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सिंचाई विभाग की ढिलाई से कछार पर बसे लोगों की बेचैनी बढ़ी

Wed, 16 Jun 2021 08:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jun 2021 08:54 PM IST
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Saryu's water level nears danger mark, increased uneasiness
गोंडा के करनैलगंज में घाघरा की बाढ़ से बचाने के लिए लगाया जा रहा परख्यूपाइन। - फोटो : GONDA
गोंडा। लगातार बारिश से सरयू नदी (घाघरा) का नदी का जलस्तर खतरे के निशान को छूने को करीब है। अभी तक बांध की मरम्मत, रेन कट आदि काम पूरा नहीं हुआ है। बांध के आसपास रहने वालों की चिंता बढ़ गई है।
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तीन दिन से लगातार बारिश व बैराजों से छोड़े गए पानी से सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पहुंच गया है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघरा घाट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार सोमवार को घाघरा का टोटल डिस्चार्ज 58 हजार 3 सौ 57 क्यूसेक था।
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मंगलवार को बढ़कर एक लाख 96 हजार 7 सौ 4 हो गया। बुधवार की सुबह एक लाख 52 हजार 451 क्यूसेक दर्ज किया गया। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 105.456 पर पहुंच गया है। लगातार बढ़ रहे घाघरा के जलस्तर से ग्रामीणों में दहशत है, वहीं सिंचाई विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की चहलकदमी बढ़ गईं है।
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गोंडा व बाराबंकी जिलों के बॉर्डर पर घाघरा के जद में आने वाले मजरों के ग्रामीण अपने परिवार व मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है प्रशासन स्तर से कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है।
करीब 54 किमी लंबे एल्गिन चरसडी बांध पर फूस का मकान बनाकर रह रहे लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ आती है, लेकिन गरीबों की किसी को चिंता नहीं रहती है। वर्षों से ऐसे ही जीवन यापन कर रहे हैं। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे करीब दो दर्जन मजरों के सापेक्ष सात मजरे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इनमें तपेसिपा, बेहटा, नकहरा, मांझा रायपुर, नैपुरा व परसावल शामिल है।
बाढ़ से घिरे ग्रामीणों तक राहत सामग्री पहुंचने के लिए तहसील स्तर से गौरा सिंहपुर, पाल्हापुर, भटपुरवा, शाहपुर, चरसडी व नरायनपुर मांझा सहित कुल 17 जगहों पर बाढ़ चौकियां स्थापित की जाती हैं।
एल्गिन चरसडी बांध से कुछ ही दूरी पर तपेसिपा गांव के पास बांध की सुरक्षा के लिए पत्थरों को तार से बांधने का कार्य हो रहा है। साथ ही जेसीवी व पोकलैंड मशीनों से मिट्टी पटाई का कार्य जारी है।
करनैलगंज के नवागत एसडीएम हीरालाल यादव ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र का भ्रमण कर वहां के ग्रामीणों, मवेशियों के चारे व भोजन के साथ रहने की व्यवस्था आदि की कार्ययोजना तैयार किया है।

बाढ़ राहत चौकियों की स्थापना करवाने के कार्य में तेजी लाई जा रही है। बाढ़ खंड के एई अमरेश सिंह व जेई करुणाकर मिश्र ने बताया बाढ़ आने से पहले 30 जून तक हर हाल में बांध मरम्मत कार्य पूरा हो जाएगा। बांध को इस बार कोई खतरा नहीं है।
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