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आई स्क्रीनिंग किट से लैस होंगे 17 बीआरसी
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गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग अब शिक्षा देने के साथ ही बच्चों की आंखों की सुरक्षा का भी ख्याल रखेगा। विभाग ने इसकी पहल की है। इसके लिए 17 बीआरसी को आई स्क्रीनिंग किट से लैस करने के लिए बजट दिया है। 17 हजार रुपये का बजट मिला है, जिससे दो- दो किट बीआरसी को दिए जाएंगे। जिले के 3100 परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले चार लाख बच्चों के आंखों की जांच अभियान चलाकर होगा। चिकित्सकों की सलाह पर इलाज भी सरकारी खर्च पर होगा। जरूरत पड़ने पर मुफ्त में बच्चों को चश्मा भी मिलेगा। साथ ही समय-समय पर जांच होती रहेगी। बता दें कि किट के माध्यम से पहले शिक्षक बच्चों की आंखों की जांच करेंगे।
नई व्यवस्था से परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में होने वाली आंख की रोशनी की कमी को जांचा जाएगा। ब्लॉक स्तर पर दो-दो आई स्क्रीनिग किट (नेत्र परीक्षण किट) सेट खरीदने को मंजूरी मिली है। नेत्र संबंधी दोष का मामला संज्ञान आते ही बीआरसी (ब्लाक संसाधन केंद्र) में संबंधित विद्यार्थी की जांच होगी। जांच में नेत्र दोष पाए जाने पर विद्यार्थी को इलाज के लिए पास ही सरकारी अस्पताल पहुंचाया जाएगा। समेकित शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक ने आई स्क्रीनिंग किट खरीदने को मंजूरी दी है। बीएसए को हर ब्लॉक संसाधन केंद्र में नेत्र परीक्षण का सामान खरीदे जाने के निर्देश दिए हैं। शासन ने इसके लिए प्रति किट का एक हजार रुपये मूल्य निर्धारित कर दिया है। बच्चों में अक्सर नेत्र विकार जिसमें दृष्टि दोष के मामले सामने आते हैं। आई स्क्रींनिग किट से विद्यार्थियों की जांच बीआरसी में ही हो जाएगी। इलाज के बाद दृष्टि दोष अथवा सही नंबर का चश्मा डॉक्टर की सलाह पर ले सकेंगे और पढ़ाई में दिक्कत नहीं आएगी।
चिकित्सा शिविर नियमित लगाना आसान नहीं
बच्चों की सेहत का परीक्षण समय-समय पर होता रहता है, लेकिन नियमित स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन आसान नहीं है। इसी को ध्यान में रखकर बीआरसी पर आई स्क्रीनिंग किट की व्यवस्था की गई है। कई स्कूलों की ओर से बच्चों की आंख में दिक्कत होने की शिकायतें मिलीं थीं। विभाग ने नई व्यवस्था किया है। बीआरसी पर कार्मिकों को जांच करने के तौर तरीकों की जानकारी भी दी जाएगी। जांच के आधार पर ही बच्चों के आगे के परीक्षण और इलाज की व्यवस्था होगी।
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सौ दिव्यांग बेटियों को दो- दो हजार की छात्रवृत्ति
समेकित शिक्षा योजना से दिव्यांग बेटियों को छात्रवृत्ति दी गई है। सौ छात्राओं के खातों में दो- दो हजार रुपये भेजा गया है। बताया जा रहा है कि नए सत्र में फिर चयन होगा। इसके लिए विभाग की ओर से पहल की जा रही है।
बीआरसी केंद्रों पर आई स्क्रीनिंग किट की व्यवस्था से बच्चों की जांच में आसानी होगी। इससे बच्चों की आंख में कोई कमी होने पर अस्पताल में दिखाया जा सकेगा। राजेश सिंह, जिला समन्वयक समेकित शिक्षा
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नई व्यवस्था से परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में होने वाली आंख की रोशनी की कमी को जांचा जाएगा। ब्लॉक स्तर पर दो-दो आई स्क्रीनिग किट (नेत्र परीक्षण किट) सेट खरीदने को मंजूरी मिली है। नेत्र संबंधी दोष का मामला संज्ञान आते ही बीआरसी (ब्लाक संसाधन केंद्र) में संबंधित विद्यार्थी की जांच होगी। जांच में नेत्र दोष पाए जाने पर विद्यार्थी को इलाज के लिए पास ही सरकारी अस्पताल पहुंचाया जाएगा। समेकित शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक ने आई स्क्रीनिंग किट खरीदने को मंजूरी दी है। बीएसए को हर ब्लॉक संसाधन केंद्र में नेत्र परीक्षण का सामान खरीदे जाने के निर्देश दिए हैं। शासन ने इसके लिए प्रति किट का एक हजार रुपये मूल्य निर्धारित कर दिया है। बच्चों में अक्सर नेत्र विकार जिसमें दृष्टि दोष के मामले सामने आते हैं। आई स्क्रींनिग किट से विद्यार्थियों की जांच बीआरसी में ही हो जाएगी। इलाज के बाद दृष्टि दोष अथवा सही नंबर का चश्मा डॉक्टर की सलाह पर ले सकेंगे और पढ़ाई में दिक्कत नहीं आएगी।
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चिकित्सा शिविर नियमित लगाना आसान नहीं
बच्चों की सेहत का परीक्षण समय-समय पर होता रहता है, लेकिन नियमित स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन आसान नहीं है। इसी को ध्यान में रखकर बीआरसी पर आई स्क्रीनिंग किट की व्यवस्था की गई है। कई स्कूलों की ओर से बच्चों की आंख में दिक्कत होने की शिकायतें मिलीं थीं। विभाग ने नई व्यवस्था किया है। बीआरसी पर कार्मिकों को जांच करने के तौर तरीकों की जानकारी भी दी जाएगी। जांच के आधार पर ही बच्चों के आगे के परीक्षण और इलाज की व्यवस्था होगी।
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सौ दिव्यांग बेटियों को दो- दो हजार की छात्रवृत्ति
समेकित शिक्षा योजना से दिव्यांग बेटियों को छात्रवृत्ति दी गई है। सौ छात्राओं के खातों में दो- दो हजार रुपये भेजा गया है। बताया जा रहा है कि नए सत्र में फिर चयन होगा। इसके लिए विभाग की ओर से पहल की जा रही है।
बीआरसी केंद्रों पर आई स्क्रीनिंग किट की व्यवस्था से बच्चों की जांच में आसानी होगी। इससे बच्चों की आंख में कोई कमी होने पर अस्पताल में दिखाया जा सकेगा। राजेश सिंह, जिला समन्वयक समेकित शिक्षा