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अब गावों के चकरोड़ का भी मनरेगा से होगा कायाकल्प
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गोंडा में बेलसर गांव में मनरेगा के तहत चकरोड का निर्माण करते मजदूर।
- फोटो : GONDA
गोंडा। गांवों में विकास कार्यों के साथ ही रोजगार के अवसर देने के लिए चल रही योजना मनरेगा अब रास्तों के विवाद को कम करने में सहायक होगी। इसके लिए विकास महकमे ने जिले की 1054 पंचायतों में काम शुरू कराने का निर्देश दिया था। रविवार को एक दर्जन से अधिक पंचायतों में काम भी शुरू हो गए। मुख्य विकास अधिकारी आशीष कुमार ने जोर दिया है कि गांवों के चकरोड के निर्माण का कार्य कराए जाएं। हर गांव में जरूरी कार्य चिह्नित कर मरम्मत कराना शुरू करें।
गांवों में अक्सर चकरो को लेकर विवाद होता है और मामला राजस्व न्यायालयों के साथ ही बडे़ विवाद का रूप ले रहा है। विकास विभाग अब इन मामलों को कम करने के लिए चकरोडों का कायाकल्प करेगा। 1054 पंचायतों में चकरोड के चिह्नांकन की कार्रवाई शुरू की गई है। माना जा रहा है कि खेतों में जुताई, बुवाई के लिए चकरोड़ो की जरूरत होती है और रास्ते का काम भी चकरोड करते हैं। अब इन चकरोड को मनरेगा से बनाया जाएगा। गांवों में चकरोड का निर्माण किसानों को खेतों में आने-जाने के लिए छोड़ा जाता है। अक्सर मरम्मत न होने से मिट्टी के कटने या बहने से चकरोड का अस्तित्व ही खत्म हो जाता है। इससे किसानों के बीच विवाद की संभावना भी रहती है। समाधान दिवसों में भी चकरोड और गांव में रास्ते के विवाद अक्सर आते हैं। अब विकास महकमा चकरोड की स्थिति में सुधार करेगा, जिससे विवाद की संभावना को तो खत्म किया ही जा सके, गांव के श्रमिकों को रोजगार भी उपलब्ध हो सके।
हर पंचायत में कम से कम एक चकरोड की होगी मरम्मत
जिले की 1054 पंचायतों में चकरोडों की कमी नही है। हर गांव में 5 से 10 चकरोड होंगे। मनरेगा से कम से कम एक चकरोड का निर्माण होगा। मौजूदा समय में फसलों की कटाई होने खेत खाली हो गए हैं, ऐसे में चकरोड का चिन्हांकन और मरम्मत का कार्य आसानी से संभव है। ऐसे में हर गांव में एक-एक चकरोड पर कार्य किया जा सकता है।
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चकरोड सुधार अभियान गांवों के किसानों की सुविधा बढ़ाने के लिए किया गया है। इससे 1054 परियोजनाओं पर कार्य शुरू होगा। सभी बीडीओ को कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। कई गावों में कार्य शुरू भी है। -आशीष कुमार, सीडीओ
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गांवों में अक्सर चकरो को लेकर विवाद होता है और मामला राजस्व न्यायालयों के साथ ही बडे़ विवाद का रूप ले रहा है। विकास विभाग अब इन मामलों को कम करने के लिए चकरोडों का कायाकल्प करेगा। 1054 पंचायतों में चकरोड के चिह्नांकन की कार्रवाई शुरू की गई है। माना जा रहा है कि खेतों में जुताई, बुवाई के लिए चकरोड़ो की जरूरत होती है और रास्ते का काम भी चकरोड करते हैं। अब इन चकरोड को मनरेगा से बनाया जाएगा। गांवों में चकरोड का निर्माण किसानों को खेतों में आने-जाने के लिए छोड़ा जाता है। अक्सर मरम्मत न होने से मिट्टी के कटने या बहने से चकरोड का अस्तित्व ही खत्म हो जाता है। इससे किसानों के बीच विवाद की संभावना भी रहती है। समाधान दिवसों में भी चकरोड और गांव में रास्ते के विवाद अक्सर आते हैं। अब विकास महकमा चकरोड की स्थिति में सुधार करेगा, जिससे विवाद की संभावना को तो खत्म किया ही जा सके, गांव के श्रमिकों को रोजगार भी उपलब्ध हो सके।
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हर पंचायत में कम से कम एक चकरोड की होगी मरम्मत
जिले की 1054 पंचायतों में चकरोडों की कमी नही है। हर गांव में 5 से 10 चकरोड होंगे। मनरेगा से कम से कम एक चकरोड का निर्माण होगा। मौजूदा समय में फसलों की कटाई होने खेत खाली हो गए हैं, ऐसे में चकरोड का चिन्हांकन और मरम्मत का कार्य आसानी से संभव है। ऐसे में हर गांव में एक-एक चकरोड पर कार्य किया जा सकता है।
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चकरोड सुधार अभियान गांवों के किसानों की सुविधा बढ़ाने के लिए किया गया है। इससे 1054 परियोजनाओं पर कार्य शुरू होगा। सभी बीडीओ को कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। कई गावों में कार्य शुरू भी है। -आशीष कुमार, सीडीओ