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देवीपाटन में गिरा था देवी सती का पाटंबर
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2015 11:49 PM IST
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भारत-नेपाल सीमा के तुलसीपुर तहसील स्थित शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर शक्ति-पूजा व योग-साधना का अद्भुत संगम है। 51 शक्तिपीठों में से एक देवीपाटन मंदिर का माहात्म्य भारत ही नहीं बल्कि नेपाल राष्ट्र में भी फैला हुआ है। ऐसी मान्यता है कि शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में देवी सती का पाटंबर गिरा था।
पाटंबर गिरने के कारण ही इस मंदिर का नाम देवीपाटन पड़ा। शक्तिपीठ देवीपाटन की अधिष्ठात्री देवी का नाम पाटेश्वरी है। देवी भागवत, स्कंध पुराण व शिव चरित्र आदि ग्रंथों में इस बात को उल्लेख मिलता है कि पिता प्रजापति दक्ष के यज्ञ में पति शिव का स्थान व भाग न देखकर उनके अपमान से क्षुब्ध देवी सती ने यज्ञ कुंड में कूद कर प्राण त्याग दिया।
देवी सती के प्राण त्यागने से आक्रोशित भगवान शंकर प्रजापति दक्ष के यज्ञ को नष्ट करके देवी सती के शव को कंधे पर रखकर पृथ्वी पर घूमने लगे।
संसार चक्र में व्यवधान उत्पन्न होने पर भगवान विष्णु ने शिव मोह शांत करने के लिए देवी सती के विभिन्न अंगों को सुदर्शन चक्र से काटकर पृथ्वी पर गिरा दिया।
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पृथ्वी पर जहां-जहां देवी के अंग गिरे वहां शक्तिपीठ की स्थापना की गई। पृथ्वी पर 51 शक्तिपीठ स्थापित किये गये जिनमें से देवीपाटन भी शक्तिपीठ एक है। शक्तिपीठ होने के कारण भारत ही नहीं बल्कि नेेपाल राष्ट्र से भी लाखों श्रद्धालु प्रत्येक वर्ष यहां देवी की आराधना के लिए आते हैं।
शारदीय नवरात्र में शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में 15 दिनों का मेला लगेेगा। इस दौरान यहां भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ नेपाल राष्ट्र से भी भारी संख्या में श्रद्धालु देवी आराधना के लिए आयेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन के साथ-साथ जिला प्रशासन द्वारा भी व्यापक इंतजाम किये गये हैं।
मंदिर की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ अराजक तत्वों पर नजर रखने के लिए सीसी टीवी कैमरे भी लगाये गये हैं। मेले को देखते हुए तुलसीपुर को विद्युत कटौती से मुक्त रखा गया है यहां 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जाएगी।
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पाटंबर गिरने के कारण ही इस मंदिर का नाम देवीपाटन पड़ा। शक्तिपीठ देवीपाटन की अधिष्ठात्री देवी का नाम पाटेश्वरी है। देवी भागवत, स्कंध पुराण व शिव चरित्र आदि ग्रंथों में इस बात को उल्लेख मिलता है कि पिता प्रजापति दक्ष के यज्ञ में पति शिव का स्थान व भाग न देखकर उनके अपमान से क्षुब्ध देवी सती ने यज्ञ कुंड में कूद कर प्राण त्याग दिया।
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देवी सती के प्राण त्यागने से आक्रोशित भगवान शंकर प्रजापति दक्ष के यज्ञ को नष्ट करके देवी सती के शव को कंधे पर रखकर पृथ्वी पर घूमने लगे।
संसार चक्र में व्यवधान उत्पन्न होने पर भगवान विष्णु ने शिव मोह शांत करने के लिए देवी सती के विभिन्न अंगों को सुदर्शन चक्र से काटकर पृथ्वी पर गिरा दिया।
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पृथ्वी पर जहां-जहां देवी के अंग गिरे वहां शक्तिपीठ की स्थापना की गई। पृथ्वी पर 51 शक्तिपीठ स्थापित किये गये जिनमें से देवीपाटन भी शक्तिपीठ एक है। शक्तिपीठ होने के कारण भारत ही नहीं बल्कि नेेपाल राष्ट्र से भी लाखों श्रद्धालु प्रत्येक वर्ष यहां देवी की आराधना के लिए आते हैं।
शारदीय नवरात्र में शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में 15 दिनों का मेला लगेेगा। इस दौरान यहां भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ नेपाल राष्ट्र से भी भारी संख्या में श्रद्धालु देवी आराधना के लिए आयेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन के साथ-साथ जिला प्रशासन द्वारा भी व्यापक इंतजाम किये गये हैं।
मंदिर की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ अराजक तत्वों पर नजर रखने के लिए सीसी टीवी कैमरे भी लगाये गये हैं। मेले को देखते हुए तुलसीपुर को विद्युत कटौती से मुक्त रखा गया है यहां 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जाएगी।