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अब गरीबों को मिलेंगे आवास
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sun, 10 Apr 2016 11:05 PM IST
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बीपीएल सूची में नाम न होने के कारण जिले के हजारों लोग गरीब होने के बावजूद आवास के लाभ से वंचित रहे, लेकिन अब बीपीएल सूची का खेल खत्म हो गया है। इंदिरा आवास का नाम भी बदल कर प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया गया है।
इसी वित्तीय वर्ष से सामाजिक व आर्थिक गणना 2011 के आधार पर अब आवास की पात्रता तय होगी। इसमें गरीब पात्रों को एक लाख 20 हजार रुपये आवास के लिए मिलेंगे।
इसकी पूरी गाइड लाइन आ गई है। यहां के अधिकारियों ने इस पर मंथन भी शुरू कर दिया है। ये लाभ उन ग्रामीणों को मिलेगा, जिनके घर छप्पर या खपरैल के हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
नया वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से शुरू हो गया है। नए वित्तीय वर्ष में बीपीएल सूची से किसी को आवास नहीं दिया जाएगा। वर्ष 2002 में बनाई गई इस सूची का लाभ तमाम अमीरों को मिल गया, जिनका नाम शामिल था, लेकिन कई गरीबों को लाभ नहीं मिला, जिनका नाम सूची में शामिल नहीं था।
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रत सरकार ने इंदिरा आवास का नाम बदलकर प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया है और इसमें पात्र लाभार्थी को एक लाख 20 हजार रुपये आवास के लिए मिलेंगे।
बीपीएल सूची में शामिल एससी के पात्रों को वर्ष 2014-15 में ही आवास का लाभ दिया जा चुका है। 2015 में बीपीएल सूची में शामिल अन्य जाति वर्ग के पात्रों को आवास का लाभ इसलिए नहीं मिल सका, क्योंकि गाइड लाइन में एससी की संख्या शून्य हो गई थी।
ऐसे में गत वर्ष एससी के परिवार में विभाजन कर अन्य पात्रों की तलाश की गई। इसके बाद कुछ लोगों को आवास मुहैया कराया गया। लेकिन इस बार बीपीएल सूची को ही समाप्त कर दिया गया है। अब केवल सामाजिक आर्थिक गणना में शामिल छप्पर व खपरैल वालों को ही आवास का लाभ मिलेगा।
वर्ष 2011 में पहली बार सामाजिक, आर्थिक एवं जाति आधारित गणना करायी गई थी। इस गणना में करीब एक लाख से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिनके मकान छप्पर व खपरैल के हैं और इनका नाम भी बीपीएल सूची में शामिल नहीं था।
ऐसे लोगों को किसी प्रकार का लाभ शासकीय योजनाओं का नहीं मिला। भारत सरकार ने बीते मार्च में ऐसे लोगों को आवास उपलब्ध कराने की पहल की है।
सामाजिक व आर्थिक गणना के तहत तैयार हुई सूची के आधार पर ग्राम पंचायतों में शीघ्र ही खुली बैठक होगी, जिसमें पात्रों का चयन किया जाएगा। जिले के 1054 ग्राम पंचायतों में करीब एक लाख से अधिक पात्र हैं, लेकिन पहले साल में सिर्फ 10 हजार पात्रों को आवास का आवंटन होगा। इसके लिए गाइड लाइन जारी की गई है। जिले को आवास का लक्ष्य करीब 10 हजार तय किया गया है।
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इसी वित्तीय वर्ष से सामाजिक व आर्थिक गणना 2011 के आधार पर अब आवास की पात्रता तय होगी। इसमें गरीब पात्रों को एक लाख 20 हजार रुपये आवास के लिए मिलेंगे।
इसकी पूरी गाइड लाइन आ गई है। यहां के अधिकारियों ने इस पर मंथन भी शुरू कर दिया है। ये लाभ उन ग्रामीणों को मिलेगा, जिनके घर छप्पर या खपरैल के हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
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नया वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से शुरू हो गया है। नए वित्तीय वर्ष में बीपीएल सूची से किसी को आवास नहीं दिया जाएगा। वर्ष 2002 में बनाई गई इस सूची का लाभ तमाम अमीरों को मिल गया, जिनका नाम शामिल था, लेकिन कई गरीबों को लाभ नहीं मिला, जिनका नाम सूची में शामिल नहीं था।
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रत सरकार ने इंदिरा आवास का नाम बदलकर प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया है और इसमें पात्र लाभार्थी को एक लाख 20 हजार रुपये आवास के लिए मिलेंगे।
बीपीएल सूची में शामिल एससी के पात्रों को वर्ष 2014-15 में ही आवास का लाभ दिया जा चुका है। 2015 में बीपीएल सूची में शामिल अन्य जाति वर्ग के पात्रों को आवास का लाभ इसलिए नहीं मिल सका, क्योंकि गाइड लाइन में एससी की संख्या शून्य हो गई थी।
ऐसे में गत वर्ष एससी के परिवार में विभाजन कर अन्य पात्रों की तलाश की गई। इसके बाद कुछ लोगों को आवास मुहैया कराया गया। लेकिन इस बार बीपीएल सूची को ही समाप्त कर दिया गया है। अब केवल सामाजिक आर्थिक गणना में शामिल छप्पर व खपरैल वालों को ही आवास का लाभ मिलेगा।
वर्ष 2011 में पहली बार सामाजिक, आर्थिक एवं जाति आधारित गणना करायी गई थी। इस गणना में करीब एक लाख से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिनके मकान छप्पर व खपरैल के हैं और इनका नाम भी बीपीएल सूची में शामिल नहीं था।
ऐसे लोगों को किसी प्रकार का लाभ शासकीय योजनाओं का नहीं मिला। भारत सरकार ने बीते मार्च में ऐसे लोगों को आवास उपलब्ध कराने की पहल की है।
सामाजिक व आर्थिक गणना के तहत तैयार हुई सूची के आधार पर ग्राम पंचायतों में शीघ्र ही खुली बैठक होगी, जिसमें पात्रों का चयन किया जाएगा। जिले के 1054 ग्राम पंचायतों में करीब एक लाख से अधिक पात्र हैं, लेकिन पहले साल में सिर्फ 10 हजार पात्रों को आवास का आवंटन होगा। इसके लिए गाइड लाइन जारी की गई है। जिले को आवास का लक्ष्य करीब 10 हजार तय किया गया है।