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मानकों की अनदेखी कर सड़कों पर दौड़ रहीं स्लीपर बसें
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गोंडा में स्लीपर बस।(फाइल फोटो)
- फोटो : GONDA
गोंडा। पिछले कुछ दिनों में लगातार स्लीपर बसों के हादसे सामने आये हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण इन बसों में बड़े पैमाने पर तकनीकी गड़बड़ी माना जा रहा है। परिवहन विभाग की जांच में ऐसे तथ्य सामने आये हैं। बताया जा रहा है कि जिले में भी ऐसी लगभग तीन दर्जन स्लीपर बसों का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में ये बसें भी किसी भी समय हादसे का सबब बन सकती हैं।
बता दें कि पिछले दिनों उन्नाव में स्लीपर बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जांच करने पहुंची टीम के सामने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये थे। जांच में अब तक तीन बसें अनफिट मिली हैं। जिसमें मानकों की अनदेखी कर बस के अंदर निर्धारित सीटों से ज्यादा सीटें बस में बनाई गई थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए परिवहन आयुक्त ने सभी जिलों के सहायक संभागीय अधिकारियों को जांच के आदेश किये हैं। बताया जा रहा है कि कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो कि विभाग को भी गच्चा देकर स्लीपर बसों का पंजीकरण करा लेते हैं और अपनी मनमानी कर यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ करते हैं।
ऐसे लोगों पर अब परिवहन विभाग का शिकंजा कसने जा रहा है। ये सभी बसें निजी बस ऑपरेटरों की ओर से संचालित हो रही हैं। अब इसकी जांच के लिए विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सभी बसों की जांच के बाद फिर से फिटनेस जारी किया जायेगा।
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तीन दर्जन से अधिक स्लीपर बसें संचालित हैं
विभागीय आंकड़ों में जिले में लगभग 42 स्लीपर बसों का पंजीकरण है। ये सभी बसें लखनऊ से दिल्ली और आगरा, कानपुर के साथ ही अन्य लंबी दूरी यात्रा के लिए संचालित की जा रही हैं। सबसे अधिक बसें गोंडा से दिल्ली के बीच में चलती हैं। जो कि आगरा एक्सप्रेस वे और यमुना एक्सप्रेस वे होकर जाती हैं। ऐसे तेज रफ्तार बसों में हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
सबको जारी किया गया है नोटिस
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन संजीव कुमार सिंह ने बताया कि जिले में स्लीपर बसों के मालिकों को नोटिस जारी कर जांच के लिए कार्यालय बुलाया गया है। कार्यालय आकर जांच न करवाने पर सभी लापरवाहों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। जांच की जिम्मेदारी संभागीय निरीक्षक संजय कुमार को दी गई है। जो जांच के बाद कमी को सुधार करने के बाद नई फिटनेस जारी करेंगे। आरआई संजय कुमार ने बताया कि तीन बसों में अब तक गड़बड़ी मिली है। इन बसों की बाडी में फेरबदल किया गया था।
गोंडा की स्लीपर बसें भी हो चुकीं हादसे का शिकार
पिछले साल ही जिले की तीन स्लीपर बसें हादसे का शिकार हो चुकी हैं। दिल्ली में एक बस में आग लगने की घटना हुई थी। दूसरी घटना में एक बस कन्नौज के पास कंटेनर से टकरा गई थी। वहीं तीसरी बस का पांच दिन पूर्व कर्नाटक में गोंडा की एक बस श्रद्धालुओं को लेकर जा रही थी। वहां हादसे का शिकार हुई। इस हादसे में मौके पर ही बस के चालक की मौत हो गई।
बसों के व्हीलबेस के मुताबिक निर्धारित होती हैं सीटें
आरआई संजय कुमार ने बताया कि बसों में कंपनी की ओर से बनाई गई चेसिस के व्हीलबेस के मुताबिक ही सीटों का निर्धारण किया जाता है। उन्होंने बताया कि इसी के मुताबिक ही बसों की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई भी निर्धारित होती है। मानक से अधिक लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई में बदलाव करने से बसों का संतुलन प्रभावित होता है और हाई स्पीड पर ऐसी बसें हादसे का शिकार हो जाती हैं। सीट और स्लीपर बढ़ाने के चक्कर में कुछ लोग बसों की ऊंचाई और लंबाई बढ़ा देते हैं, ये खतरनाक साबित होता है।
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बता दें कि पिछले दिनों उन्नाव में स्लीपर बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जांच करने पहुंची टीम के सामने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये थे। जांच में अब तक तीन बसें अनफिट मिली हैं। जिसमें मानकों की अनदेखी कर बस के अंदर निर्धारित सीटों से ज्यादा सीटें बस में बनाई गई थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए परिवहन आयुक्त ने सभी जिलों के सहायक संभागीय अधिकारियों को जांच के आदेश किये हैं। बताया जा रहा है कि कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो कि विभाग को भी गच्चा देकर स्लीपर बसों का पंजीकरण करा लेते हैं और अपनी मनमानी कर यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ करते हैं।
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ऐसे लोगों पर अब परिवहन विभाग का शिकंजा कसने जा रहा है। ये सभी बसें निजी बस ऑपरेटरों की ओर से संचालित हो रही हैं। अब इसकी जांच के लिए विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सभी बसों की जांच के बाद फिर से फिटनेस जारी किया जायेगा।
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तीन दर्जन से अधिक स्लीपर बसें संचालित हैं
विभागीय आंकड़ों में जिले में लगभग 42 स्लीपर बसों का पंजीकरण है। ये सभी बसें लखनऊ से दिल्ली और आगरा, कानपुर के साथ ही अन्य लंबी दूरी यात्रा के लिए संचालित की जा रही हैं। सबसे अधिक बसें गोंडा से दिल्ली के बीच में चलती हैं। जो कि आगरा एक्सप्रेस वे और यमुना एक्सप्रेस वे होकर जाती हैं। ऐसे तेज रफ्तार बसों में हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
सबको जारी किया गया है नोटिस
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन संजीव कुमार सिंह ने बताया कि जिले में स्लीपर बसों के मालिकों को नोटिस जारी कर जांच के लिए कार्यालय बुलाया गया है। कार्यालय आकर जांच न करवाने पर सभी लापरवाहों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। जांच की जिम्मेदारी संभागीय निरीक्षक संजय कुमार को दी गई है। जो जांच के बाद कमी को सुधार करने के बाद नई फिटनेस जारी करेंगे। आरआई संजय कुमार ने बताया कि तीन बसों में अब तक गड़बड़ी मिली है। इन बसों की बाडी में फेरबदल किया गया था।
गोंडा की स्लीपर बसें भी हो चुकीं हादसे का शिकार
पिछले साल ही जिले की तीन स्लीपर बसें हादसे का शिकार हो चुकी हैं। दिल्ली में एक बस में आग लगने की घटना हुई थी। दूसरी घटना में एक बस कन्नौज के पास कंटेनर से टकरा गई थी। वहीं तीसरी बस का पांच दिन पूर्व कर्नाटक में गोंडा की एक बस श्रद्धालुओं को लेकर जा रही थी। वहां हादसे का शिकार हुई। इस हादसे में मौके पर ही बस के चालक की मौत हो गई।
बसों के व्हीलबेस के मुताबिक निर्धारित होती हैं सीटें
आरआई संजय कुमार ने बताया कि बसों में कंपनी की ओर से बनाई गई चेसिस के व्हीलबेस के मुताबिक ही सीटों का निर्धारण किया जाता है। उन्होंने बताया कि इसी के मुताबिक ही बसों की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई भी निर्धारित होती है। मानक से अधिक लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई में बदलाव करने से बसों का संतुलन प्रभावित होता है और हाई स्पीड पर ऐसी बसें हादसे का शिकार हो जाती हैं। सीट और स्लीपर बढ़ाने के चक्कर में कुछ लोग बसों की ऊंचाई और लंबाई बढ़ा देते हैं, ये खतरनाक साबित होता है।