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Gonda News: ठंड व डायबिटीज से बढ़ रहा ग्लूकोमा का खतरा
Fri, 20 Dec 2024 11:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 20 Dec 2024 11:26 PM IST
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गोंडा। ठंड व डायबिटीज के प्रभाव से ग्लूकोमा (काला मोतिया) का खतरा बढ़ रहा है। इस दौरान कोई नजर कमजोर हो जाने तो कई चश्मे का नंबर बढ़ जाने की परेशानी के साथ परीक्षण के लिए मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में पहुंच रहे हैं। बीते माह तक नेत्र विभाग की ओपीडी में जहां 70 से 80 मरीज आते थे, वहीं अब मरीजों की संख्या 120 के पार हो गई है। चिंताजनक बात यह है कि नेत्र रोग विभाग में जांच के दौरान काला मोतिया के 10 से 12 केस हर माह मिल रहे हैं।
शुक्रवार को दोपहर तक नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में 98 मरीजों का परीक्षण व उपचार हुआ। इसमें किसी की नजर कमजोर मिली तो किसी के चश्मे का नंबर बढ़ गया। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि ठंड और डायबिटीज के कारण ग्लूकोमा (काला मोतिया) के मरीज भी बढ़ रहे हैं। इस बीमारी में पीड़ित मरीजों की आंखों के सामने धीरे-धीरे अंधेरा छाने लगता है और बीमारी बढ़ने के बाद पूरी तरह दिखना बंद हो जाता है। समय रहते उपचार शुरू होने पर ग्लूकोमा से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। समय पर इलाज न कराने पर पीड़ित को पूरी तरह दिखना तक बंद हो जाता है। ठंड के दौरान डायबिटीज पीड़ितों में ग्लूकोमा का खतरा काफी बढ़ जाता है। यह अनुवांशिक तौर पर भी हो सकता है। इससे बचने के लिए नजर कमजोर होने या चश्मे का नंबर बढ़ते ही आंख की जांच जरूर करा लेना चाहिए।
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शुक्रवार को दोपहर तक नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में 98 मरीजों का परीक्षण व उपचार हुआ। इसमें किसी की नजर कमजोर मिली तो किसी के चश्मे का नंबर बढ़ गया। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि ठंड और डायबिटीज के कारण ग्लूकोमा (काला मोतिया) के मरीज भी बढ़ रहे हैं। इस बीमारी में पीड़ित मरीजों की आंखों के सामने धीरे-धीरे अंधेरा छाने लगता है और बीमारी बढ़ने के बाद पूरी तरह दिखना बंद हो जाता है। समय रहते उपचार शुरू होने पर ग्लूकोमा से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। समय पर इलाज न कराने पर पीड़ित को पूरी तरह दिखना तक बंद हो जाता है। ठंड के दौरान डायबिटीज पीड़ितों में ग्लूकोमा का खतरा काफी बढ़ जाता है। यह अनुवांशिक तौर पर भी हो सकता है। इससे बचने के लिए नजर कमजोर होने या चश्मे का नंबर बढ़ते ही आंख की जांच जरूर करा लेना चाहिए।
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