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40 करोड़ का अनुदान अभिभावकों ने लिया, नहीं खरीदी सामग्री
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गोंडा। परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की अनुदान राशि अभिभावकों तक तो पहुंच गयी लेकिन बच्चों को इसका फायदा नहीं मिल पाया। इस दौरान करीब 40 करोड़ की अनुदान राशि चार लाख अभिभावकों को मिली लेकिन इससे बच्चों के लिए कोई सामान नहीं खरीदा गया। अब विभाग अनुदान का हिसाब किताब मांग रहा है। अनुदान राशि का हिसाब न देने वाले बच्चों के अभिभावकों को नए सत्र में कोई अनुदान नहीं मिलेगा।
नए शैक्षिक सत्र में भी सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों के विद्यार्थियों को यूनिफार्म, जूता-मोजा, स्वेटर और स्कूल बैग का पैसा डीबीटी के रूप में दिए जाने की तैयारी है। यह अनुदान राशि पुराने विद्यार्थियों को तभी मिलेगी जब उनके अभिभावक पूर्व में मिली डीबीटी की धनराशि से खरीदे गए सामान का पूरा हिसाब किताब प्रस्तुत करेंगे। डीबीटी के तहत 1100 रुपये की धनराशि अभिभावकों के खाते में भेजी गयी थी। जिले के 4.10 लाख में से 3.69 लाख बच्चों को इसका लाभ मिला था। अनुदान राशि के सही इस्तेमाल की सत्यापन रिपोर्ट प्रधानाध्यापक को देना होगी। इसके प्रमाण स्वरूप बच्चे की पूरी यूनिफार्म, जूता-मोजा, स्वेटर पहने और स्कूल बैग लिए फोटो खींच कर मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड करना होगी। नए सत्र में 20 मई तक स्कूलों में नामांकित सभी नए विद्यार्थियों का नाम प्रेरणा पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा और पुराने बच्चों का भी नए सिरे से नवीनीकरण कराना होगा। (संवाद)
अभी तक 41 हजार को नहीं मिल सका लाभ
31 मार्च को खत्म हो रहे शैक्षिक सत्र में 4.10 लाख बच्चों को योजना का लाभ मिलना था। बैंकों की लापरवाही के चलते 41 हजार बच्चों को अभी तक इस योजना का लाभ नहीं मिल सका है। इसके चलते विभाग की ओर से भेजी गई धनराशि वापस आ गई है। बताया जा रहा है कि कई बार आदेश के बाद भी 41 हजार छात्रों के अभिभावकों के बैंक खातों को आधार से लिंक नहीं कराया था। इसी कारण ऐसे बच्चे योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए। अब 31 मार्च तक इनके खातों को सही कराकर धनराशि भेजे जाने की तैयारी है।
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छात्रों को सामग्री का अनुदान देने के लिए नया आदेश आ गया है। इसमें पुराने छात्रों को मिली धनराशि के आधार पर तय सामग्री क्रय करने पर ही दोबारा अनुदान मिलेगा। विनोद कुमार जायसवाल, जिला समन्वयक समग्र शिक्षा अभियान
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नए शैक्षिक सत्र में भी सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों के विद्यार्थियों को यूनिफार्म, जूता-मोजा, स्वेटर और स्कूल बैग का पैसा डीबीटी के रूप में दिए जाने की तैयारी है। यह अनुदान राशि पुराने विद्यार्थियों को तभी मिलेगी जब उनके अभिभावक पूर्व में मिली डीबीटी की धनराशि से खरीदे गए सामान का पूरा हिसाब किताब प्रस्तुत करेंगे। डीबीटी के तहत 1100 रुपये की धनराशि अभिभावकों के खाते में भेजी गयी थी। जिले के 4.10 लाख में से 3.69 लाख बच्चों को इसका लाभ मिला था। अनुदान राशि के सही इस्तेमाल की सत्यापन रिपोर्ट प्रधानाध्यापक को देना होगी। इसके प्रमाण स्वरूप बच्चे की पूरी यूनिफार्म, जूता-मोजा, स्वेटर पहने और स्कूल बैग लिए फोटो खींच कर मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड करना होगी। नए सत्र में 20 मई तक स्कूलों में नामांकित सभी नए विद्यार्थियों का नाम प्रेरणा पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा और पुराने बच्चों का भी नए सिरे से नवीनीकरण कराना होगा। (संवाद)
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अभी तक 41 हजार को नहीं मिल सका लाभ
31 मार्च को खत्म हो रहे शैक्षिक सत्र में 4.10 लाख बच्चों को योजना का लाभ मिलना था। बैंकों की लापरवाही के चलते 41 हजार बच्चों को अभी तक इस योजना का लाभ नहीं मिल सका है। इसके चलते विभाग की ओर से भेजी गई धनराशि वापस आ गई है। बताया जा रहा है कि कई बार आदेश के बाद भी 41 हजार छात्रों के अभिभावकों के बैंक खातों को आधार से लिंक नहीं कराया था। इसी कारण ऐसे बच्चे योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए। अब 31 मार्च तक इनके खातों को सही कराकर धनराशि भेजे जाने की तैयारी है।
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छात्रों को सामग्री का अनुदान देने के लिए नया आदेश आ गया है। इसमें पुराने छात्रों को मिली धनराशि के आधार पर तय सामग्री क्रय करने पर ही दोबारा अनुदान मिलेगा। विनोद कुमार जायसवाल, जिला समन्वयक समग्र शिक्षा अभियान