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Gonda News: बी पाल-एम पद्धति से टीबी के मरीजों का होगा इलाज
Fri, 06 Jun 2025 11:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 06 Jun 2025 11:40 PM IST
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गोंडा। जिले के टीबी यूनिटों पर अब एमडीआर (मल्ट्री-ड्रग-रेजिस्टेंट) मरीजों का इलाज बी पाल-एम रेजीमेन (नई इलाज की पद्धति) से शुरू होगा। इसमें इन गंभीर संक्रमित मरीजों को नौ से 20 महीनों तक दवा नहीं खानी पड़ेगी, बल्कि मात्र छह महीने के कोर्स में टीबी मुक्त हो जाएंगे।
बी पाल-एम रेजीमेन से इलाज को लेकर शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय पर टीबी यूनिट से जुड़े डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। लखनऊ से आए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार डॉ. दीपक चतुर्वेदी की देखरेख में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षक डॉ. अमित भारती ने कहा ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत एमडीआर के मरीजों का इलाज कम समय में पूरा हो सकेगा। टीबी एचआईवी उन्मूलन कार्यक्रम के समन्वयक अरविंद मिश्र ने बताया कि पहले एमडीआर के मरीजों को तीन तरीके की दवाएं चलाई जाती थीं। इसमें 18 से 20 महीने तक दवा चलती थी। अब बी पॉल-एम रेजीमेन के तहत सिर्फ छह महीने तक ही चलेंगी। प्रशिक्षण के दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जय गोविंद, डीपीएम अमरनाथ, जिला कार्यक्रम समन्वयक विवेक शरण सहित सभी 19 टीबी यूनिटों के चिकित्सक मौजूद रहे।
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बी पाल-एम रेजीमेन से इलाज को लेकर शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय पर टीबी यूनिट से जुड़े डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। लखनऊ से आए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार डॉ. दीपक चतुर्वेदी की देखरेख में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षक डॉ. अमित भारती ने कहा ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत एमडीआर के मरीजों का इलाज कम समय में पूरा हो सकेगा। टीबी एचआईवी उन्मूलन कार्यक्रम के समन्वयक अरविंद मिश्र ने बताया कि पहले एमडीआर के मरीजों को तीन तरीके की दवाएं चलाई जाती थीं। इसमें 18 से 20 महीने तक दवा चलती थी। अब बी पॉल-एम रेजीमेन के तहत सिर्फ छह महीने तक ही चलेंगी। प्रशिक्षण के दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जय गोविंद, डीपीएम अमरनाथ, जिला कार्यक्रम समन्वयक विवेक शरण सहित सभी 19 टीबी यूनिटों के चिकित्सक मौजूद रहे।
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