{"_id":"40f66cff4ce8a7d9b98ce7a377b13046","slug":"school-director-ran-off-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूल बंद कर संचालक भागा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूल बंद कर संचालक भागा
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Feb 2016 11:09 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गली-गली चल रहे बगैर मान्यता के विद्यालय जहां बेसिक शिक्षा विभाग के लिए सिरदर्द बने हुए हैं तो वहीं इन स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराने वाले अभिभावक भी परेशान हैं। हालिया मामला करनैलगंज के उस विद्यालय का है, जिसमें पढ़ने वाले दो बच्चे बीते दिनों स्कूल में लगे वाहन के पलट जाने से दबकर मर गए थे। मामले में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालय संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के बाद से संचालक स्कूल बंद कर भाग गया है, जिससे विद्यालय में पंजीकृत 256 बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
बीती 27 जनवरी को करनैलगंज के भंभुवा में संचालित सरस्वती ज्ञान मंदिर के दो बच्चे स्कूल में लगे वाहन के पलट जाने से उसके नीचे दबकर काल कलवित हो गए थे।
हादसे के वक्त मैजिक में करीब 22 बच्चे सवार थे, जिसमें सभी को हल्की-फुल्की चोटें आईं। हादसे के बाद लोगों और जनप्रतिनिधियों का आक्रोश देखते हुए आनन-फानन में शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल की जांच कराई गई।
जिसमें पता चलने पर कि विद्यालय का कोई रजिस्ट्रेशन ही नहीं है, पर स्कूल संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी कर बिना मान्यता के विद्यालय संचालित करने का मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद से न सिर्फ विद्यालय का संचालक फरार है, बल्कि स्कूल के प्रधानाचार्य से लेकर अन्य स्टाफ भी विद्यालय बंद कर नदारद है।
विज्ञापन
उधर, एक हफ्ता बीतने के बावजूद विद्यालय न खुलने से इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक अपने-अपने नौनिहालो के भविष्य को लेकर परेशान हैं। क्योंकि मामला स्कूल में पढ़ने वाले कुछ बच्चों का नहीं बल्कि विद्यालय में पंजीकृत कक्षा एक से लेकर कक्षा 10 तक के 256 बच्चों का है। जिनकी एक साल की मेहनत विद्यालय बंद होने से दांव पर लगी हुई है।
इसे लेकर न तो बच्चों के अभिभावक कुछ कर पा रहे हैं और न ही बेसिक शिक्षा विभाग। क्योंकि सत्र समाप्ति में अब केवल ढाई महीने का ही समय शेष बचा है। इतने कम समय में न तो इन बच्चों का किसी दूसरे स्कूल में दाखिला हो सकता है और न ही वह अपनी पढ़ाई पूरी कर परीक्षा दे सकते हैं।
सरस्वती ज्ञान मंदिर भंभुवा में अपने बच्चों का दाखिला कराने वाले अभिभावक बब्लू गुप्त, सुरेश शुक्ल, प्रदीप तिवारी, शिवराम शुक्ल, राकेश सिंह, दिनेश शुक्ल आदि का कहना है कि विद्यालय 27 जनवरी से ही बंद चल रहा है, जिसके कारण वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं।
अप्रैल से लेकर जुलाई तक एडमिशन कराने के बाद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई पर हजारों रुपये खर्च किए हैं। अगर स्कूल नहीं खुला तो उनके बच्चों का भविष्य चौपट हो जाएगा।
सरस्वती ज्ञान मंदिर भंभुवा की घटना प्रकाश में आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जिले भर में संचालित 248 स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है।
जारी नोटिस में इन विद्यालयों के संचालकों से बगैर मान्यता स्कूल संचालन के बाबत जवाब मांगा गया है। साथ ही रजिस्ट्रेशन के बाबत कार्रवाई के लिए भी निर्देशित किया गया है।
बीएसए गोंडा डॉ. फतेहबहादुर सिंह ने कहा कि सरस्वती ज्ञान मंदिर भंभुवा की घटना से वह भी दुखी हैं। लेकिन वे चाह कर भी इस मामले में कुछ नहीं कर सकते।
क्योंकि नियमत: किसी भी विद्यालय का संचालन बगैर मान्यता के नहीं होना चाहिए। अभिभावकों को भी यह चाहिए कि वह अपने बच्चों का दाखिला कराते वक्त उस विद्यालय की पूरी पड़ताल कर लें।
अगर विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक पहले इसकी जानकारी कर लेते तो शायद उन्हें आज इसकी दिक्कतों से न जूझना पड़ता। जिले के सारे गैर मान्यता के विद्यालय को उन्होंने नोटिस जारी किया है। जिन पर वह कार्रवाई करने की तैयारी में हैं।
विज्ञापन
बीती 27 जनवरी को करनैलगंज के भंभुवा में संचालित सरस्वती ज्ञान मंदिर के दो बच्चे स्कूल में लगे वाहन के पलट जाने से उसके नीचे दबकर काल कलवित हो गए थे।
हादसे के वक्त मैजिक में करीब 22 बच्चे सवार थे, जिसमें सभी को हल्की-फुल्की चोटें आईं। हादसे के बाद लोगों और जनप्रतिनिधियों का आक्रोश देखते हुए आनन-फानन में शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल की जांच कराई गई।
विज्ञापन
जिसमें पता चलने पर कि विद्यालय का कोई रजिस्ट्रेशन ही नहीं है, पर स्कूल संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी कर बिना मान्यता के विद्यालय संचालित करने का मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद से न सिर्फ विद्यालय का संचालक फरार है, बल्कि स्कूल के प्रधानाचार्य से लेकर अन्य स्टाफ भी विद्यालय बंद कर नदारद है।
विज्ञापन
उधर, एक हफ्ता बीतने के बावजूद विद्यालय न खुलने से इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक अपने-अपने नौनिहालो के भविष्य को लेकर परेशान हैं। क्योंकि मामला स्कूल में पढ़ने वाले कुछ बच्चों का नहीं बल्कि विद्यालय में पंजीकृत कक्षा एक से लेकर कक्षा 10 तक के 256 बच्चों का है। जिनकी एक साल की मेहनत विद्यालय बंद होने से दांव पर लगी हुई है।
इसे लेकर न तो बच्चों के अभिभावक कुछ कर पा रहे हैं और न ही बेसिक शिक्षा विभाग। क्योंकि सत्र समाप्ति में अब केवल ढाई महीने का ही समय शेष बचा है। इतने कम समय में न तो इन बच्चों का किसी दूसरे स्कूल में दाखिला हो सकता है और न ही वह अपनी पढ़ाई पूरी कर परीक्षा दे सकते हैं।
सरस्वती ज्ञान मंदिर भंभुवा में अपने बच्चों का दाखिला कराने वाले अभिभावक बब्लू गुप्त, सुरेश शुक्ल, प्रदीप तिवारी, शिवराम शुक्ल, राकेश सिंह, दिनेश शुक्ल आदि का कहना है कि विद्यालय 27 जनवरी से ही बंद चल रहा है, जिसके कारण वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं।
अप्रैल से लेकर जुलाई तक एडमिशन कराने के बाद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई पर हजारों रुपये खर्च किए हैं। अगर स्कूल नहीं खुला तो उनके बच्चों का भविष्य चौपट हो जाएगा।
सरस्वती ज्ञान मंदिर भंभुवा की घटना प्रकाश में आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जिले भर में संचालित 248 स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है।
जारी नोटिस में इन विद्यालयों के संचालकों से बगैर मान्यता स्कूल संचालन के बाबत जवाब मांगा गया है। साथ ही रजिस्ट्रेशन के बाबत कार्रवाई के लिए भी निर्देशित किया गया है।
बीएसए गोंडा डॉ. फतेहबहादुर सिंह ने कहा कि सरस्वती ज्ञान मंदिर भंभुवा की घटना से वह भी दुखी हैं। लेकिन वे चाह कर भी इस मामले में कुछ नहीं कर सकते।
क्योंकि नियमत: किसी भी विद्यालय का संचालन बगैर मान्यता के नहीं होना चाहिए। अभिभावकों को भी यह चाहिए कि वह अपने बच्चों का दाखिला कराते वक्त उस विद्यालय की पूरी पड़ताल कर लें।
अगर विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक पहले इसकी जानकारी कर लेते तो शायद उन्हें आज इसकी दिक्कतों से न जूझना पड़ता। जिले के सारे गैर मान्यता के विद्यालय को उन्होंने नोटिस जारी किया है। जिन पर वह कार्रवाई करने की तैयारी में हैं।