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थायराइड जांच के लिए हर महीने भटकती 1500 महिलाएं
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फोटो-9 गोंडा के महिला अस्पताल में ओपीडी में मरीजों को परामर्श देतीं डॉ. सुवर्णा कुमार। (संवाद)
- फोटो : GONDA
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गोंडा। गर्भवती को सुरक्षित प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल में थायराइड की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। हर माह करीब 1500 गर्भवती महिलाएं बिना थायराइड की जांच के वापस लौट रही हैं। ऐसे में महिला थायराइड की जांच बाहर से करवाने को मजबूर हैं। उनका इलाज का खर्च बढ़ रहा है।
सुरक्षित प्रसव का दावा करने वाले जिला महिला अस्पताल में गर्भावस्था में होने वाली अधिकांश जांचों की व्यवस्था नहीं हैं। यहां हर रोज महिलाओं का अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो पाता है तथा गर्भवती को जिस अन्य जांच की अधिक जरूरत है, उसकी सुविधा अस्पताल में नहीं है। प्रसूता एवं महिला रोग विशेषज्ञों का कहना है कि जब महिला गर्भवती हो जाती हैं तो उनकी थायराइड की जांच अनिवार्य रूप से कराई जाती है। इससे उसका प्रसवकाल पूरी तरह से सुरक्षित रहता है। यह जांच गर्भवती होने के कुछ ही दिन बाद कराई जाती है। उसी के अनुसार महिला का इलाज चलता है।
जिला महिला अस्पताल आने वाली महिलाओं को जांच की सुविधा मिलना मुश्किल हो रहा है। जब अस्पताल में जांच की कोई सुविधा नहीं है तो चिकित्सक जिला अस्पताल या फिर बाहर से जांच करवाने का परामर्श देते हैं। बाहर से जांच करवाने पर करीब छह सौ से आठ सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। महिलाओं को काफी दिक्कतें आ रही हैं। प्रसूति एवं महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार ने बताया कि हर रोज ओपीडी में करीब 50 गर्भवती महिलाओं को थायराइड जांच लिखी जाती है जिससे हर महीने औसतन 1500 महिलाओं को थायराइड जांच की जरुरत होती है। बीते दिन अपनी गर्भवती बहू का इलाज कराने आई रामावती ने बताया कि डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड तथा थायराइड की जांच लिखी है लेकिन यहां न तो अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है न ही थायराइड की जांच हो रही है। ऐसे में मजबूरी में बाहर जांच कराना पड़ेगा। विभा देवी को भी थायराइड की जांच बाहर कराने कराने का निर्देश दिया गया।
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गर्भवती के लिए बेहद जरूरी थायराइड जांच
जिला महिला अस्पताल की महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार का कहना है कि गर्भवती की थायराइड की जांच बहुत जरूरी होती हैं। अगर थायराइड बढ़ जाती है तो गर्भवती के सामने कई समस्याएं आ जाती है। उसका हीमोग्लोबिन कम पड़ जाएगा। गर्भ में बच्चे की मौत हो जाएगी। बार-बार बच्चा गर्भ में आने के बाद ठहर नहीं पाएगा। बच्चा होने के बाद लगातार खून की ब्लीडिंग होनी शुरू हो जाएगी। उसको रोकना आसान नहीं होगा। शुरुआत में थायराइड का पता चल जाता है, तो आसानी से उसे कंट्रोल करके महिला का सुरक्षित प्रसव करवाया जा सकता है।
जिला महिला अस्पताल में थायराइड की जांच की सुविधा नहीं है। इसके लिए मरीजों का जिला अस्पताल भेजा जाता है। थायराइड जांच के लिए अलग से मशीन होती है। उसके लिए अस्पताल में अभी संसाधन नहीं है। वहीं रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण अल्ट्रासाउंड की जांच सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को ही हो पाती है। डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस जिला महिला अस्पताल
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सुरक्षित प्रसव का दावा करने वाले जिला महिला अस्पताल में गर्भावस्था में होने वाली अधिकांश जांचों की व्यवस्था नहीं हैं। यहां हर रोज महिलाओं का अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो पाता है तथा गर्भवती को जिस अन्य जांच की अधिक जरूरत है, उसकी सुविधा अस्पताल में नहीं है। प्रसूता एवं महिला रोग विशेषज्ञों का कहना है कि जब महिला गर्भवती हो जाती हैं तो उनकी थायराइड की जांच अनिवार्य रूप से कराई जाती है। इससे उसका प्रसवकाल पूरी तरह से सुरक्षित रहता है। यह जांच गर्भवती होने के कुछ ही दिन बाद कराई जाती है। उसी के अनुसार महिला का इलाज चलता है।
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जिला महिला अस्पताल आने वाली महिलाओं को जांच की सुविधा मिलना मुश्किल हो रहा है। जब अस्पताल में जांच की कोई सुविधा नहीं है तो चिकित्सक जिला अस्पताल या फिर बाहर से जांच करवाने का परामर्श देते हैं। बाहर से जांच करवाने पर करीब छह सौ से आठ सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। महिलाओं को काफी दिक्कतें आ रही हैं। प्रसूति एवं महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार ने बताया कि हर रोज ओपीडी में करीब 50 गर्भवती महिलाओं को थायराइड जांच लिखी जाती है जिससे हर महीने औसतन 1500 महिलाओं को थायराइड जांच की जरुरत होती है। बीते दिन अपनी गर्भवती बहू का इलाज कराने आई रामावती ने बताया कि डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड तथा थायराइड की जांच लिखी है लेकिन यहां न तो अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है न ही थायराइड की जांच हो रही है। ऐसे में मजबूरी में बाहर जांच कराना पड़ेगा। विभा देवी को भी थायराइड की जांच बाहर कराने कराने का निर्देश दिया गया।
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गर्भवती के लिए बेहद जरूरी थायराइड जांच
जिला महिला अस्पताल की महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार का कहना है कि गर्भवती की थायराइड की जांच बहुत जरूरी होती हैं। अगर थायराइड बढ़ जाती है तो गर्भवती के सामने कई समस्याएं आ जाती है। उसका हीमोग्लोबिन कम पड़ जाएगा। गर्भ में बच्चे की मौत हो जाएगी। बार-बार बच्चा गर्भ में आने के बाद ठहर नहीं पाएगा। बच्चा होने के बाद लगातार खून की ब्लीडिंग होनी शुरू हो जाएगी। उसको रोकना आसान नहीं होगा। शुरुआत में थायराइड का पता चल जाता है, तो आसानी से उसे कंट्रोल करके महिला का सुरक्षित प्रसव करवाया जा सकता है।
जिला महिला अस्पताल में थायराइड की जांच की सुविधा नहीं है। इसके लिए मरीजों का जिला अस्पताल भेजा जाता है। थायराइड जांच के लिए अलग से मशीन होती है। उसके लिए अस्पताल में अभी संसाधन नहीं है। वहीं रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण अल्ट्रासाउंड की जांच सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को ही हो पाती है। डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस जिला महिला अस्पताल