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एक सिलिंडर से माह भर एक हजार बंदियों को नाश्ता
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गोंडा। जिला कारागार से जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मिली एक जानकारी से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कारागार में निरुद्ध 1,047 बंदियों के लिए नाश्ता तैयार करने में एक महीने में सिर्फ एक सिलिंडर ही उपयोग होता है। ऐसे में नाश्ता सही ढंग से मिल भी रहा है कि नहीं, इस पर सवाल उठ रहा है।
जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत तिवारी बाजार निवासी नरेंद्र तिवारी ने इस संबंध में सूचना मांगी थी, जिसमें जिला कारागार ने ये जानकारी दी है। अधीक्षक की ओर से जानकारी दी गई है कि माहभर में सिर्फ एक गैस सिलिंडर ही कैंटीन में लगता है। नरेंद्र तिवारी भी कहते हैं कि 1,047 लोगों को एक महीने नाश्ता देने में महज एक सिलिंडर ही लगना चौंकाने वाला है।
जिला कारागार की क्षमता 508 है, लेकिन मौजूदा समय में यहां 1047 बंदी निरुद्ध हैं। इससे एक तो बंदियों को रहने में दिक्कत होती होगी। सूचना में इस बात का साफ उल्लेख है कि क्षमता से दोगुने बंदी हैं। साथ ही बंदियों के नाश्ता व भोजन बनाने में घरेलू गैस सिलिंडर के उपयोग का दावा किया गया है। जवाब बहुत ही सावधानी से देते हुए ये कहा है कि कैंटीन में माहभर में सिर्फ एक एलपीजी सिलिंडर का उपयोग होता है।
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जिसमें 1,047 बंदियों के लिए नाश्ता तैयार होता है। नाश्ते में सोमवार को ब्रेड, मंगलवार को चना, बुधवार को दलिया, गुरुवार को ब्रेड, शुक्रवार को दलिया, शनिवार को चना, रविवार को दलिया देने का उल्लेख किया गया है। ऐसे में कैंटीन में सिलेंडर के उपयोग को लेकर भी सवाल खड़ा हो रहा है, साथ ही गैस सिलिंडर की आपूर्ति में कुछ गोलमाल की ओर संकेत भी मिल रहा है।
सूचना में यह भी लिखा है कि भोजन बनाने में गैस आपूर्ति के आधार पर भुगतान किया जाता है। वहीं, गैस आपूर्ति के लिए नामित एजेंसी ने गैस आपूर्ति से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में एक अन्य एजेंसी से सहमति लेकर आपूर्ति ली जा रही है। इस तरह कारागार प्रशासन बंदियों को भोजन व नाश्ता देने के मामले में कटघरे में खड़ा होता नजर आ रहा है। सूचना मांगने वाले नरेंद्र तिवारी कहते हैं कि जेल में भोजन और नाश्ते के नाम पर गोलमाल हो रहा है।
प्रशासन को इसकी जांच करानी चाहिए। वहीं, जेल प्रशासन आरोपों से इंकार कर रहा है। जेल प्रशासन का कहना है कि जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत जो जानकारी मांगी गई थी, उसी की जानकारी दी है। बाकी जेल में बंदियों के लिए भोजन व नाश्ते की सुविधा शासन की व्यवस्थाओं के आधार पर दी जाती है।
जिला कारागार के जेलर दीपांकर भारती ने बताया कि जेल में कैंटीन व पाकशाला की अलग-अलग व्यवस्था है। कैंटीन में एक ही सिलिंडर का उपयोग होता है। पाकशाला में जो उपयोग होता है उसका नियमानुसार भुगतान किया जाता है।
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जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत तिवारी बाजार निवासी नरेंद्र तिवारी ने इस संबंध में सूचना मांगी थी, जिसमें जिला कारागार ने ये जानकारी दी है। अधीक्षक की ओर से जानकारी दी गई है कि माहभर में सिर्फ एक गैस सिलिंडर ही कैंटीन में लगता है। नरेंद्र तिवारी भी कहते हैं कि 1,047 लोगों को एक महीने नाश्ता देने में महज एक सिलिंडर ही लगना चौंकाने वाला है।
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जिला कारागार की क्षमता 508 है, लेकिन मौजूदा समय में यहां 1047 बंदी निरुद्ध हैं। इससे एक तो बंदियों को रहने में दिक्कत होती होगी। सूचना में इस बात का साफ उल्लेख है कि क्षमता से दोगुने बंदी हैं। साथ ही बंदियों के नाश्ता व भोजन बनाने में घरेलू गैस सिलिंडर के उपयोग का दावा किया गया है। जवाब बहुत ही सावधानी से देते हुए ये कहा है कि कैंटीन में माहभर में सिर्फ एक एलपीजी सिलिंडर का उपयोग होता है।
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जिसमें 1,047 बंदियों के लिए नाश्ता तैयार होता है। नाश्ते में सोमवार को ब्रेड, मंगलवार को चना, बुधवार को दलिया, गुरुवार को ब्रेड, शुक्रवार को दलिया, शनिवार को चना, रविवार को दलिया देने का उल्लेख किया गया है। ऐसे में कैंटीन में सिलेंडर के उपयोग को लेकर भी सवाल खड़ा हो रहा है, साथ ही गैस सिलिंडर की आपूर्ति में कुछ गोलमाल की ओर संकेत भी मिल रहा है।
सूचना में यह भी लिखा है कि भोजन बनाने में गैस आपूर्ति के आधार पर भुगतान किया जाता है। वहीं, गैस आपूर्ति के लिए नामित एजेंसी ने गैस आपूर्ति से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में एक अन्य एजेंसी से सहमति लेकर आपूर्ति ली जा रही है। इस तरह कारागार प्रशासन बंदियों को भोजन व नाश्ता देने के मामले में कटघरे में खड़ा होता नजर आ रहा है। सूचना मांगने वाले नरेंद्र तिवारी कहते हैं कि जेल में भोजन और नाश्ते के नाम पर गोलमाल हो रहा है।
प्रशासन को इसकी जांच करानी चाहिए। वहीं, जेल प्रशासन आरोपों से इंकार कर रहा है। जेल प्रशासन का कहना है कि जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत जो जानकारी मांगी गई थी, उसी की जानकारी दी है। बाकी जेल में बंदियों के लिए भोजन व नाश्ते की सुविधा शासन की व्यवस्थाओं के आधार पर दी जाती है।
जिला कारागार के जेलर दीपांकर भारती ने बताया कि जेल में कैंटीन व पाकशाला की अलग-अलग व्यवस्था है। कैंटीन में एक ही सिलिंडर का उपयोग होता है। पाकशाला में जो उपयोग होता है उसका नियमानुसार भुगतान किया जाता है।