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लापरवाही : कुएं में फेंक दीं गरीबों की दवाएं
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गोंडा के रुपईडीह ब्लाक में इटहिया नवी जोत गांव के पास बिखरी पड़ी सरकारी दवा।
- फोटो : GONDA
गोंडा। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की एक बार फिर से संवेदनहीनता सामने आई है। सरकार के पैसे से खरीदी गई दवाओं को कुएं में फेंक दिया गया। जरूरतमंद ग्रामीणों को बंटने के लिए आयी लाखों रुपये की करीब चार बोरा दवाएं कुएं में फेंक दी गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रूपईडीह क्षेत्र के ग्राम इटहिया नबीजोत गांव के पास खेत में बने कुएं में चार बोरा दवाएं मिली हैं। ग्रामीणों ने दवाओं को बाहर निकालकर देखा तो उसमें महिलाओं व बच्चों को दी जाने वाली कीमती दवाएं थीं। फेंकी गई दवाओं में कुछ दवाएं तो एक्सपायर हो चुकी हैं तमाम दवाएं सही हैं।
रूपईडीह ब्लॉक के ग्राम इटैहिया नबी गांव के पास गुरुवार को एक मजदूर परशुराम वर्मा गांव के जुग्गी लाल मौर्या के खेत में काम कर रहा था। दोपहर के समय उसने खेत के पास कुएं में देखा तो कई बोरे पड़े थे। उसने यह बात गांव के लोगों को बतायी। कुएं बोरा पड़ा होने की बात से गांव में सनसनी फैल गई। लोगों को कोई सामान होने के साथ किसी का शव होने की भी आशंका हुई।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शिव चेतन भारती के अलावा तमाम गांव के लोगों ने मिलकर कुएं से बोरों को बाहर निकालकर देखा तो उसमें दवाएं थीं। गांव के लोगों ने बोरे को खोलकर दवाओं का जायजा लिया तो उसमें महिलाओं व बच्चों को दी जाने वाली दवा कैल्शियम व आयरन का सीरप, टेबलेट और ग्लूकोज के पाउच शामिल हैं। यह वह दवाएं हैं जो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एएनएम की ओर से कमजोर व एनीमियां से पीड़ित महिलाओं को आयरन की टेबलेट व अन्य दवाएं बांटी जाती हैं।
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डायरिया व गर्मी से बचाव के लिए बच्चों को ग्लूकोज का पाउडर बांटा जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में फेंकी गई दवा अस्पताल के जिम्मेदार कर्मचारियों के कामकाज की गवाही दे रहे हैं। कर्मचारियों ने दवाओं को जरूरतमंदों को बांटने के बजाए डंप रखा। जब अस्पताल में उसे रखने की जगह नहीं बची तो उसे धीेरे से ठिकाने लगाने के लिए असुरक्षित तरीके से फेंकवा दिया।
लोगों के सुरक्षा का भी नहीं रखा ध्यान, फेंकी यूज की गई सिरिंज
दवा के साथ सुई सिरीज भी फेंकी गई है। जिसमें नयी सिरिंज के साथ यूज की गई सिरिंज शामिल है। सिरिंज की चपेट में आने से लोगों को हेपेटाईटिस बी व एड्स व अंधता जैसी खतरनाक बीमारी होने का खतरा रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने जल संरक्षण के लिए कुएं व तालाबों को साफ व संरक्षित रखने का आदेश दिया है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने कुएं में दवा फेंकवा कर जल प्रदूषण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दूसरी ओर से इस तरह से दवाओं व सिरिंज आदि को फेंक कर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के आदेशों का भी माखौल उड़ाया है। एनजीटी की ओर से मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए कड़े निर्देश दिये गये हैं।
सीएचसी अधीक्षक बोले एक्सपायर हैं दवाएं
ग्रामीणों को किसी भी तरह की तकलीफ होने पर एक-एक गोली दवा के लिए अस्पताल में धक्के खाने पड़ते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने उसे जरूरतमंदों को बांटने के बजाए दबा रखा। अब जब दवाएं कालातीत हो गईं जो उन्हें विभाग के लोगों ने धीरे से ठिकाने लगाने के लिए कुएं में फेंक दिया। अब इस शर्मनाक घटना के बाद विभाग के लोग उसे एक्सपायर होने का बहाना बना रहे हैं। इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी दवा को कुएं में फेंके जाने के बारे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रूपईडीह के अधीक्षक डॉ.जेपी शुक्ला ने बताया कि इटैहिया गांव के पास जो दवाएं फेंकी गई हैं वह एक्सपायर हो गई हैं। यह दवाएं एएनएम को बांटने की लिए दी गई थीं। कुछ दवाएं एक्सपायर नहीं हैं उसके बारे में बताया कि वह दवाएं फाइलेरिया की हैं जो पिछले साल दिसंबर-जनवरी में फाइलेरिया अभियान में बांटने के लिए दी गई थीं।
दवा फेंके जाने की जांच करायी जाएगी
सीएचसी रूपईडीह में दवा फेंके जाने की सूचना मिली है। दवा एक्सपायर थी लेकिन कुछ दवाएं सही हैं तो उसकी जांच करायी जाएगी। दवाओं का निस्तारण करने में नियमों की अनदेखी की गई है। - डॉ. मधु गैरोला सीएमओ गोंडा।
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रूपईडीह ब्लॉक के ग्राम इटैहिया नबी गांव के पास गुरुवार को एक मजदूर परशुराम वर्मा गांव के जुग्गी लाल मौर्या के खेत में काम कर रहा था। दोपहर के समय उसने खेत के पास कुएं में देखा तो कई बोरे पड़े थे। उसने यह बात गांव के लोगों को बतायी। कुएं बोरा पड़ा होने की बात से गांव में सनसनी फैल गई। लोगों को कोई सामान होने के साथ किसी का शव होने की भी आशंका हुई।
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ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शिव चेतन भारती के अलावा तमाम गांव के लोगों ने मिलकर कुएं से बोरों को बाहर निकालकर देखा तो उसमें दवाएं थीं। गांव के लोगों ने बोरे को खोलकर दवाओं का जायजा लिया तो उसमें महिलाओं व बच्चों को दी जाने वाली दवा कैल्शियम व आयरन का सीरप, टेबलेट और ग्लूकोज के पाउच शामिल हैं। यह वह दवाएं हैं जो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एएनएम की ओर से कमजोर व एनीमियां से पीड़ित महिलाओं को आयरन की टेबलेट व अन्य दवाएं बांटी जाती हैं।
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डायरिया व गर्मी से बचाव के लिए बच्चों को ग्लूकोज का पाउडर बांटा जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में फेंकी गई दवा अस्पताल के जिम्मेदार कर्मचारियों के कामकाज की गवाही दे रहे हैं। कर्मचारियों ने दवाओं को जरूरतमंदों को बांटने के बजाए डंप रखा। जब अस्पताल में उसे रखने की जगह नहीं बची तो उसे धीेरे से ठिकाने लगाने के लिए असुरक्षित तरीके से फेंकवा दिया।
लोगों के सुरक्षा का भी नहीं रखा ध्यान, फेंकी यूज की गई सिरिंज
दवा के साथ सुई सिरीज भी फेंकी गई है। जिसमें नयी सिरिंज के साथ यूज की गई सिरिंज शामिल है। सिरिंज की चपेट में आने से लोगों को हेपेटाईटिस बी व एड्स व अंधता जैसी खतरनाक बीमारी होने का खतरा रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने जल संरक्षण के लिए कुएं व तालाबों को साफ व संरक्षित रखने का आदेश दिया है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने कुएं में दवा फेंकवा कर जल प्रदूषण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दूसरी ओर से इस तरह से दवाओं व सिरिंज आदि को फेंक कर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के आदेशों का भी माखौल उड़ाया है। एनजीटी की ओर से मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए कड़े निर्देश दिये गये हैं।
सीएचसी अधीक्षक बोले एक्सपायर हैं दवाएं
ग्रामीणों को किसी भी तरह की तकलीफ होने पर एक-एक गोली दवा के लिए अस्पताल में धक्के खाने पड़ते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने उसे जरूरतमंदों को बांटने के बजाए दबा रखा। अब जब दवाएं कालातीत हो गईं जो उन्हें विभाग के लोगों ने धीरे से ठिकाने लगाने के लिए कुएं में फेंक दिया। अब इस शर्मनाक घटना के बाद विभाग के लोग उसे एक्सपायर होने का बहाना बना रहे हैं। इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी दवा को कुएं में फेंके जाने के बारे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रूपईडीह के अधीक्षक डॉ.जेपी शुक्ला ने बताया कि इटैहिया गांव के पास जो दवाएं फेंकी गई हैं वह एक्सपायर हो गई हैं। यह दवाएं एएनएम को बांटने की लिए दी गई थीं। कुछ दवाएं एक्सपायर नहीं हैं उसके बारे में बताया कि वह दवाएं फाइलेरिया की हैं जो पिछले साल दिसंबर-जनवरी में फाइलेरिया अभियान में बांटने के लिए दी गई थीं।
दवा फेंके जाने की जांच करायी जाएगी
सीएचसी रूपईडीह में दवा फेंके जाने की सूचना मिली है। दवा एक्सपायर थी लेकिन कुछ दवाएं सही हैं तो उसकी जांच करायी जाएगी। दवाओं का निस्तारण करने में नियमों की अनदेखी की गई है। - डॉ. मधु गैरोला सीएमओ गोंडा।