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पीसीएफ के 52 क्रय केंद्र, पर धान खरीद जीरो
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sun, 20 Nov 2016 11:45 PM IST
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धान खरीद: जुगाड़ के आगे ऑनलाइन फीडिंग भी फेल
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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जिले में धान खरीद की व्यवस्था काफी खराब है। शासन ने जिस एजेंसी पीसीएफ को धान खरीद की सबसे बड़ी जिम्मेदारी देकर जिले में उसके अकेले 52 क्रय केंद्र खुलवाए थे, उसने खरीद शुरू होने के 20 दिन में एक धेला धान भी नहीं खरीदा। इसकी वजह सहकारिता विभाग को उसके ही मुख्यालय से धान खरीद का पर्याप्त बजट नहीं मिल पाना है। विभाग को नाम मात्र बजट मिलने से खरीद नहीं हो पा रही है। विभाग के कर्मचारी क्रय केंद्रों पर बैठकर बजट मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
मूल्य समर्थन योजना के तहत किसानों से सीधे धान की खरीद करने के लिए जिले में शासन की ओर से अलग-अलग एजेंसियों के कुल 58 धान क्रय केंद्र स्थापित कराए गए हैं। जिसमें से 52 क्रय केंद्र अकेले पीसीएफ के हैं।
इतनी बड़ी एजेंसी धान खरीद शुरू होने के 20 दिन बाद भी खाली हाथ है। किसान क्रय केंद्रों से लौट रहे हैं। दूसरी एजेंसियों के मात्र छह क्रय केंद्र है। इन सभी क्रय एजेसिंयों की ओर से किसानों से धान खरीद की जा रही है। लेकिन पीसीएफ अभी खाली हाथ बैठा है। इससे किसानों को मजबूरन औने-पौने कीमत पर धान बेचना पड़ रहा है।
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पीसीएफ के 52 क्रय केंद्रों पर धान खरीद न शुरू हो पाने का फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं। बताया जाता है कि मंडी में धान की आवक हो रही है। इसमें से किसान कम सबसे अधिक व्यापारी गांवों में किसानों के घर से 1000 व 1100 रुपये में धान खरीदकर उसे मंडी में बेच कर मुनाफा कमा रहे हैं। सरकारी धान खरीद की व्यवस्था खराब होने से किसान अपनी गाढ़ी कमाई से तैयार फसल को लुटाने पर विवश है। मंडी में सरकारी क्रय केंद्रों के मुताबिक व्यापारियों के यहां अधिक भीड़ जुट रही है।
मार्केटिंग विभाग ने अब तक करीब 2000 क्विंटल धान की खरीद की है, जो पास के दूसरे मंडलों से विभाग की खरीद अधिक है। जहां तक दूसरी एजेंसियों का सवाल है, उन्हें उनके मुख्यालय से अभी तक पर्याप्त बजट नहीं मिल पाया है। इस बाबत पीसीएफ के मुख्यालय को बजट भेजने के बाबत कई पत्र भेजे जा चुके हैं। कैश की कमी को लेकर किसान के अलावा विभाग के सामने मजदूर न मिलने की भी समस्या है।
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मूल्य समर्थन योजना के तहत किसानों से सीधे धान की खरीद करने के लिए जिले में शासन की ओर से अलग-अलग एजेंसियों के कुल 58 धान क्रय केंद्र स्थापित कराए गए हैं। जिसमें से 52 क्रय केंद्र अकेले पीसीएफ के हैं।
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इतनी बड़ी एजेंसी धान खरीद शुरू होने के 20 दिन बाद भी खाली हाथ है। किसान क्रय केंद्रों से लौट रहे हैं। दूसरी एजेंसियों के मात्र छह क्रय केंद्र है। इन सभी क्रय एजेसिंयों की ओर से किसानों से धान खरीद की जा रही है। लेकिन पीसीएफ अभी खाली हाथ बैठा है। इससे किसानों को मजबूरन औने-पौने कीमत पर धान बेचना पड़ रहा है।
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पीसीएफ के 52 क्रय केंद्रों पर धान खरीद न शुरू हो पाने का फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं। बताया जाता है कि मंडी में धान की आवक हो रही है। इसमें से किसान कम सबसे अधिक व्यापारी गांवों में किसानों के घर से 1000 व 1100 रुपये में धान खरीदकर उसे मंडी में बेच कर मुनाफा कमा रहे हैं। सरकारी धान खरीद की व्यवस्था खराब होने से किसान अपनी गाढ़ी कमाई से तैयार फसल को लुटाने पर विवश है। मंडी में सरकारी क्रय केंद्रों के मुताबिक व्यापारियों के यहां अधिक भीड़ जुट रही है।
मार्केटिंग विभाग ने अब तक करीब 2000 क्विंटल धान की खरीद की है, जो पास के दूसरे मंडलों से विभाग की खरीद अधिक है। जहां तक दूसरी एजेंसियों का सवाल है, उन्हें उनके मुख्यालय से अभी तक पर्याप्त बजट नहीं मिल पाया है। इस बाबत पीसीएफ के मुख्यालय को बजट भेजने के बाबत कई पत्र भेजे जा चुके हैं। कैश की कमी को लेकर किसान के अलावा विभाग के सामने मजदूर न मिलने की भी समस्या है।