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नेपाली पानी से फिर उमड़ी घाघरा
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2015 11:37 PM IST
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बनबसा बैराज से शनिवार को पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसमें से 80 हजार क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़ा गया है। इससे घाघरा व सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से तराई के लोग सहमे हैं। अयोध्या में सरयू का जलस्तर पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ा रहा है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहेगा। मौजूदा समय सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर नीचे है। लेकिन जलस्तर बढ़ते हुए क्रम के अनुसार सोमवार को जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला जाएगा। वहीं, करनैलगंज क्षेत्र में परसावल गांव घाघरा के पानी से घिर गया है। यहां स्पर नंबर एक पर कटान शुरू हो गई है।
नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के लोग सहम गए हैं। बांध पर जगह-जगह रैनकट्स व रैटहोल अभी भी बरकरार हैं, जो पानी बढ़ने पर बांध के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। करनैलगंज तहसील क्षेत्र के परसपुर, बेलसर व उमरी सहित अन्य इलाके को बाढ़ की त्रासदी से बचाने के लिए जो इंतजाम इस बार प्रशासनिक स्तर पर किए गए हैं, वह नाकाफी हैं।
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पहले जो स्पर बने थे, वह बीते साल आई बाढ़ में आधे से ज्यादा कट चुके हैं। जिसे दोबारा मजबूत करने के लिए विभाग की ओर से जो काम करवाया जा रहा है, वह धीमी गति से चल रहा है। ग्रामीणों की मानें तो विभाग द्वारा बनाई गई योजना बांध को बचाने के लिए काफी नहीं है।
इसे बचाने के लिए माझा रायपुर के पास करीब डेढ़ किलोमीटर के बीच में विभाग ने छह स्परों का निर्माण करवाया था। इसमें से एक नंबर स्पर बीते वर्ष नदी की धारा में समा गया था और इस बार भी स्पर नंबर एक में कटान शुरू हो गई है।
यही नहीं नदी की जलधारा ने अन्य स्परों को भी नुकसान पहुंचाया था। बाढ़ से बचाने के लिए विभाग ने स्पर नंबर एक का निर्माण कट इन वन पर पुराने बांध व दो नंबर स्पर के बीच करवाना प्रारंभ कर दिया है, जबकि बाकी बचे पुराने पांचों स्परों की मरम्मत करवाकर दोनों साइड व नोज पर जीओ ट्यूब बिछाकर उसमें हाइमर मशीन से गीली बालू भरवाई जा रही है।
हालांकि इसका काम काफी धीमी गति से चल रहा है। वहीं एक नंबर स्पर का पटाई कार्य पूरा नहीं हो पाया है और न ही अभी तक बांध की मरम्मत ही हो सकी है।
ग्रामीणों की नजर में बाढ़ से बचाने के लिए जो काम बंधे पर चल रहे हैं, वह पर्याप्त नहीं है। लोगों का कहना है कि बांध के बन जाने से उस पार की जनता का जीना मुश्किल हो गया हैं। बांध के उस पार के लोगों के घर व जमीन को नदी निगल चुकी है।
प्रशासन इन बाढ़ पीड़ितों की कोई मदद भी नहीं कर रहा है। बाढ़ से क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए एल्गिन चरसड़ी तटबंध का निर्माण करवाया गया था, जो लोगों के लिए कभी तो फायदेमंद तो कभी नुकसानदेह साबित होता है। पूर्व में बांध के कटने से पूरे क्षेत्र में तबाही मच गई थी।
शनिवार को घाघरा में 2.35 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ है, जो बरसात का है। बनबसा बैराज से घाघरा में छोड़ा गया 80 हजार क्यूसेक पानी रविवार को नदी में पहुंच गया है। करीब पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। अशोक कुमार, एई, बाढ़ कार्यखंड गोंडा
बांध को बचाने के लिए जो रोडमैप तैयार किया गया है, उस पर लगातार काम चल रहा है। एक नया स्पर भी बनाया जा रहा है, वहीं पुराने स्परों की मरम्मत करवाकर दोनों साइड के अलावा नोज पर जीओ टयूब बिछवा कर उसमें बालू भरवाई जा रही है और उसी के ऊपर बालू भरी बोरियां भी लगवाई जा रही है। बाढ़ आने से पहले ही सारे स्पर पूरे हो जाएंगे। - -प्रभाकर सिंह, जेई बाढ़ कार्यखंड
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केंद्रीय जल आयोग के अनुसार जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहेगा। मौजूदा समय सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर नीचे है। लेकिन जलस्तर बढ़ते हुए क्रम के अनुसार सोमवार को जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला जाएगा। वहीं, करनैलगंज क्षेत्र में परसावल गांव घाघरा के पानी से घिर गया है। यहां स्पर नंबर एक पर कटान शुरू हो गई है।
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नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के लोग सहम गए हैं। बांध पर जगह-जगह रैनकट्स व रैटहोल अभी भी बरकरार हैं, जो पानी बढ़ने पर बांध के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। करनैलगंज तहसील क्षेत्र के परसपुर, बेलसर व उमरी सहित अन्य इलाके को बाढ़ की त्रासदी से बचाने के लिए जो इंतजाम इस बार प्रशासनिक स्तर पर किए गए हैं, वह नाकाफी हैं।
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पहले जो स्पर बने थे, वह बीते साल आई बाढ़ में आधे से ज्यादा कट चुके हैं। जिसे दोबारा मजबूत करने के लिए विभाग की ओर से जो काम करवाया जा रहा है, वह धीमी गति से चल रहा है। ग्रामीणों की मानें तो विभाग द्वारा बनाई गई योजना बांध को बचाने के लिए काफी नहीं है।
इसे बचाने के लिए माझा रायपुर के पास करीब डेढ़ किलोमीटर के बीच में विभाग ने छह स्परों का निर्माण करवाया था। इसमें से एक नंबर स्पर बीते वर्ष नदी की धारा में समा गया था और इस बार भी स्पर नंबर एक में कटान शुरू हो गई है।
यही नहीं नदी की जलधारा ने अन्य स्परों को भी नुकसान पहुंचाया था। बाढ़ से बचाने के लिए विभाग ने स्पर नंबर एक का निर्माण कट इन वन पर पुराने बांध व दो नंबर स्पर के बीच करवाना प्रारंभ कर दिया है, जबकि बाकी बचे पुराने पांचों स्परों की मरम्मत करवाकर दोनों साइड व नोज पर जीओ ट्यूब बिछाकर उसमें हाइमर मशीन से गीली बालू भरवाई जा रही है।
हालांकि इसका काम काफी धीमी गति से चल रहा है। वहीं एक नंबर स्पर का पटाई कार्य पूरा नहीं हो पाया है और न ही अभी तक बांध की मरम्मत ही हो सकी है।
ग्रामीणों की नजर में बाढ़ से बचाने के लिए जो काम बंधे पर चल रहे हैं, वह पर्याप्त नहीं है। लोगों का कहना है कि बांध के बन जाने से उस पार की जनता का जीना मुश्किल हो गया हैं। बांध के उस पार के लोगों के घर व जमीन को नदी निगल चुकी है।
प्रशासन इन बाढ़ पीड़ितों की कोई मदद भी नहीं कर रहा है। बाढ़ से क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए एल्गिन चरसड़ी तटबंध का निर्माण करवाया गया था, जो लोगों के लिए कभी तो फायदेमंद तो कभी नुकसानदेह साबित होता है। पूर्व में बांध के कटने से पूरे क्षेत्र में तबाही मच गई थी।
शनिवार को घाघरा में 2.35 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ है, जो बरसात का है। बनबसा बैराज से घाघरा में छोड़ा गया 80 हजार क्यूसेक पानी रविवार को नदी में पहुंच गया है। करीब पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। अशोक कुमार, एई, बाढ़ कार्यखंड गोंडा
बांध को बचाने के लिए जो रोडमैप तैयार किया गया है, उस पर लगातार काम चल रहा है। एक नया स्पर भी बनाया जा रहा है, वहीं पुराने स्परों की मरम्मत करवाकर दोनों साइड के अलावा नोज पर जीओ टयूब बिछवा कर उसमें बालू भरवाई जा रही है और उसी के ऊपर बालू भरी बोरियां भी लगवाई जा रही है। बाढ़ आने से पहले ही सारे स्पर पूरे हो जाएंगे। - -प्रभाकर सिंह, जेई बाढ़ कार्यखंड