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दो गांवों को अपराधमुक्त कराने का संकल्प
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2015 11:17 PM IST
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अपराध मुक्त ग्राम योजना के तहत पुलिस विभाग ने एक क्षेत्र के राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में एक सभा का आयोजन किया। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते अपराधों को देखते हुए डीआईजी ने हर जिले में दो गांवों को अपराधमुक्त कराने का संकल्प दिलाया। साथ ही अपराधों में कमी लाने के लिए ग्रामीणों का सहयोग जरूरी बताया।
कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सकरौरा ग्रामीण स्थित आश्रम पद्धति विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीआईजी ने कहा कि इस योजना की शुरुआत जब वह एसपी थे तब ही करना चाह रहे थे, लेकिन नहीं कर पाए थे।
चारों जिलों के कप्तान से बात करने पर सहमति बनी और जिले के ऐसे दो-दो गांवों को चिह्नित करने को कहा, जहां अपराध अधिक हों। सभी अधिकारियों ने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जहां पुलिस का आना-जाना कम होता है, वहां अपराध अधिक होता है। वर्ष 2013-14 में ग्राम सकरौरा ग्रामीण में 70 पाए गए अपराध के मामलों का वर्गीकरण किया गया, जिस पर इस गांव को चुना गया।
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उन्होंने कहा कि इस गांव में अवैध शराब बनाने की भट्ठियां पहले धधकती थीं, शिक्षा और जागरूकता का अभाव था। इस कारण से अपराध होते थे। उन्होंने कहा यहां अब शराब के धंधे पर पूरी तरह से अंकुश लग चुका है। उन्होंने कहा कि सबके सहयोग से ही अपराधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
गांवों में शिक्षामित्र, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, शिक्षक, ग्राम रोजगार सेवक, एवं चौकीदार सरकारी तंत्र से जुड़े हैं। इन्हें तो इसकी सूचना समय से देनी चाहिए लेकिन ऐसा नही हो रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में सभी लोग विश्वास पात्र नही होते हैं। लेकिन जिस पर भरोसा हो उसे तो सूचित ही करना चाहिए।
सुरक्षा की दृष्टि से यातायात के नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जागरूकता के अभाव में उत्पीड़न बढ़ जाता है। उन्होंने पुलिस के लोगों को भी अपने आचरण सुधारने को कहा। बैठक की अध्यक्षा पुलिस अधीक्षक आरपीएस यादव व संचालन फहीम अहमद उर्फ पप्पू ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह रहे। दोनों अधिकारियों ने अच्छे कार्य करने के लिए कोतवाल बृजकिशोर यादव को शील्ड देकर सम्मानित किया।
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कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सकरौरा ग्रामीण स्थित आश्रम पद्धति विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीआईजी ने कहा कि इस योजना की शुरुआत जब वह एसपी थे तब ही करना चाह रहे थे, लेकिन नहीं कर पाए थे।
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चारों जिलों के कप्तान से बात करने पर सहमति बनी और जिले के ऐसे दो-दो गांवों को चिह्नित करने को कहा, जहां अपराध अधिक हों। सभी अधिकारियों ने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जहां पुलिस का आना-जाना कम होता है, वहां अपराध अधिक होता है। वर्ष 2013-14 में ग्राम सकरौरा ग्रामीण में 70 पाए गए अपराध के मामलों का वर्गीकरण किया गया, जिस पर इस गांव को चुना गया।
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उन्होंने कहा कि इस गांव में अवैध शराब बनाने की भट्ठियां पहले धधकती थीं, शिक्षा और जागरूकता का अभाव था। इस कारण से अपराध होते थे। उन्होंने कहा यहां अब शराब के धंधे पर पूरी तरह से अंकुश लग चुका है। उन्होंने कहा कि सबके सहयोग से ही अपराधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
गांवों में शिक्षामित्र, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, शिक्षक, ग्राम रोजगार सेवक, एवं चौकीदार सरकारी तंत्र से जुड़े हैं। इन्हें तो इसकी सूचना समय से देनी चाहिए लेकिन ऐसा नही हो रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में सभी लोग विश्वास पात्र नही होते हैं। लेकिन जिस पर भरोसा हो उसे तो सूचित ही करना चाहिए।
सुरक्षा की दृष्टि से यातायात के नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जागरूकता के अभाव में उत्पीड़न बढ़ जाता है। उन्होंने पुलिस के लोगों को भी अपने आचरण सुधारने को कहा। बैठक की अध्यक्षा पुलिस अधीक्षक आरपीएस यादव व संचालन फहीम अहमद उर्फ पप्पू ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह रहे। दोनों अधिकारियों ने अच्छे कार्य करने के लिए कोतवाल बृजकिशोर यादव को शील्ड देकर सम्मानित किया।