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धांधली की शिकायत पर शिक्षक पदोन्नति प्रक्रिया में रोक
अमर उजाला ब्यूरो/ गोंडा
Updated Wed, 15 Jul 2015 10:35 PM IST
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पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक पद पर तैनाती के लिए चल रही कार्रवाई में कुछ शिक्षक नेताओं की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर अनियमितता कर ली गई। बुधवार को इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की गई जिस पर डीएम ने पदोन्नति कार्रवाई पर रोक लगाते हुए प्रभारी बीएसए से पूरी रिपोर्ट तलब की गई है।
पूर्व माध्यामिक विद्यालयों में प्रधानाध्यपक पद पर पदोन्नति के लिए 30 जून 1997 तक तैनाती पाने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापकों व प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की पदोन्नति उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक पद पर किया जाना था।
इसके लिए अध्यापकों की वरिष्ठता सूची जारी की गई और रिक्त पद वाले स्कूलों की पूरी सूची जारी की जानी थी। पर यहां प्रधानाध्यापक पद से रिक्त सभी स्कूलों की सूची ही नहीं जारी की गई। साथ ही अंतिम क्षणों तक अध्यापकों की वरिष्ठता सूची में भी खेल होता रहा।
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इस तरह की गई नियमों की अनदेखी
शासनादेश के क्रम में महिला व विकाल अध्यापकों से बीते 14 जुलाई को उनकी सुलभता के लिए पदोन्नति के बाद तैनाती पाने स्कूलों का विकल्प भराया गया। स्कूल का चयन अध्यापकों की वरिष्ठता क्रम में किया जाना था पर यहां पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के कुछ शिक्षक नेताओं ने विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से गुप्त समझौता कर अपने मनचाहे अध्यापकों को वरिष्ठता क्रम तोड़कर मनचाहा स्कूल का चयन करा दिया गया।
वरिष्ठता क्रम में जो ऊपर रहे उन्हें बाद में बुलाया गया। ऐसे में स्कूलों के चयन में खूब धांधली हुई। इतना ही नहीं कई स्कूलों के नाम गुप्त रखे गए जिनमें शिक्षक नेताओं व विभागीय कर्मचारियों ने अपने हिसाब से अपने लोगों का चयन कराया।
प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी उठाए सवाल
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आनंद कुमार त्रिपाठी मंत्री विजय नारायण पांडेय की अगुवाई में शिक्षकों ने पदोन्नति में की गई धांधली की शिकायत डायट प्राचार्य/ पदोन्नति समिति के अध्यक्ष व जिलाधिकारी से की गई। साथ ही मांग किया है कि पदोन्नति में अध्यापकों को रोस्टर प्रणाली से मुक्त रखा जाए।
तलब की गई है पत्रावली
जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि पदोन्नति प्रक्रिया में काफी शिकायतें मिली हैं। पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए सभी पत्रावली प्रभारी बीएसए से तलब की गई है।
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पूर्व माध्यामिक विद्यालयों में प्रधानाध्यपक पद पर पदोन्नति के लिए 30 जून 1997 तक तैनाती पाने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापकों व प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की पदोन्नति उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक पद पर किया जाना था।
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इसके लिए अध्यापकों की वरिष्ठता सूची जारी की गई और रिक्त पद वाले स्कूलों की पूरी सूची जारी की जानी थी। पर यहां प्रधानाध्यापक पद से रिक्त सभी स्कूलों की सूची ही नहीं जारी की गई। साथ ही अंतिम क्षणों तक अध्यापकों की वरिष्ठता सूची में भी खेल होता रहा।
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इस तरह की गई नियमों की अनदेखी
शासनादेश के क्रम में महिला व विकाल अध्यापकों से बीते 14 जुलाई को उनकी सुलभता के लिए पदोन्नति के बाद तैनाती पाने स्कूलों का विकल्प भराया गया। स्कूल का चयन अध्यापकों की वरिष्ठता क्रम में किया जाना था पर यहां पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के कुछ शिक्षक नेताओं ने विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से गुप्त समझौता कर अपने मनचाहे अध्यापकों को वरिष्ठता क्रम तोड़कर मनचाहा स्कूल का चयन करा दिया गया।
वरिष्ठता क्रम में जो ऊपर रहे उन्हें बाद में बुलाया गया। ऐसे में स्कूलों के चयन में खूब धांधली हुई। इतना ही नहीं कई स्कूलों के नाम गुप्त रखे गए जिनमें शिक्षक नेताओं व विभागीय कर्मचारियों ने अपने हिसाब से अपने लोगों का चयन कराया।
प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी उठाए सवाल
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आनंद कुमार त्रिपाठी मंत्री विजय नारायण पांडेय की अगुवाई में शिक्षकों ने पदोन्नति में की गई धांधली की शिकायत डायट प्राचार्य/ पदोन्नति समिति के अध्यक्ष व जिलाधिकारी से की गई। साथ ही मांग किया है कि पदोन्नति में अध्यापकों को रोस्टर प्रणाली से मुक्त रखा जाए।
तलब की गई है पत्रावली
जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि पदोन्नति प्रक्रिया में काफी शिकायतें मिली हैं। पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए सभी पत्रावली प्रभारी बीएसए से तलब की गई है।