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Gonda News: पसका में मुख्य स्नान पर्व आज, मेले में जुटेंगे श्रद्धालु

Fri, 02 Jan 2026 10:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Fri, 02 Jan 2026 10:52 PM IST
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The main bathing festival in Paska today, devotees will gather in the fair
पसका में मेले की तैयारियों का जायजा लेते एसपी विनीत जायसवाल, साथ में एसडीएम नेहा मिश्रा।- संवाद
पसका। पौष पूर्णिमा पर पसका के सूकरखेत में शनिवार को मुख्य स्नान पर्व मनाया जाएगा। यहां हजारों लोग आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य करेंगे। मेले में भीड़ के मद्देनजर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्य स्नान पर्व के साथ एक माह से चल रहे कल्पवास का समापन हो जाएगा।
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एसपी विनीत जायसवाल ने शुक्रवार को मेले का भ्रमण कर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने करनैलगंज एसडीएम नेहा मिश्रा से अब तक किए गए प्रबंधों की जानकारी भी ली। एसपी ने बताया कि मेला में सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों को लगाया जा रहा हैं। यातायात को लेकर अलग से पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है। सीओ को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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करनैलगंज एसडीएम नेहा मिश्रा ने बताया कि मेले में भीड़ को देखते हुए छह स्तर पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। दो व चारपहिया वाहनों का मेले में प्रवेश वर्जित है। मेले की सुरक्षा के लिए लगभग 80 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। मुख्य राजस्व अधिकारी महेश प्रकाश ने भी मेला प्रबंधों का जायजा लिया।
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मेले से व्यापारियों को काफी उम्मीदें हैं। यहां पर झूला, सर्कस, मौत का कुआं सहित मनोरंजन के विभिन्न साधन उपलब्ध हैं। साथ ही खानपान के लिए ढाबे व चाट की दुकानों की भी व्यवस्था है। व्यापारियों का कहना है कि मेले में स्थानीय लोगों को जमावड़ा होता है। ऐसे में बेहतर कारोबार होगा।

यह है धार्मिक महत्व
जिला मुख्यालय से 36 किलोमीटर दूर स्थित सूकरखेत पसका भगवान वाराह की जन्मस्थली के साथ ही श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली के रूप में भी विख्यात है। धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु ने वाराह के रूप में अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध कर धरती को आतंक से मुक्त कराया था। यहां सरयू व घाघरा नदियों का संगम है। बाल्यावस्था में तुलसीदास ने यहीं अपने गुरु नरहरिदास से कथाएं सुनीं, जिसका उल्लेख रामचरितमानस में भी है, जैसे ''''''''कहत कथा इतिहास बहु आए सूकरखेत''''''''। यहां तुलसी धाम मंदिर और गुरु नरहरिदास का आश्रम है, जो इस जुड़ाव को प्रमाणित करता है।


एक माह तक चलता है कल्पवास
सरयू और घाघरा नदियों का संगम होने के कारण इसे संगम स्थल जितना पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है, जो इसे एक विशिष्ट धार्मिक पहचान देता है। अगहन पूर्णिमा से पौष पूर्णिमा तक जनपद सहित अन्य जिलों व प्रदेशों से साधु-संत, गृहस्थजन त्रिमुहानी घाट पर घास-फूस, तिरपाल आदि की कुटिया आदि बनाकर भजन-कीर्तन में लीन रहते हैं। पौष पूर्णिमा के दिन हजारों श्रद्धालु पतित पावनी सरयू में आस्था की डुबकी लगाकर भंडारा दान आदि कर अक्षय पुण्य के भागी बनते हैं।
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