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44 करोड़ खर्च पर 70 फीसदी गांव नहीं हो सके ओडीएफ
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रूपईडीह(गोंडा)। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 43.98 करोड़ की धनराशि खर्च करने के बाद भी 70 फीसदी गांव सिर्फ कागजों पर ही ओडीएफ बन पाए हैं। कागजी तौर पर ओडीएफ घोषित इन गांवों की 70 फीसदी आबादी अभी भी शौच के लिए खेतों में जाने को विवश है।
विकास खंड रूपईडीह की 106 ग्राम पंचायतों में 36656 लाभार्थियों को शौचालय बनाने के लिए 12-12 हजार की धनराशि आवंटित हुई थी। इसमें भी ग्राम प्रधान और सचिवों ने दो-दो हजार की अवैध वसूली की। इसके चलते ही कई ग्राम पंचायतों में लगभग 70 प्रतिशत शौचालय पूरी तरह क्रियाशील नहीं हो पाए हैं। जो बने भी हैं, उनमें कुछ न कुछ निर्माण कार्य अधूरा है।
योजना के तहत इन गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए 43.98 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है। कई गांवों के लाभार्थियों ने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार की जो धनराशि मिली उसके लिए दो हजार की नगद राशि प्रधान व सचिव को देना पड़ी। इसके बाद ही अनुदान राशि के बतौर 12 हजार का चेक मिला। जिन्होंने नगद राशि देने में आनाकानी की उनका चेक रोक दिया गया। इसके बाद ग्राम सचिव व प्रधानों ने बिना स्थलीय सत्यापन के गांवों में शत प्रतिशत शौचालय का निर्माण हो जाने की रिपोर्ट देकर इन गांवों को ओडीएफ घोषित करा दिया। इस संबंध में सीडीओ शशांक त्रिपाठी का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन की नियमित समीक्षा की जा रही है। जहां भी कमी मिलेगी वहां डिफाल्टरों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी
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36656 को मिली शौचालय निर्माण की धनराशि
- विकास खंड की ग्राम पंचायत भुलईडीह में 359, बलहीजोत में 512, चौहट्टा में 422, बिछुड़ी में 378, असिधा में 489, अनंतपुर में 351, भुड़कुड़ा 429, भवानीपुर खुर्द में 422, भटपी में 463, भैरमपुर में 484, बेलवाभान में 508, बनगाई में 595 विशुनापुर बेलभरिया में 590, उसरैना में 641, रूकमंगदपुर में 708 सहित अन्य ग्राम पंचायतों को मिलाकर 36656 लोगों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए 12-12 हजार की राशि का चेक दिया गया। लेकिन इसका सत्यापन नहीं किया कि धनराशि पाने वाले सभी लाभार्थियों के शौचालय बन गए अथवा नही।
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विकास खंड रूपईडीह की 106 ग्राम पंचायतों में 36656 लाभार्थियों को शौचालय बनाने के लिए 12-12 हजार की धनराशि आवंटित हुई थी। इसमें भी ग्राम प्रधान और सचिवों ने दो-दो हजार की अवैध वसूली की। इसके चलते ही कई ग्राम पंचायतों में लगभग 70 प्रतिशत शौचालय पूरी तरह क्रियाशील नहीं हो पाए हैं। जो बने भी हैं, उनमें कुछ न कुछ निर्माण कार्य अधूरा है।
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योजना के तहत इन गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए 43.98 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है। कई गांवों के लाभार्थियों ने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार की जो धनराशि मिली उसके लिए दो हजार की नगद राशि प्रधान व सचिव को देना पड़ी। इसके बाद ही अनुदान राशि के बतौर 12 हजार का चेक मिला। जिन्होंने नगद राशि देने में आनाकानी की उनका चेक रोक दिया गया। इसके बाद ग्राम सचिव व प्रधानों ने बिना स्थलीय सत्यापन के गांवों में शत प्रतिशत शौचालय का निर्माण हो जाने की रिपोर्ट देकर इन गांवों को ओडीएफ घोषित करा दिया। इस संबंध में सीडीओ शशांक त्रिपाठी का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन की नियमित समीक्षा की जा रही है। जहां भी कमी मिलेगी वहां डिफाल्टरों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी
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36656 को मिली शौचालय निर्माण की धनराशि
- विकास खंड की ग्राम पंचायत भुलईडीह में 359, बलहीजोत में 512, चौहट्टा में 422, बिछुड़ी में 378, असिधा में 489, अनंतपुर में 351, भुड़कुड़ा 429, भवानीपुर खुर्द में 422, भटपी में 463, भैरमपुर में 484, बेलवाभान में 508, बनगाई में 595 विशुनापुर बेलभरिया में 590, उसरैना में 641, रूकमंगदपुर में 708 सहित अन्य ग्राम पंचायतों को मिलाकर 36656 लोगों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए 12-12 हजार की राशि का चेक दिया गया। लेकिन इसका सत्यापन नहीं किया कि धनराशि पाने वाले सभी लाभार्थियों के शौचालय बन गए अथवा नही।