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Gonda News: निविदा की फाइल न मिलने पर आठ साल पहले रोका गया था भुगतान
Thu, 18 Sep 2025 11:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 18 Sep 2025 11:50 PM IST
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गोंडा। सपा के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव व दो पूर्व सीएमओ के खिलाफ घोटाले के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद एक बार फिर पुरानी फाइलें खंगाली जा रही हैं। वर्ष 2017-18 में स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा उपकरणों व फर्नीचर की मरम्मत के साथ ही अनुरक्षण कार्य की फाइल भुगतान के लिए लेखाधिकारी के पास भेजी गई थी। इस पर उन्होंने पत्रावली मांगी, लेकिन जब निविदा पत्रावली नहीं मिली तो उन्होंने भुगतान रोक दिया था।
विभागीय सूत्रों के अनुसार यह कोई पहला मामला नहीं है, पूर्व विधायक की फर्मों से जुड़े कामों की फाइल विभाग में होती ही नहीं थी। वह खुद फाइल तैयार कराते थे, बाद में उसे डिस्पैच में इंट्री कराई जाती थी। इसको लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। कई बार इसकी शिकायत जनप्रतिनिधियों ने की। जिला पंचायत की बैठकों में भी यह मामला उछला, लेकिन चंद घंटे बाद ही आवाज बुलंद करने वाले लोग चुप हो जाते थे। हालांकि पयागपुर के भाजपा विधायक सुभाष त्रिपाठी ने मामले की शिकायत की। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद इससे जुड़े लोगों की बेचैनी बढ़ गई है।
वर्ष 2023 में तत्कालीन सीडीओ एम अरुन्मोलि, नगर मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर व जिला पंचायत के वित्त एवं लेखाधिकारी कामेश्वर प्रसाद ने एक अप्रैल 2023 से 31 अगस्त 2023 के बीच स्वास्थ्य विभाग में खरीद-फरोख्त की जांच की थी। जांच में पाया गया था कि फर्म मेट्रो प्रिंटर से 26,56,957 रुपये के फ्लैक्स, बैनर व प्रिंटिंग का कार्य कराया गया। चहेते को लाभ दिलाने के लिए 20 फर्मों में से 10 को बिना विशेषज्ञ की राय लिए ही अयोग्य बताकर हटा दिया गया। जिन तीन फर्माें के बीच टेंडर कराया गया, वह सभी एक ही व्यक्ति से संबंधित रहीं। मेसर्स जेएस फार्मा से 31,60,000, 94,39,000 और व 80,55,630 रुपये की जांच किट व अन्य मेडिकल उपकरण खरीदे गए। जिसमें गैप एनालिसिस कराए बिना ही क्रय व भुगतान की फाइल अनुमोदित कर दी गई। दो बिड में क्रय के लिए जरूरी प्रक्रिया नहीं कराई गई। जेएस फार्मा को 49,37,850 रुपये और 16,12,500 रुपये का काम दिया गया। जिसमें क्रय व भुगतान संदेहपूर्ण मिला था। इसी प्रकार मेट्रो प्रिंटर्स से 6,94,884 और 27,45,380 रुपये का काम कराया गया। बिल भुगतान व सामग्री अलग-अलग मिली। वहीं, स्टेट बजट को टुकड़ों में बांटकर वर्क आर्डर दे दिया गया।
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इस तरह जेएस फार्मा से 56,57,925 रुपये की खरीद व मेसर्स विनीत इंटरप्राइजेज से 1,64,770 व 4,21,655 रुपये की खरीद-फरोख्त को त्रुटिपूर्ण बताया गया था। मामले में तत्कालीन मंडलायुक्त योगेश्वर राम मिश्र ने शासन को रिपोर्ट भेजी थी। इसमें कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई थी। बीते दिनों पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। हालांकि इस मामले में सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा का कहना है कि उन्होंने किसी को भी गलत तरीके से लाभ पहुंचाने का काम कभी नहीं किया। उस समय की जांच किसी के पूर्वाग्रह से प्रेरित थी। मैंने जांच में पूरा सहयोग किया। मैं गलत नहीं करती तो मेरे साथ गलत नहीं हो सकता।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार यह कोई पहला मामला नहीं है, पूर्व विधायक की फर्मों से जुड़े कामों की फाइल विभाग में होती ही नहीं थी। वह खुद फाइल तैयार कराते थे, बाद में उसे डिस्पैच में इंट्री कराई जाती थी। इसको लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। कई बार इसकी शिकायत जनप्रतिनिधियों ने की। जिला पंचायत की बैठकों में भी यह मामला उछला, लेकिन चंद घंटे बाद ही आवाज बुलंद करने वाले लोग चुप हो जाते थे। हालांकि पयागपुर के भाजपा विधायक सुभाष त्रिपाठी ने मामले की शिकायत की। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद इससे जुड़े लोगों की बेचैनी बढ़ गई है।
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वर्ष 2023 में तत्कालीन सीडीओ एम अरुन्मोलि, नगर मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर व जिला पंचायत के वित्त एवं लेखाधिकारी कामेश्वर प्रसाद ने एक अप्रैल 2023 से 31 अगस्त 2023 के बीच स्वास्थ्य विभाग में खरीद-फरोख्त की जांच की थी। जांच में पाया गया था कि फर्म मेट्रो प्रिंटर से 26,56,957 रुपये के फ्लैक्स, बैनर व प्रिंटिंग का कार्य कराया गया। चहेते को लाभ दिलाने के लिए 20 फर्मों में से 10 को बिना विशेषज्ञ की राय लिए ही अयोग्य बताकर हटा दिया गया। जिन तीन फर्माें के बीच टेंडर कराया गया, वह सभी एक ही व्यक्ति से संबंधित रहीं। मेसर्स जेएस फार्मा से 31,60,000, 94,39,000 और व 80,55,630 रुपये की जांच किट व अन्य मेडिकल उपकरण खरीदे गए। जिसमें गैप एनालिसिस कराए बिना ही क्रय व भुगतान की फाइल अनुमोदित कर दी गई। दो बिड में क्रय के लिए जरूरी प्रक्रिया नहीं कराई गई। जेएस फार्मा को 49,37,850 रुपये और 16,12,500 रुपये का काम दिया गया। जिसमें क्रय व भुगतान संदेहपूर्ण मिला था। इसी प्रकार मेट्रो प्रिंटर्स से 6,94,884 और 27,45,380 रुपये का काम कराया गया। बिल भुगतान व सामग्री अलग-अलग मिली। वहीं, स्टेट बजट को टुकड़ों में बांटकर वर्क आर्डर दे दिया गया।
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इस तरह जेएस फार्मा से 56,57,925 रुपये की खरीद व मेसर्स विनीत इंटरप्राइजेज से 1,64,770 व 4,21,655 रुपये की खरीद-फरोख्त को त्रुटिपूर्ण बताया गया था। मामले में तत्कालीन मंडलायुक्त योगेश्वर राम मिश्र ने शासन को रिपोर्ट भेजी थी। इसमें कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई थी। बीते दिनों पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। हालांकि इस मामले में सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा का कहना है कि उन्होंने किसी को भी गलत तरीके से लाभ पहुंचाने का काम कभी नहीं किया। उस समय की जांच किसी के पूर्वाग्रह से प्रेरित थी। मैंने जांच में पूरा सहयोग किया। मैं गलत नहीं करती तो मेरे साथ गलत नहीं हो सकता।