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Gonda News: दवा न ऑपरेशन, सिर्फ परामर्श की डोज
Mon, 03 Feb 2025 11:08 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 03 Feb 2025 11:08 PM IST
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गोंडा। महाराजा देवीबख्श सिंह चिकित्सा महाविद्यालय में तीन महीने पहले स्त्री रोग विभाग की शुरूआत तो कर दी गई, लेकिन यहां न तो मरीजों को दवाएं मिल रही हैं और न ही ऑपरेशन की सुविधा। वजह, मेडिकल काॅलेज प्रशासन ने महिलाओं के लिए न तो दवाएं खरीदीं और न ही सिजेरियन व सामान्य प्रसव की व्यवस्था कराई। ऐसे में असिस्टेंट प्रोफेसर समेत चार डॉक्टर सिर्फ ओपीडी ही संभाल रही हैं। मरीजों को दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
बीते पांच नवंबर को मेडिकल कॉलेज की कोविड बिल्डिंग में स्त्री रोग विभाग शुरू किया गया। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. महीकीर्ति सिसोदिया ने विभाग की कमान संभाली। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार व डॉ. उम्मे खदीजा ने बतौर सीनियर रेजीडेंट कार्यभार ग्रहण किया और एक जूनियर डॉक्टर से सहयोग से चारों डॉक्टरों ने ओपीडी शुरू कर दी। मगर तीन महीने बीतने के बाद भी मेडिकल कॉलेज में महिला रोग से संबंधित दवाएं नहीं आईं।
सोमवार को 16 वर्षीय किशोरी मासिक धर्म में अनियमितता की पीड़ा लेकर ओपीडी पहुंची। डॉक्टर ने परामर्श देते हुए दवाएं लिखीं। अस्पताल में दवाएं न मिलने के कारण किशोरी को बाहर से लेनी होंगी। एक महिला को प्रेग्नेंसी टेस्ट किट समेत कई दवाएं लिखी गईं। उसे भी अस्पताल में दवाएं नहीं मिलीं। इसी प्रकार दोपहर डेढ़ बजे तक ओपीडी में 58 महिलाओं का उपचार हुआ।
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नहीं शुरू हो सका ऑपरेशन
मेडिकल कॉलेज में तैनात तीनों स्त्री रोग विशेषज्ञ बेहतर सर्जन हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने ऑपरेशन की बोहनी नहीं की। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार की पूर्व में जिला महिला अस्पताल में तैनाती थी। जहां वहां प्रतिदिन कई सिजेरियन करती थीं, लेकिन यहां संसाधनों की कमी के चलते सिर्फ परामर्श ही दे रही हैं। डॉ. माहीकीर्ति व डॉ. उम्मे खदीजा भी अच्छी सर्जन हैं मगर यहां संसाधनों की उपलब्धता न होने के चलते सिर्फ ओपीडी में ही सेवाएं दे रही हैं।
जल्द शुरू होंगे ऑपरेशन
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी ने बताया कि महिला रोग की प्रमुख दवाओं की सूची प्राचार्य के पास भेजी गई है। ओटी की व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ऑपरेशन की सुविधा शुरू की जाएगी। महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था क्षेत्रीय निदान केंद्र में है।
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बीते पांच नवंबर को मेडिकल कॉलेज की कोविड बिल्डिंग में स्त्री रोग विभाग शुरू किया गया। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. महीकीर्ति सिसोदिया ने विभाग की कमान संभाली। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार व डॉ. उम्मे खदीजा ने बतौर सीनियर रेजीडेंट कार्यभार ग्रहण किया और एक जूनियर डॉक्टर से सहयोग से चारों डॉक्टरों ने ओपीडी शुरू कर दी। मगर तीन महीने बीतने के बाद भी मेडिकल कॉलेज में महिला रोग से संबंधित दवाएं नहीं आईं।
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सोमवार को 16 वर्षीय किशोरी मासिक धर्म में अनियमितता की पीड़ा लेकर ओपीडी पहुंची। डॉक्टर ने परामर्श देते हुए दवाएं लिखीं। अस्पताल में दवाएं न मिलने के कारण किशोरी को बाहर से लेनी होंगी। एक महिला को प्रेग्नेंसी टेस्ट किट समेत कई दवाएं लिखी गईं। उसे भी अस्पताल में दवाएं नहीं मिलीं। इसी प्रकार दोपहर डेढ़ बजे तक ओपीडी में 58 महिलाओं का उपचार हुआ।
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नहीं शुरू हो सका ऑपरेशन
मेडिकल कॉलेज में तैनात तीनों स्त्री रोग विशेषज्ञ बेहतर सर्जन हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने ऑपरेशन की बोहनी नहीं की। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार की पूर्व में जिला महिला अस्पताल में तैनाती थी। जहां वहां प्रतिदिन कई सिजेरियन करती थीं, लेकिन यहां संसाधनों की कमी के चलते सिर्फ परामर्श ही दे रही हैं। डॉ. माहीकीर्ति व डॉ. उम्मे खदीजा भी अच्छी सर्जन हैं मगर यहां संसाधनों की उपलब्धता न होने के चलते सिर्फ ओपीडी में ही सेवाएं दे रही हैं।
जल्द शुरू होंगे ऑपरेशन
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी ने बताया कि महिला रोग की प्रमुख दवाओं की सूची प्राचार्य के पास भेजी गई है। ओटी की व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ऑपरेशन की सुविधा शुरू की जाएगी। महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था क्षेत्रीय निदान केंद्र में है।