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बिना मान्यता चल रहे 200 स्कूल
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Dec 2015 10:47 PM IST
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जिले में दो सौ से अधिक विद्यालय बिना मान्यता के संचालित हैं। इन स्कूलों में अप्रशिक्षित शिक्षकों के भरोसे हजारों बच्चों का भविष्य चौपट किया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी जानते हुए भी इन पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम यहां मायने नहीं रखता। बिना मानक के ही यहां सैकड़ों विद्यालय संचालित हो रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी निजी स्कूलों की जांच नहीं करते हैं और यदि जांच करते भी हैं तो ले-देकर मामला रफा-दफा कर देते हैं।
यही कारण है कि जिले में बिना मान्यता के करीब 200 स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें अप्रशिक्षित अध्यापक बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
यदि विद्यालय बिना मान्यता के हाईस्कूल तक संचालित है तो उसे कोचिंग में दर्ज कर अधिकारी मामले को रफा-दफा कर देते हैं और यदि केवल जूनियर स्तर तक विद्यालय चल रहा है तो उन पर कार्रवाई नहीं की जाती है।
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ये तो एक बानगी भर है। जिले में इस तरह के स्कूलों की भरमार है। जिन्हे न तो मान्यता मिली है और न ही इनमें तो योग्य शिक्षक हैं।
कटराबाजार में एक दर्जन से अधिक स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। रामापुर से दुबहा मार्ग पर श्री लार्डकृष्णा एकेडमी खोल दिया गया।
दुकान में कार्यालय संचालित कर दिया गया और टीनशेड रखकर विद्यालय संचालित कर दिया गया। इस विद्यालय में न तो प्रशिक्षित शिक्षक हैं और न ही मान्यता है। लेकिन अधिकारियों की शह पर यह विद्यालय नौनिहालों का भविष्य को चौपट कर रहा है।
इतना ही नहीं, इस विद्यालय में नर्सरी से कक्षा पांच तक अंग्रेजी माध्यम से और कक्षा छह से इंटर तक हिंदी माध्यम से शिक्षा दिए जाने का बोर्ड लगाया गया है।
खंड शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश ने बताया कि मामला संज्ञान में है। शीघ्र ही विद्यालय पर छापेमारी की जाएगी और बिना मान्यता के स्कूल संचालन पर रोक लगाई जाएगी।
आर्यनगर कस्बे में केडी कॉवेंट स्कूल का संचालन अप्रैल 2014 से किया जा रहा है। इस विद्यालय में प्ले ग्रुप से कक्षा आठ तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
बीआरसी मुख्यालय पर यह विद्यालय संचालित है, लेकिन यहां के खंड शिक्षा अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्कूल के संचालक सतीश मिश्र ने बताया कि शीघ्र ही मान्यता के लिए आवेदन किया जाएगा।
नियम यह है कि कोई भी विद्यालय बिना मान्यता के संचालित नहीं होगा। स्कूल संचालन के पर्याप्त संसाधन, योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षक, स्वच्छ वातावरण, खेल मैदान व मान्यता जरूरी है। यदि इन संसाधनों के अभाव में स्कूल संचालित किया जा रहा है तो एक लाख रुपये तक जुर्माना किया जा सकता है। लेकिन यहां बिना मान्यता के स्कूल बिना किसी डर दबाव के चलाए जा रहे हैं।
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम यहां मायने नहीं रखता। बिना मानक के ही यहां सैकड़ों विद्यालय संचालित हो रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी निजी स्कूलों की जांच नहीं करते हैं और यदि जांच करते भी हैं तो ले-देकर मामला रफा-दफा कर देते हैं।
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यही कारण है कि जिले में बिना मान्यता के करीब 200 स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें अप्रशिक्षित अध्यापक बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
यदि विद्यालय बिना मान्यता के हाईस्कूल तक संचालित है तो उसे कोचिंग में दर्ज कर अधिकारी मामले को रफा-दफा कर देते हैं और यदि केवल जूनियर स्तर तक विद्यालय चल रहा है तो उन पर कार्रवाई नहीं की जाती है।
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ये तो एक बानगी भर है। जिले में इस तरह के स्कूलों की भरमार है। जिन्हे न तो मान्यता मिली है और न ही इनमें तो योग्य शिक्षक हैं।
कटराबाजार में एक दर्जन से अधिक स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। रामापुर से दुबहा मार्ग पर श्री लार्डकृष्णा एकेडमी खोल दिया गया।
दुकान में कार्यालय संचालित कर दिया गया और टीनशेड रखकर विद्यालय संचालित कर दिया गया। इस विद्यालय में न तो प्रशिक्षित शिक्षक हैं और न ही मान्यता है। लेकिन अधिकारियों की शह पर यह विद्यालय नौनिहालों का भविष्य को चौपट कर रहा है।
इतना ही नहीं, इस विद्यालय में नर्सरी से कक्षा पांच तक अंग्रेजी माध्यम से और कक्षा छह से इंटर तक हिंदी माध्यम से शिक्षा दिए जाने का बोर्ड लगाया गया है।
खंड शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश ने बताया कि मामला संज्ञान में है। शीघ्र ही विद्यालय पर छापेमारी की जाएगी और बिना मान्यता के स्कूल संचालन पर रोक लगाई जाएगी।
आर्यनगर कस्बे में केडी कॉवेंट स्कूल का संचालन अप्रैल 2014 से किया जा रहा है। इस विद्यालय में प्ले ग्रुप से कक्षा आठ तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
बीआरसी मुख्यालय पर यह विद्यालय संचालित है, लेकिन यहां के खंड शिक्षा अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्कूल के संचालक सतीश मिश्र ने बताया कि शीघ्र ही मान्यता के लिए आवेदन किया जाएगा।
नियम यह है कि कोई भी विद्यालय बिना मान्यता के संचालित नहीं होगा। स्कूल संचालन के पर्याप्त संसाधन, योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षक, स्वच्छ वातावरण, खेल मैदान व मान्यता जरूरी है। यदि इन संसाधनों के अभाव में स्कूल संचालित किया जा रहा है तो एक लाख रुपये तक जुर्माना किया जा सकता है। लेकिन यहां बिना मान्यता के स्कूल बिना किसी डर दबाव के चलाए जा रहे हैं।