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जातीय भंवर के दांव पेच ने रोचक बनाया मुकाबला

Thu, 17 Feb 2022 11:38 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Feb 2022 11:38 PM IST
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tarabganj 299 vidhan sabha 2022
गोंडा। नए परिसीमन के बाद वर्ष 2012 में गठित हुई तरबगंज विधानसभा सीट का चुनाव मुद्दों को दर किनार कर जातीय भंवर के दांव पेच में उलझने से रोचक होता जा रहा है। मुद्दों की जगह इस बार जीत- हार में ब्राह्मण और यादव मतदाता निर्णायक भूमिका में नजर आ रहे है। भाजपा व सपा की तरफ से चुनाव मैदान में मौजूद ब्राह्मण प्रत्याशी को देख कर कांग्रेस ने जहां क्षत्रिय वोट साधने की कोशिश में त्वरिता सिंह को तो वही पिछड़ी जातियों के वोटों में सेंधमारी के लिए बसपा ने लालजी यादव को मैदान में उतारा है।
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तरबगंज विधान सभा में 3.54 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। बेलसर, तरबगंज व नवाबगंज ब्लॉक के साथ ही बस्ती का कुछ भाग मिलाकर गठित हुए इस विधान सभा क्षेत्र में 2012 में पहली बार हुए चुनाव में सपा की तरफ से अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह ने जीत का परचम लहराया था। तब विधान सभा चुनाव में भाजपा की तरफ से प्रेम नरायन पांडेय और बसपा से राम भजन चौबे चुनाव मैदान में थे। दोनों प्रमुख पार्टियों से ब्राह्मण प्रत्याशी होने से हुए वोटों के बिखराव और क्षत्रिय मतदाताओं के साथ अन्य मतदाताओं का सपा में चले जाना ही सपा प्रत्याशी अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह की जीत का सबब बना था। इसी तरह साल 2017 में सपा ने विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह और बसपा ने इंद्र बहादुर सिंह उर्फ पप्पू सिंह को मैदान में उतारा। भाजपा से प्रेम नरायन पांडेय दुबारा चुनाव मैदान में जुटे और जीत हासिल की। इस दौरान मोदी लहर के साथ ही दो प्रमुख पार्टियों से दो क्षत्रिय प्रत्याशी मैदान में होने के कारण हुआ वोटरों को बिखराव ही भाजपा की जीत का कारण बना था।
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इस बार भी वर्ष 2022 में होने वाले चुनाव के दौरान भाजपा और सपा में सीधा संघर्ष होता दिख रहा है। ब्राह्मण प्रत्याशी के बतौर हैं भाजपा से निवर्तमान विधायक प्रेम नारायन पांडेय तो सपा ने बसपा छोड़कर आए राम भजन चौबे पर दांव लगाया है। दोनों ही दलों से एक बार फिर वर्ष 2012 की तरह ब्राह्मण प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में हारजीत का गणित जातिगत वोटों के भंवर में उलझता दिखने लगा है। क्षत्रिय मतदाताओं की भूमिका इसमें अहम भूमिका निभाकर परिणाम को चौंकाने वाला बना सकती है। (संवाद)
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जनता के सवालों से घिरे दावेदार
तरबगंज में जनता के पास भी कई सवाल हैं। बेलसर के रामेश्वर प्रसाद कहते हैं कि पूरे साढ़े चार साल में थाने की राजनीति हुई। विकास के कार्य भी कुछ खास इलाकों तक ही सिमटे दिखे। अवधेश कुमार कहते हैं कि बिजली के लिए तरसना पड़ा। शुकुलगंज उपकेंद्र सोता रहा और गांवों में बिजली संकट व्याप्त रहा। रगड़गंज के बालकराम ने बताया कि कस्बे में जलनिकासी के बेहतर इंतजाम न होने से बरसात में जलभराव की विकट समस्या होती है। आए दिन होने वाले ट्रैफिक जाम भी मुसीबत बढ़ता है। चुनाव मैदान में मौजूद प्रत्याशी जनहित से जुड़े इन मुद्दों को छोड़कर जातिगत जोड़ तोड़ से ही चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश में जुटे हैं। तरबगंज में विकास कार्य को लेकर कई तरह के सवाल मतदाताओं के मन में है लेकिन वोट किसे देंगे इस पर सभी फिलहाल चुप्पी साधे हैं।

यहां की हलचल से करनैलगंज पर असर
तरबगंज से सटी सीट करनैलगंज विधानसभा की है। यही नहीं साल 2012 से पहले तरबगंज तहसील के बरौली, माधवपुर और लिलोईकला न्याय पंचायत की 15 ग्राम सभाएं करनैलगंज विधानसभा में शामिल थीं। खरगूपुर, मंगुरा सहित करीब 20 ग्राम सभाएं तरबगंज विस. सीट से सटी हैं। ऐसे में यहां की सियासी हलचल का सीधा असर करनैलगंज विधान सीट के परिणाम पर पड़ता है।
कुल मतदाता- 3,54,234
जातीय समीकरण
ब्राह्मण - 99 हजार
यादव - 57 हजार
क्षत्रिय - 25 हजार
मुस्लिम - 45 हजार
अनूसूचित जाति - 55 हजार
पिछड़ी जाति- 40 हजार
अन्य- करीब 30 हजार
2017 का चुनाव परिणाम
प्रेम नरायन पांडेय, भाजपा - 100294 जीते
विनोद कुुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह, सपा - 61,852
इंद्र बहादुर सिंह उर्फ पप्पू सिंह, बसपा - 29, 332
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