का प्रमाण देते हुए कटे शीश से हंसने का अनुरोध करती है। शीश हंसने पर वह उसे लेकर सती हो जाती है। संचालन पंडित रामचरित्र महाराज ने किया। इस अवसर पर अरुण वैश्य, मोहित पांडेय, कामतानाथ वर्मा आदि मौजूद रहे। (संवाद)
सीता हरण और लंका प्रवेश का हुआ मंचन
खरगूपुर। कस्बे की रामलीला में सीता हरण, शबरी उद्धार व हनुमान जी के लंका प्रवेश का मंचन हुआ। शूर्पणखा की नाक कटना और खर-दूषण वध आकर्षण का केंद्र रहा। रावण द्वारा सीता हरण, जटायु उद्धार, शबरी प्रसंग, बालि वध व सीता की खोज का मंचन किया गया। लंका प्रवेश देख दर्शक भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर आशीष त्रिपाठी, सूरज, देवराज आदि मौजूद रहे। (संवाद)
परशुराम-लक्ष्मण संवाद देख दर्शक रोमांचित
पसका। सहजौरा स्थित सम्मय माता स्थान पर आयोजित रामलीला में कलाकारों ने विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया। संरक्षक प्रमोद ने बताया कि ताड़का वध, खर-दूषण वध, धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन हुआ। शिव धनुष टूटने पर परशुराम के क्रोधित होने और लक्ष्मण के साथ उनके संवाद ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस मौके पर अजय, अनिल, अनंत, निश्चलानंद, तारकेश्वर, शशांक, चंद्र प्रकाश, बबलू, कमल, सत्यदेव आदि मौजूद रहे। (संवाद)

गोंडा में रामलीला का मंचन करते कलाकार।

गोंडा में रामलीला का मंचन करते कलाकार।

गोंडा में रामलीला का मंचन करते कलाकार।