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Gonda News: पसका पर्व का शुभारंभ, आज श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी
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गोंडा के पसका सूकरखेत में सरयू की महाआरती में शामिल विधायक व अन्य। -संवाद
- फोटो : GONDA
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परसपुर (गोंडा)। पौराणिक मान्यताओं को सहेजे भगवान वाराह की अवतार स्थली पसका सूकरखेत में लगने वाला मेला पसका पर्व का शुभारंभ गुरुवार को हो गया। शाम को गाजे बाजे के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां सरयू जी की महाआरती की।
नागा, साधु-सन्यासियों, विधायक अजय सिंह व श्रद्धालुओं ने मां सरयू के पावन तट पर खड़े होकर महाआरती की। पौष पूर्णिमा का मुख्य स्नान पर्व शुक्रवार को होगा। जिसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचकर मां सरयू की धारा में आस्था की डुबकी लगा पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
मान्यता है इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए भगवान वाराह का रूप धारण किया था। इस तपोस्थली को सूकरखेत या वाराह क्षेत्र भी कहा जाता है। धार्मिक स्थली को लोग स्वर्ग की भी संज्ञा देते हैं। पवित्र सरयू नदी के तट पर बड़ी संख्या में नागा, साधु-सन्यासी व गृहस्थों ने सांसारिक सुख सुविधाओं को छोड़कर फूस की कुटिया डाल कर तपस्या में लीन रहते हैं। सूकरखेत में सरयू व घाघरा दो नदियां मिलती हैं। इसलिए इसे संगम भी कहते हैं। संगम स्थल पर बांध बनने से यहां नदियों का संगम नहीं हो पा रहा है।
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मान्यता है कि राजापुर सूकरखेत में श्रीरामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म हुआ था। यहां तुलसीदास जी के गुरु नरहरिदास जी का आश्रम विद्यमान है। मानस के बालकांड में इस स्थान का उल्लेख तुलसीदास जी ने खुद किया है। कहते हैं तुलसीदास जी ने इस पुण्य भूमि पर अपने गुरु से दीक्षा प्राप्त की थी। उनके गुरु के आश्रम में आज भी हस्त लिखित श्रीरामचरित मानस के पन्ने इस स्थली के ऐतिहासिकता की गवाही दे रहे हैं।
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नागा, साधु-सन्यासियों, विधायक अजय सिंह व श्रद्धालुओं ने मां सरयू के पावन तट पर खड़े होकर महाआरती की। पौष पूर्णिमा का मुख्य स्नान पर्व शुक्रवार को होगा। जिसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचकर मां सरयू की धारा में आस्था की डुबकी लगा पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
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मान्यता है इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए भगवान वाराह का रूप धारण किया था। इस तपोस्थली को सूकरखेत या वाराह क्षेत्र भी कहा जाता है। धार्मिक स्थली को लोग स्वर्ग की भी संज्ञा देते हैं। पवित्र सरयू नदी के तट पर बड़ी संख्या में नागा, साधु-सन्यासी व गृहस्थों ने सांसारिक सुख सुविधाओं को छोड़कर फूस की कुटिया डाल कर तपस्या में लीन रहते हैं। सूकरखेत में सरयू व घाघरा दो नदियां मिलती हैं। इसलिए इसे संगम भी कहते हैं। संगम स्थल पर बांध बनने से यहां नदियों का संगम नहीं हो पा रहा है।
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मान्यता है कि राजापुर सूकरखेत में श्रीरामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म हुआ था। यहां तुलसीदास जी के गुरु नरहरिदास जी का आश्रम विद्यमान है। मानस के बालकांड में इस स्थान का उल्लेख तुलसीदास जी ने खुद किया है। कहते हैं तुलसीदास जी ने इस पुण्य भूमि पर अपने गुरु से दीक्षा प्राप्त की थी। उनके गुरु के आश्रम में आज भी हस्त लिखित श्रीरामचरित मानस के पन्ने इस स्थली के ऐतिहासिकता की गवाही दे रहे हैं।