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सड़कों के लिए संजीवनी बनेगा प्लास्टिक कचरा
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गोंडा। लोक निर्माण विभाग अब जिले में नई पहल करने जा रहा है। सड़कों के मरम्मत में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल होगा। प्लास्टिक के कचरे से ही सड़कों को संजीवनी देने का काम होगा।
इसके लिए हर खंड से सड़कों के मरम्मत का कार्य शुरू होगा। इससे एक तो लोगों के जी का जंजाल बन चुका प्लास्टिक कचरे का निस्तारण होगा और उससे सड़कें मजूबत होंगी। पहले चरण की शुरूआत इसी महीने से होनी हैं और पीडब्लूडी के हर खंड को कम से कम एक-एक सड़क का मरम्मत प्लास्टिक कचरे से करना है।
इसके लिए हर खंड से प्रस्ताव मांगे गए हैं। अधीक्षण अभियंता संजय कुमार सिंहा कहते हैं कि इससे सड़कें और मजबत होंगी, साथ ही मरम्मत के बजट में कमी भी आएगी। नए वित्तीय वर्ष से सड़कों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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जिले में करीब 1000 सड़कें इस बार मरम्मत के पाई गईं थीं। जिनके लिए बजट भी तैयार हुआ था लेकिन शासन से एक करोड़ का बजट जिले को मिला था। सड़कों का मरम्मत डामर से किये जाने में पानी के चलते उनके जल्दी क्षतिग्रस्त होने की संभावना रहती है।
अब पीडब्लूडी ने शासन के निर्देश पर आधा दर्जन से अधिक सड़कों का मरम्मत प्लास्टिक कचरे से करने की योजना तैयार की है। अधिक्षण अभियंता संजय सिंहा ने तीनों निर्माण खंडों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस महीने से सड़कों के मरम्मत की कार्रवाई शुरू होगी।
बताया जा रहा है कि प्रांतीय खंड शहर की प्रमुख सड़कों को इस योजना में शामिल करेगा। इसके अलावा निर्माण खंड एक व दो ग्रामीण सड़कों के मरम्मत का कार्य के लिए चिह्नित कर रहा है।
पांच से दस किमी लंबी सड़कों को ही इस योजना में शामिल किया जाना है। ऐसे में इस बार आधा दर्जन सड़कों को ही प्लास्टिक कचरे से बनाने की तैयारी हो रही है। इस महीने में निर्माण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
लंबी होगी सड़कों की आयु
प्लास्टिक कचरे सड़कों का मरम्मत करने से पहले प्लास्टिक के महीन टुकडे़ मशीन से किये जाएंगे। हॉटमिक्स प्लांट में प्लास्टिक के टुकड़ों को डामर में मिलाकर गर्म किया जाएगा। इससे डामर व प्लास्टिक मिश्रित हो जाएगी। इसके बाद इसे सड़क पर डाला जाएगा।
प्लास्टिक कचरे को डामर में मिलाकर बनने वाली सड़कों की अवधि लंबी होगी। डामर की सड़कें अधिकतर पांच साल तक भी नही चल पाती हैं। लेकिन प्लास्टिक के कचरे से बनी सड़कें सात से दस साल तक चलेंगी। इसकी वजह है कि सड़कों पर जलभराव या बारिश से डामर भीग जाता है।
अगर पानी ज्यादा दिन भरा रहता है तो सड़क उखड़ने लगती हैं। अगर प्लास्टिक मिश्रित डामर होगा तो पानी भरने पर फर्क नहीं पड़ेगा। पीडब्लूडी के अवर अभियंता तकनीक निरंजन यादव कहते हैं कि प्लास्टिक का उपयोग कर बनीं सड़कों में बारिश के समय गड्ढे नहीं होंगे। तीन से पांच साल तक चलने वाली सड़कों की उम्र 10 साल तक बढ़ सकती है। बारिश के समय पानी का असर भी इस पर नहीं होगा।
पर्यावरण की सुरक्षा संग मिलेगा रोजगार
प्लास्टिक कचरे की समस्या शहर में बहुत है। अस्पताल से भी बड़ी संख्या में प्लास्टिक कचरा बाहर आता है। शहर में ही अनुमान के मुताबिक 100 टन से अधिक कूड़ा रोज निकलता है। इन कूड़ों में दो से तीन फीसदी प्लास्टिक होती है। ऐसे में करीब दो से तीन टन प्लास्टिक कचरा होता है।
विभाग की मानें तो टू- लेन की एक किमी सड़क निर्माण में करीब ढाई टन प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल होगा। ऐसे में हर दिन एक किमी टू-लेन सड़क शहर के कूड़े से ही बनेगी। इसके अलावा संपर्क मार्ग की बात करें तो रोज दो किमी सड़कों का मरम्मत हो सकेगा।
इसी तरह साल भर में एक हजार टन प्लास्टिक कचरा मिल सकता है। इससे प्लास्टिक कचरा खत्म होने से पर्यावरण की सुरक्षा होगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। विस्तृत योजना अभी तैयार की जा रही है।
प्लास्टिक कचरे से सड़कों के मरम्मत की कार्य योजना तैयार की गई है। तीनों खंड से जर्जर सड़कों के मरम्मत का प्रस्ताव मांगा गया है। प्लास्टिक कचरे से सड़क मरम्मत से कई तरह के फायदे हैं।
- संजय कुमार सिंहा, अधीक्षण अभियंता गोंडा
- पीडब्लूडी विभाग की ओर से प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण की पहल से स्वच्छता मुहिम को भी रफ्तार मिलेगी। सड़कों में भी मजबूती आएगी और वाहनों के टायरों की सुरक्षा भी होगी।
- शशांक त्रिपाठी, सीडीओ
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इसके लिए हर खंड से सड़कों के मरम्मत का कार्य शुरू होगा। इससे एक तो लोगों के जी का जंजाल बन चुका प्लास्टिक कचरे का निस्तारण होगा और उससे सड़कें मजूबत होंगी। पहले चरण की शुरूआत इसी महीने से होनी हैं और पीडब्लूडी के हर खंड को कम से कम एक-एक सड़क का मरम्मत प्लास्टिक कचरे से करना है।
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इसके लिए हर खंड से प्रस्ताव मांगे गए हैं। अधीक्षण अभियंता संजय कुमार सिंहा कहते हैं कि इससे सड़कें और मजबत होंगी, साथ ही मरम्मत के बजट में कमी भी आएगी। नए वित्तीय वर्ष से सड़कों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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जिले में करीब 1000 सड़कें इस बार मरम्मत के पाई गईं थीं। जिनके लिए बजट भी तैयार हुआ था लेकिन शासन से एक करोड़ का बजट जिले को मिला था। सड़कों का मरम्मत डामर से किये जाने में पानी के चलते उनके जल्दी क्षतिग्रस्त होने की संभावना रहती है।
अब पीडब्लूडी ने शासन के निर्देश पर आधा दर्जन से अधिक सड़कों का मरम्मत प्लास्टिक कचरे से करने की योजना तैयार की है। अधिक्षण अभियंता संजय सिंहा ने तीनों निर्माण खंडों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस महीने से सड़कों के मरम्मत की कार्रवाई शुरू होगी।
बताया जा रहा है कि प्रांतीय खंड शहर की प्रमुख सड़कों को इस योजना में शामिल करेगा। इसके अलावा निर्माण खंड एक व दो ग्रामीण सड़कों के मरम्मत का कार्य के लिए चिह्नित कर रहा है।
पांच से दस किमी लंबी सड़कों को ही इस योजना में शामिल किया जाना है। ऐसे में इस बार आधा दर्जन सड़कों को ही प्लास्टिक कचरे से बनाने की तैयारी हो रही है। इस महीने में निर्माण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
लंबी होगी सड़कों की आयु
प्लास्टिक कचरे सड़कों का मरम्मत करने से पहले प्लास्टिक के महीन टुकडे़ मशीन से किये जाएंगे। हॉटमिक्स प्लांट में प्लास्टिक के टुकड़ों को डामर में मिलाकर गर्म किया जाएगा। इससे डामर व प्लास्टिक मिश्रित हो जाएगी। इसके बाद इसे सड़क पर डाला जाएगा।
प्लास्टिक कचरे को डामर में मिलाकर बनने वाली सड़कों की अवधि लंबी होगी। डामर की सड़कें अधिकतर पांच साल तक भी नही चल पाती हैं। लेकिन प्लास्टिक के कचरे से बनी सड़कें सात से दस साल तक चलेंगी। इसकी वजह है कि सड़कों पर जलभराव या बारिश से डामर भीग जाता है।
अगर पानी ज्यादा दिन भरा रहता है तो सड़क उखड़ने लगती हैं। अगर प्लास्टिक मिश्रित डामर होगा तो पानी भरने पर फर्क नहीं पड़ेगा। पीडब्लूडी के अवर अभियंता तकनीक निरंजन यादव कहते हैं कि प्लास्टिक का उपयोग कर बनीं सड़कों में बारिश के समय गड्ढे नहीं होंगे। तीन से पांच साल तक चलने वाली सड़कों की उम्र 10 साल तक बढ़ सकती है। बारिश के समय पानी का असर भी इस पर नहीं होगा।
पर्यावरण की सुरक्षा संग मिलेगा रोजगार
प्लास्टिक कचरे की समस्या शहर में बहुत है। अस्पताल से भी बड़ी संख्या में प्लास्टिक कचरा बाहर आता है। शहर में ही अनुमान के मुताबिक 100 टन से अधिक कूड़ा रोज निकलता है। इन कूड़ों में दो से तीन फीसदी प्लास्टिक होती है। ऐसे में करीब दो से तीन टन प्लास्टिक कचरा होता है।
विभाग की मानें तो टू- लेन की एक किमी सड़क निर्माण में करीब ढाई टन प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल होगा। ऐसे में हर दिन एक किमी टू-लेन सड़क शहर के कूड़े से ही बनेगी। इसके अलावा संपर्क मार्ग की बात करें तो रोज दो किमी सड़कों का मरम्मत हो सकेगा।
इसी तरह साल भर में एक हजार टन प्लास्टिक कचरा मिल सकता है। इससे प्लास्टिक कचरा खत्म होने से पर्यावरण की सुरक्षा होगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। विस्तृत योजना अभी तैयार की जा रही है।
प्लास्टिक कचरे से सड़कों के मरम्मत की कार्य योजना तैयार की गई है। तीनों खंड से जर्जर सड़कों के मरम्मत का प्रस्ताव मांगा गया है। प्लास्टिक कचरे से सड़क मरम्मत से कई तरह के फायदे हैं।
- संजय कुमार सिंहा, अधीक्षण अभियंता गोंडा
- पीडब्लूडी विभाग की ओर से प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण की पहल से स्वच्छता मुहिम को भी रफ्तार मिलेगी। सड़कों में भी मजबूती आएगी और वाहनों के टायरों की सुरक्षा भी होगी।
- शशांक त्रिपाठी, सीडीओ