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एसीएमओ करेंगे नेत्र विभाग की ओपीडी, मरीजों को मिलेगी सहूलियत
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गोंडा। जिला अस्पताल में नेत्र विभाग की खाली ओपीडी में एसीएमओ डॉ. जय गोविंद मरीजों का इलाज करेंगे। जून महीने में बड़ी संख्या में हुए डॉक्टरों के तबादले के बाद जिला अस्पताल का नेत्र विभाग खाली हो गई थी। हर रोज करीब 300 नेत्र रोगियों को भटकना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में तीन चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे थे। नेत्र सर्जन डॉ. विकास सेट्ठी का निधन हो गया, तथा डॉ. पुनीत श्रीवास्तव और डॉ. संजय शर्मा का गैर जनपद तबादला हो गया। इसके बाद से नेत्र विभाग खाली हो गया था। जिला अस्पताल आने वाले आंख के मरीजों को भटकना पड़ रहा था।
बुधवार को जिले के दौरे पर आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने नेत्र विभाग की ओपीडी संचालित करने का निर्देश दिया। सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने नेत्र सर्जन रहे एसीएमओ डॉ. जयगोविंद को नेत्र विभाग की ओपीडी व सर्जरी शुरू करने का निर्देश दिया। मई तक नेत्र विभाग में हर रोज करीब तीन सौ मरीजों का इलाज होता था, डॉक्टरों के तबादले के बाद से इन मरीजों को भटकना पड़ रहा था।
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एसीएमओ डॉ. जयगोविंद ने बताया कि मरीजों की सहूलियत के लिए प्रशासनिक कार्य के अतिरिक्त हर रोज ओपीडी में नेत्र रोगियों का इलाज भी करेंगे। प्रमुख अधीक्षक डॉ. इंदुबाला ने बताया कि जब तक किसी नेत्र चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो जाती, विकल्प के तौर पर एसीएमओ से सेवा ली जाएगी। संवाद
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जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में तीन चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे थे। नेत्र सर्जन डॉ. विकास सेट्ठी का निधन हो गया, तथा डॉ. पुनीत श्रीवास्तव और डॉ. संजय शर्मा का गैर जनपद तबादला हो गया। इसके बाद से नेत्र विभाग खाली हो गया था। जिला अस्पताल आने वाले आंख के मरीजों को भटकना पड़ रहा था।
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बुधवार को जिले के दौरे पर आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने नेत्र विभाग की ओपीडी संचालित करने का निर्देश दिया। सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने नेत्र सर्जन रहे एसीएमओ डॉ. जयगोविंद को नेत्र विभाग की ओपीडी व सर्जरी शुरू करने का निर्देश दिया। मई तक नेत्र विभाग में हर रोज करीब तीन सौ मरीजों का इलाज होता था, डॉक्टरों के तबादले के बाद से इन मरीजों को भटकना पड़ रहा था।
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एसीएमओ डॉ. जयगोविंद ने बताया कि मरीजों की सहूलियत के लिए प्रशासनिक कार्य के अतिरिक्त हर रोज ओपीडी में नेत्र रोगियों का इलाज भी करेंगे। प्रमुख अधीक्षक डॉ. इंदुबाला ने बताया कि जब तक किसी नेत्र चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो जाती, विकल्प के तौर पर एसीएमओ से सेवा ली जाएगी। संवाद