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किसानों के खेत में कटी व खड़ी धान की फसल तबाह, अन्य फसलों को हुआ भारी नुकसान
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गोंडा। बारिश से खेतों में सिर्फ और सिर्फ तबाही का मंजर दिख रहा है। धान की कटी फसल पानी से भीग चुकी है। खड़ी फसल खेत में ही पसर गई है। डेढ़ लाख हेक्टेयर में लगी धान की फसल की ऐसी तबाही वर्षों बाद देखी गई जब किसान कटाई व थ्रेसिंग कर घर लाने की जुगत कर रहे थे। तिलहन की फसल चौपट हो गई है। कुछ किसानों ने सरसों की फसल बो चुके थे, उसे भी नुकसान हुआ है। आलू की फसल सहित गन्ने की फसल को नुकसान हुआ है।
रविवार से शुरू हुई बारिश मंगलवार की सुबह थोड़ी देर के लिए थम गई तो लगा कि बची फसल किसान घर ले जा सकेंगे। कुछ किसान तो खेतों में पहुंच कर जल्दी-जल्दी कटाई करने लगे लेकिन दोपहर बाद पुन: तेज बारिश शुरू हो गई जोकि देर शाम तक जारी रही।
किसानों को भारी क्षति बर्दाश्त करना होगा। इसकी भरपाई किसान कैसे करेंगे, यह उन्हें नहीं सूझ रहा है। लाल बहादुर शास्त्री कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र सिंह कहते हैं कि बारिश पहले हल्की थी, लेकिन मंगलवार की दोपहर बाद तेज बारिश ने नुकसान किया है। इससे किसानों के धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। बारिश से चावल के दाने से काले पड़ जाएंगे।
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बेलसर, धानेपुर, इटियाथोक, रुपईडीह, कटरा बाजार सहित कई क्षेत्रों में तेज बारिश हुई, जिससे खेतों में पानी भर गया है। अधिकांश फसल पक चुकी है, जिनमें कटाई चल रही है।
जिले की प्रमुख फसल गेहूं व धान है। नकदी फसल में गन्ना व तंबाकू है। तंबाकू किसानों का मोह पहले भंग हो चुका है। गन्ने का भुगतान न होने से किसानों को यह खेती घाटे की लग रही है।
जिले के किसान केवल गेहूं व धान पर टिके हैं। धान की फसल पकने के बाद किसानों को राहत मिली थी, लेकिन सोमवार को सूरज निकला तो किसानों की कुछ हिम्मत बंधी, लेकिन फिर मौसम ने करवट बदला और पूरे दिन रुक-रुककर बारिश होती रही। रही सही कसर मंगलवार को पूरी हो गई।
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रविवार से शुरू हुई बारिश मंगलवार की सुबह थोड़ी देर के लिए थम गई तो लगा कि बची फसल किसान घर ले जा सकेंगे। कुछ किसान तो खेतों में पहुंच कर जल्दी-जल्दी कटाई करने लगे लेकिन दोपहर बाद पुन: तेज बारिश शुरू हो गई जोकि देर शाम तक जारी रही।
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किसानों को भारी क्षति बर्दाश्त करना होगा। इसकी भरपाई किसान कैसे करेंगे, यह उन्हें नहीं सूझ रहा है। लाल बहादुर शास्त्री कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र सिंह कहते हैं कि बारिश पहले हल्की थी, लेकिन मंगलवार की दोपहर बाद तेज बारिश ने नुकसान किया है। इससे किसानों के धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। बारिश से चावल के दाने से काले पड़ जाएंगे।
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बेलसर, धानेपुर, इटियाथोक, रुपईडीह, कटरा बाजार सहित कई क्षेत्रों में तेज बारिश हुई, जिससे खेतों में पानी भर गया है। अधिकांश फसल पक चुकी है, जिनमें कटाई चल रही है।
जिले की प्रमुख फसल गेहूं व धान है। नकदी फसल में गन्ना व तंबाकू है। तंबाकू किसानों का मोह पहले भंग हो चुका है। गन्ने का भुगतान न होने से किसानों को यह खेती घाटे की लग रही है।
जिले के किसान केवल गेहूं व धान पर टिके हैं। धान की फसल पकने के बाद किसानों को राहत मिली थी, लेकिन सोमवार को सूरज निकला तो किसानों की कुछ हिम्मत बंधी, लेकिन फिर मौसम ने करवट बदला और पूरे दिन रुक-रुककर बारिश होती रही। रही सही कसर मंगलवार को पूरी हो गई।