{"_id":"6341bced17f731723a0ba3c4","slug":"river-gonda-flud-saru-gonda-news-lko6519629177","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरयू नदी खतरे के निशान से 38 सेमी. ऊपर, बाढ़ का खतरा बढ़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरयू नदी खतरे के निशान से 38 सेमी. ऊपर, बाढ़ का खतरा बढ़ा
विज्ञापन
फोटो-17-गोंडा में करनैलगंज के माझा रायपुर में भरा बाढ़ का पानी। -संवाद
- फोटो : GONDA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करनैलगंज/उमरीबेगमगंज (गोंडा)। भारी बारिश, पहाड़ी नालों व बैराजों के पानी से सरयू नदी का जलस्तर एक बार तेजी से बढ़ गया है। सरयू नदी का जलस्तर 24 घंटे में एक मीटर ऊपर पहुंच कर खतरे के निशान से 38 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। जिससे करनैलगंज तहसील क्षेत्र के एक गांव और तरबगंज के 18 गांव में फिर से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
तरबगंज क्षेत्र के ऐलीपरसौली गांव के 14 मजरों में बाढ़ से 350 परिवार घिर गए हैं। वहीं, करनैलगंज तहसील के नकहरा गांव के एक दर्जन मजरे फिर से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। डीएम डॉ. उज्जवल कुमार ने तरबगंज व करनैलगंज तहसील के अधिकारियों को सतर्ककिया है।
करनैलगंज तहसील में गोंडा और बाराबंकी सीमा पर बने एल्गिन चरसड़ी बांध के पुराने हिस्से के पास बसे गांव में पानी का सैलाब हो चुका है। जिसमें बाराबंकी जिले के माझा रायपुर, नउवन पुरवा, परसावल, नैपूरा, तिलवारी, कमियार, कमरौली गांव शामिल है।
विज्ञापन
गोंडा जिले के ग्राम नकहरा के एक दर्जन मजरे फिर से जलमग्न हो चुके हैं। शनिवार शाम तक सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 38 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। लगातार बढ़ घट रहे जलस्तर से फिर से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ खंड के जेई रवि वर्मा बताते हैं कि नदी का जलस्तर बढ़ने से बांध को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।
बाढ़ का बढ़ा दायरा, गांव बने टापू
तरबगंज तहसील में ऐलीपरसौली के 14 मजरे में रहने वाले 350 परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। गांव के कई मजरे टापू बन गए तो कई घरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। लोग पलायन को मजबूर हो रहे हैं। वहीं भिखारीपुर सकरौर तटबंध पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विभागीय अधिकारी बांध के सुरक्षित होने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण बांध की सुरक्षा को लेकर सशंकित नजर आ रहे हैं।
ऐलीपरसौली के मजरे केवटाही, नईबस्ती, गोड़ियाना, बिहारी पुरवा, लोनियन पुरवा में रहने वाली करीब 2000 आबादी बाढ़ से प्रभावित है। गोड़ियाना के बलवान यादव कहते हैं कि इस बार बाढ़ का पानी घर में घुस जाने से रहन-सहन और भोजन की समस्या उत्पन्न हो गई है। नई बस्ती के रामदेव, ध्रुव राज, राजेंद्र, रामकिशुन व हनुमान के घरों में भी पानी घुस चुका है। यह लोग भी सुरक्षित स्थान की तलाश में बाढ़ चौकी की तरफ जा रहे हैं। लेखपाल अंकित कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए 13 नावें लगाई गई हैं।
शनिवार को जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने लगातार बारिश के कारण जलभराव से प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्राम कुरासी, गौनरिया, भोलाजोत, गोपालबाग आदि का निरीक्षण कर ग्रामीणों से मुलाकात की। मौके पर संबंधित अधिकारियों के सख्त निर्देश दिए हैं कि जलभराव से परेशान ग्रामीणों को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराया जाय।
इस दौरान अपर जिलाधिकारी सुरेश कुमार सोनी, उप जिलाधिकारी सदर विनोद कुमार सिंह, जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव, पुलिस क्षेत्राधिकारी लक्ष्मीकांत गौतम, एसओ खरगूपुर मय टीम, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल आदि रहे।
विज्ञापन
तरबगंज क्षेत्र के ऐलीपरसौली गांव के 14 मजरों में बाढ़ से 350 परिवार घिर गए हैं। वहीं, करनैलगंज तहसील के नकहरा गांव के एक दर्जन मजरे फिर से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। डीएम डॉ. उज्जवल कुमार ने तरबगंज व करनैलगंज तहसील के अधिकारियों को सतर्ककिया है।
विज्ञापन
करनैलगंज तहसील में गोंडा और बाराबंकी सीमा पर बने एल्गिन चरसड़ी बांध के पुराने हिस्से के पास बसे गांव में पानी का सैलाब हो चुका है। जिसमें बाराबंकी जिले के माझा रायपुर, नउवन पुरवा, परसावल, नैपूरा, तिलवारी, कमियार, कमरौली गांव शामिल है।
विज्ञापन
गोंडा जिले के ग्राम नकहरा के एक दर्जन मजरे फिर से जलमग्न हो चुके हैं। शनिवार शाम तक सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 38 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। लगातार बढ़ घट रहे जलस्तर से फिर से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ खंड के जेई रवि वर्मा बताते हैं कि नदी का जलस्तर बढ़ने से बांध को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।
बाढ़ का बढ़ा दायरा, गांव बने टापू
तरबगंज तहसील में ऐलीपरसौली के 14 मजरे में रहने वाले 350 परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। गांव के कई मजरे टापू बन गए तो कई घरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। लोग पलायन को मजबूर हो रहे हैं। वहीं भिखारीपुर सकरौर तटबंध पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विभागीय अधिकारी बांध के सुरक्षित होने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण बांध की सुरक्षा को लेकर सशंकित नजर आ रहे हैं।
ऐलीपरसौली के मजरे केवटाही, नईबस्ती, गोड़ियाना, बिहारी पुरवा, लोनियन पुरवा में रहने वाली करीब 2000 आबादी बाढ़ से प्रभावित है। गोड़ियाना के बलवान यादव कहते हैं कि इस बार बाढ़ का पानी घर में घुस जाने से रहन-सहन और भोजन की समस्या उत्पन्न हो गई है। नई बस्ती के रामदेव, ध्रुव राज, राजेंद्र, रामकिशुन व हनुमान के घरों में भी पानी घुस चुका है। यह लोग भी सुरक्षित स्थान की तलाश में बाढ़ चौकी की तरफ जा रहे हैं। लेखपाल अंकित कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए 13 नावें लगाई गई हैं।
शनिवार को जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने लगातार बारिश के कारण जलभराव से प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्राम कुरासी, गौनरिया, भोलाजोत, गोपालबाग आदि का निरीक्षण कर ग्रामीणों से मुलाकात की। मौके पर संबंधित अधिकारियों के सख्त निर्देश दिए हैं कि जलभराव से परेशान ग्रामीणों को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराया जाय।
इस दौरान अपर जिलाधिकारी सुरेश कुमार सोनी, उप जिलाधिकारी सदर विनोद कुमार सिंह, जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव, पुलिस क्षेत्राधिकारी लक्ष्मीकांत गौतम, एसओ खरगूपुर मय टीम, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल आदि रहे।