फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Pregnant kept moaning, setting from MR kept moving

Gonda News: कराहती रही गर्भवती, चलती रही एमआर से सेटिंग

Wed, 24 May 2023 11:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Wed, 24 May 2023 11:57 PM IST
विज्ञापन
Pregnant kept moaning, setting from MR kept moving
गोंडा। सूट-बूट व टाई लगाए हुए व्यक्ति टैबलेट और फोल्टर लेकर डॉक्टर के सामने टेबल पर बैठे हैं। दूरदराज से आने वाली गर्भवती महिलाएं कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। कई महिलाएं दर्द से कराहते हुए जमीन पर ही बैठ गईं। ये नजारा बुधवार को जिला महिला अस्पताल की वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में देखने को मिला।
विज्ञापन

अस्पताल की ओपीडी में बुधवार सुबह एक घंटे देरी से इलाज शुरू हुआ। कुछ देर बाद ही दो एमआर (मेडिकल रिप्रजेंटेटिव) फोल्डर लेकर मरीजों को पीछे कर ओपीडी में प्रवेश कर गये। लगभग छह मिनट बाद बाहर निकले। इसी तरह पांच घंटे की ओपीडी में सात एमआर आए और मरीजों के हिस्से के 42 मिनट खराब कर दिए। इससे कई मरीजों को अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर इलाज के लिए दूसरे दिन बुलाया गया। मनकापुर से आई गर्भवती की तीमारदार कुंती देवी ने बताया कि पहले तो लाइन लगाकर डॉक्टर को दिखाया गया, अब जांच कराकर दूसरे दिन आने को कहा गया है। इससे परेशानी उठानी पड़ी।
विज्ञापन

टीबी क्लीनिक में बैठे फिजीशियन के कक्ष में बुधवार को दो एमआर अपनी कंपनी के दवाएं लिखने के लिए डॉक्टर से मनुहार करते दिखे। दूसरी कंपनी के एमआर भी बाहर बेंच पर बैठे थे। कई मरीज एमआर के बाहर निकलने का इंतजार करते दिखाई पड़े। यहां 12.30 बजे तक छह एमआर पहुंचे। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल की एक ओपीडी में एमआर तो डॉक्टर के बगल में बैठकर मरीजों को दवाएं लिखता नजर आया। हालांकि, वह फोटो क्लिक होते देख तुरंत मरीजों के बीच चला गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

सरकारी अस्पतालों में सभी दवाएं मुफ्त मिलती हैं। अस्पताल परिसर में जगह-जगह नोटिस बोर्ड पर लिखा है कि एमआर का प्रवेश वर्जित है। फिर भी यहां विभिन्न दवा कंपनियों के एमआर की गहरी पैठ कैसे बनी है? एक स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि यहां एमआर न सिर्फ मरीजों के हिस्से का समय खराब करते हैं बल्कि इनकी वजह से ही अधिकांश दवाएं बाहर से लिखी जाती हैं। जिसके बदले डॉक्टरों को कमीशन व गिफ्ट मिलते हैं।

अपर निदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. एचडी अग्रवाल ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में एमआर का प्रवेश पूर्ण रूप से वर्जित है। यदि डॉक्टर के पास बिना कारण कोई एमआर व बाहरी व्यक्ति बैठा मिला, तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed