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आवारा जानवरों से शहरवासी परेशान
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गोंडा में नगर कोतवाली के सामने सड़क पर बैठे छुट्टा जानवर।
- फोटो : GONDA
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गोंडा। नगर पालिका का अजब हाल है, पूरे शहर में 200 से अधिक जानवर सड़कों पर धूम रहे हैं। गली-मोहल्लों में आम आदमी का निकलना दूभर है। जिलाधिकारी के आदेश पर नपाप ने अभियान चलाया तो उसे सिर्फ एक पशु मिला। वह भी वे बाहर नही ले जा सके। पशु जिसका था वह भी आ गया तो उसे सौंप दिया। इससे आम लोग आवाक हैं कि अब भी सरकारी महकमा पुराने ढर्रे पर ही काम कर रही है। कई दिक्कतों के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। अधिकारी भी वाहनों से चलते पशुओं की भीड़ सड़कों पर देखते हैं लेकिन शीशा भी नही खोलते। आम जनता अब भगवान भरोसे हैं।
शासन और प्रशासन की तरफ से गोशाला और छुट्टा जानवरों को लेकर ज्यादा संवेदनशील हैं। इन पशुओं को लेकर सरकार ने कई योजनाएं बनाई। गोशालाओं के लिए करोड़ों का बजट भी जारी कर दिया है। लेकिन पैसा जारी हो ने के बाद भी जिले स्तर पर कोई कार्रवाई नही पहुंची है। शहर में नपाप, जिला पशुपालन विभाग और नगर मजिस्ट्रेट को जिम्मेदारी को छुट्टा जानवरों को लेकर जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे है। नपाप के लोगों का कहना है कि छुट्टा जानवरों को पकड़े का वन विभाग है और देखरेख का काम पशुपालन विभाग का है।
नपाप व पशुपालन के विवाद की भेंट चढ़ा आश्रय स्थल
शहर के लिए गो आश्रय स्थल के निर्माण का शोर शुरुआती दौर में बड़े पैमाने पर उठा। आनन-फानन में आंबेडकर चौराहे के पास स्थिति मुर्गी फार्म परिसर के आधे भाग में गो आश्रय स्थल की स्थापना का प्रस्ताव भी तैयार हुआ। नगर पालिका परिषद के अधिकारियों ने 17 बीघे भूमि पर दावा करते हुए गो आश्रय स्थल के निर्माण की रूपरेखा तैयार की। इसे लेकर पशुपालन विभाग ने आपत्ति दर्ज कराई और परिसर को अधिकारियों के आवासीय स्थल बताते हुए गो आश्रय स्थल के निर्माण का कार्य आगे नहीं बढने दिया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आयुक्त ने ईओ को चेतावनी भी दिया लेकिन कोई असर नहीं दिखा।
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आसपास के गो आश्रय स्थल भी ले जा रहे पशुओं को
नगर के 27 वार्डों में 200 से अधिक छुट्टा जानवरों का दबदबा है। नगर पालिका के लोग रोज देखते हैं और उन्हें आसपास के गौ आश्रय स्थलों पर उन्हें भेजने का निर्देश है। फिर भी कोई कार्रवाई नही हो रही है। जिससे बाहर निकलने वालों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों की लापरवाही से शहर के लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
शहर में छुट्टा जानवरों के लिए अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन कई बार कोशिश के बाद एक पशु मिला था। उसे पकड़ कर ले जाया जा रहा था, लेकिन पशु मालिक के निवेदन पर उन्हें सौंप दिया गया है। लगातार शहर में नजर रखी जा रही है। -विकास सेन, अधिशासी अधिकारी
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शासन और प्रशासन की तरफ से गोशाला और छुट्टा जानवरों को लेकर ज्यादा संवेदनशील हैं। इन पशुओं को लेकर सरकार ने कई योजनाएं बनाई। गोशालाओं के लिए करोड़ों का बजट भी जारी कर दिया है। लेकिन पैसा जारी हो ने के बाद भी जिले स्तर पर कोई कार्रवाई नही पहुंची है। शहर में नपाप, जिला पशुपालन विभाग और नगर मजिस्ट्रेट को जिम्मेदारी को छुट्टा जानवरों को लेकर जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे है। नपाप के लोगों का कहना है कि छुट्टा जानवरों को पकड़े का वन विभाग है और देखरेख का काम पशुपालन विभाग का है।
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नपाप व पशुपालन के विवाद की भेंट चढ़ा आश्रय स्थल
शहर के लिए गो आश्रय स्थल के निर्माण का शोर शुरुआती दौर में बड़े पैमाने पर उठा। आनन-फानन में आंबेडकर चौराहे के पास स्थिति मुर्गी फार्म परिसर के आधे भाग में गो आश्रय स्थल की स्थापना का प्रस्ताव भी तैयार हुआ। नगर पालिका परिषद के अधिकारियों ने 17 बीघे भूमि पर दावा करते हुए गो आश्रय स्थल के निर्माण की रूपरेखा तैयार की। इसे लेकर पशुपालन विभाग ने आपत्ति दर्ज कराई और परिसर को अधिकारियों के आवासीय स्थल बताते हुए गो आश्रय स्थल के निर्माण का कार्य आगे नहीं बढने दिया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आयुक्त ने ईओ को चेतावनी भी दिया लेकिन कोई असर नहीं दिखा।
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आसपास के गो आश्रय स्थल भी ले जा रहे पशुओं को
नगर के 27 वार्डों में 200 से अधिक छुट्टा जानवरों का दबदबा है। नगर पालिका के लोग रोज देखते हैं और उन्हें आसपास के गौ आश्रय स्थलों पर उन्हें भेजने का निर्देश है। फिर भी कोई कार्रवाई नही हो रही है। जिससे बाहर निकलने वालों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों की लापरवाही से शहर के लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
शहर में छुट्टा जानवरों के लिए अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन कई बार कोशिश के बाद एक पशु मिला था। उसे पकड़ कर ले जाया जा रहा था, लेकिन पशु मालिक के निवेदन पर उन्हें सौंप दिया गया है। लगातार शहर में नजर रखी जा रही है। -विकास सेन, अधिशासी अधिकारी