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Gonda News: जनरल सर्जरी व ईएमटी में पीजी पढ़ाई की तैयारी पूरी
Thu, 05 Jun 2025 11:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 05 Jun 2025 11:17 PM IST
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गोंडा। महाराजा देवीबख्श सिंह चिकित्सा महाविद्यालय में अब एमबीबीएस के साथ ही पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के डिप्लोमा पाठ्यक्रम की पढ़ाई शुरू होने जा रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने डीएनबी (डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड) कोर्स शुरू करने के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) को प्रस्ताव भेज दिया है।
वर्ष 2025-26 से जनरल सर्जरी और ईएनटी (नाक, कान, गला) विभाग में दो-दो सीटों पर डिप्लोमा की पढ़ाई शुरू होने की संभावना है। यह डिप्लोमा पाठ्यक्रम एमडी/एमएस के समकक्ष होगा, जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने ने बताया कि विशेषज्ञता प्राप्त डॉक्टरों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। डीएनबी कोर्स पूरी तरह मेरिट आधारित प्रवेश प्रक्रिया के तहत संचालित होगा। जैसे ही प्रस्ताव को स्वीकृति मिलेगी, नए सत्र से दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। गौरतलब है, कि फिलहाल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटों पर पहला बैच पढ़ाई कर रहा है। अब दूसरे बैच की तैयारी के साथ पीजी डिप्लोमा कोर्स की दिशा में भी कॉलेज प्रशासन ने सक्रिय पहल की है।
पीजी डिग्री और डिप्लोमा में अंतर
डिप्लोमा कोर्स 2 वर्ष का होता है, जबकि डिग्री (एमडी/एमएस) 3 वर्ष की होती है। डिग्री धारक मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर या विभागाध्यक्ष बन सकते हैं, डिप्लोमा धारक नहीं। डिप्लोमा डॉक्टर मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण कार्य या रिसर्च नहीं कर सकते है। दोनों पाठ्यक्रमों की फीस और अधिकारों में भी फर्क होता है।
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वर्ष 2025-26 से जनरल सर्जरी और ईएनटी (नाक, कान, गला) विभाग में दो-दो सीटों पर डिप्लोमा की पढ़ाई शुरू होने की संभावना है। यह डिप्लोमा पाठ्यक्रम एमडी/एमएस के समकक्ष होगा, जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने ने बताया कि विशेषज्ञता प्राप्त डॉक्टरों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। डीएनबी कोर्स पूरी तरह मेरिट आधारित प्रवेश प्रक्रिया के तहत संचालित होगा। जैसे ही प्रस्ताव को स्वीकृति मिलेगी, नए सत्र से दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। गौरतलब है, कि फिलहाल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटों पर पहला बैच पढ़ाई कर रहा है। अब दूसरे बैच की तैयारी के साथ पीजी डिप्लोमा कोर्स की दिशा में भी कॉलेज प्रशासन ने सक्रिय पहल की है।
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पीजी डिग्री और डिप्लोमा में अंतर
डिप्लोमा कोर्स 2 वर्ष का होता है, जबकि डिग्री (एमडी/एमएस) 3 वर्ष की होती है। डिग्री धारक मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर या विभागाध्यक्ष बन सकते हैं, डिप्लोमा धारक नहीं। डिप्लोमा डॉक्टर मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण कार्य या रिसर्च नहीं कर सकते है। दोनों पाठ्यक्रमों की फीस और अधिकारों में भी फर्क होता है।
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