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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   No religion more than nationality

राष्ट्रीयता से बढकर कोई धर्म नही

Thu, 07 Nov 2019 11:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2019 11:42 PM IST
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No religion more than nationality
करनैलगंज(गोंडा)। राष्ट्रीयता से बढ़कर कोई धर्म या मजहब नहीं होता। हिंदुस्तान संवैधानिक व सभी धर्मों को एक साथ लेकर चलने वाला देश है। जहां संविधान को सर्वोपरि माना गया है। उसके हर फैसले को स्वीकार करना, मानना व अमल करना हर भारतीय का कर्तव्य है। क्षेत्र में अमन चैन कायम रखने के लिए लोग आगे आये हैं। श्रीराम जन्म भूमि व बाबरी मस्जिद प्रकरण पर सर्वोच्च न्यायालय के आने वाले फैसले पर शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए सभी धर्मों के लोग आगे आने लगे हैं।
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यह बातें जिले के इकलौते स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राम अचल आचार्य ने कहीं। उन्होंने कहा कि देश व संविधान का हित पहले है। इस मंदिर-मस्जिद के विवाद में सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारा, प्रेम को किसी प्रकार की ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। न्याय पालिका पर भरोसा करना हम सभी का पहला कर्तव्य है। जिस पर विश्वास रखना चाहिए। फैसला किसी के भी पक्ष में हो। उसका सम्मान जरूरी है।
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करनैलगंज यतीमखाना सफविया के प्रबंधक सैय्यद सुएबुल अलीम बकाई ने अपील करते हुए कहा है कि हिंदुस्तान एक ऐसा मुल्क है जिसमें सभी जाति, धर्म के लोगों को एक साथ लेकर चलता है। लोगों को मंदिर, मस्जिद के विवाद को तवज्जो न देकर न्याय पालिका पर भरोसा रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी धर्म के लोग कोर्ट के फैसले का सम्मान करें तथा किसी प्रकार की उन्माद को जन्म न लेने दें। करनैलगंज के वरिष्ठ व्यापारी व समाजसेवी सेठ शिवकुमार पुरवार कहते हैं कि मंदिर व मस्जिद की जमीन का विवाद किसी धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए। संविधान के तहत अदालत के निर्णय को मान्य करते हुए आपसी भाईचारा व प्रेम से उसे स्वीकार करना ही मानवता है।
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उन्होंने कहा कि धैर्य व संयम से निर्णय का स्वागत करें। करनैलगंज ईदगाह के इमाम शमीम अहमद उर्फ अच्छन कहते हैं कि न्याय पालिका का जो भी निर्णय आये उसे सभी धर्म के लोग सहर्ष स्वीकार करें। देश हित सर्वोपरि है इसलिए अमन चैन कायम रखते हुए संविधान व देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले का सम्मान करें। उसे राजनीति का हिस्सा न बनने दें।
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