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तरबगंज के नाम से बनेगी नगर पंचायत
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तरबगंज (गोंडा)। तहसील मुख्यालय पर बनने वाली नगर पंचायत का नाम रामापुर के स्थान पर तरबगंज होगा। शासन की आपत्ति के बाद तहसील प्रशासन ने रिपोर्ट भेज कर नगर पंचायत तरबगंज की स्थापना को हरी झंडी दे दी है।
बता देंकि भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में तरबगंज तहसील मुख्यालय को नगर पंचायत का दर्जा देने की कवायद शुरू हो गई थी। इस नगर पंचायत में रामापुर, कटहा, सेमरा जमालखानी, रेतादलसिंह और ढोढे़पुर ग्राम पंचायतों को शामिल करने का प्रस्ताव विधायक प्रेम नरायन पांडेय की पहल पर भेजा गया था। तत्कालीन ग्राम प्रधानों ने भी सहमति जताई थी। शासन ने स्थानीय लोगों से आपत्तियां भी मांगी थीं। इसके बाद तहसील प्रशासन और पंचायती राज विभाग की ओर से आपत्तियों का बिंदुवार निस्तारण कर शासन को रिपोर्ट भेज दी गई थी, लेकिन रिपोर्ट में नगर पंचायत का नाम रामापुर अंकित कर दिया गया था।
शासन के अनुसचिव महावीर प्रसाद ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर आपत्ति निस्तारण के दौरान नगर पंचायत रामापुर का नाम भेजे जाने पर संशोधित सूचना तलब करते हुए परीक्षण कराने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी ने एसडीएम और जिला पंचायत राज अधिकारी को तत्काल संशोधित सूचना देने के निर्देश दिए थे।
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एसडीएम शत्रुघ्न पाठक ने रिपोर्ट में लिपिकीय त्रुटिवश तरबगंज के स्थान पर रामापुर लिखे जाने की बात स्वीकार करते हुए संशोधित सूचना जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेज दी है। इससे तरबगंज नाम से नगर पंचायत गठन का रास्ता साफ हो गया है।
आपत्तियों की थी भरमार, प्रशासन ने किया खारिज
प्रस्तावित नगर पंचायत के गठन में आपत्तियों की भरमार थी। तहसील मुख्यालय तरबगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत रामापुर में स्थित है। नगर पंचायत गठन में बगल की चार अन्य ग्राम पंचायतों कटहा, ढोढेपुर, रेतादलसिंह और सेमरा जमालखानी को शामिल किया गया था। शासन ने अनंतिम सूचना 22 दिसंबर 2020 को जारी की। जिसके बाद स्थानीय स्तर पर सियासत भी गरमाई। लोगों ने शासन के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। इसका निस्तारण तहसील प्रशासन और पंचायत विभाग ने करके भेज दिया था।
कटहा ग्राम पंचायत के दुर्गेश सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि क्षेत्र की 75 प्रतिशत से अधिक आबादी कृषि पर आश्रित है। प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में 25000 जनसंख्या के द्वारा 44 प्रतिशत भूभाग पर कृषि कार्य करने की बात स्वीकार की। क्षेत्र में 12 किलोमीटर तक के गांव को शामिल किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन प्रशासन ने दूरी महज डेढ़ से दो किलोमीटर दिखाकर आपत्तियां निस्तारित कर दीं। आपत्ति कर्ताओं की शिकायत थी कि प्रस्तावित नगर पंचायत यातायात की व्यवस्था से महरूम है। बरसात में अधिकांश मार्गों पर जलभराव हो जाता है। जवाब में प्रशासन ने तरबगंज-नवाबगंज मार्ग टूलेन होने और प्रस्तावित नगर पंचायत की अधिकांश सड़कें डामरयुक्त होने का दावा करते हुए घाघरा नदी की दूरी तहसील मुख्यालय से 35 किलोमीटर दिखाते हुए आपत्तियों को निरस्त कर दिया है।
कटहा गांव के श्रीराम सिंह ने जनसंख्या मानक न पूरा होने समेत विभिन्न मुद्दों पर शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर प्रशासन ने वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 20 हजार से अधिक होने का दावा करते हुए शिकायत निरस्त कर दी। इसी गांव के विजय प्रताप सिंह, ढोढ़ेपुर के मोहन, रेता दलसिंह के रोहित तिवारी, सेमरा जमालखानी के राजेंद्र सिंह, सुजीत कुमार पांडेय तथा अधिवक्ता राहुल कुमार पांडेय द्वारा विभिन्न विषयों पर की गई आपत्तियों को प्रशासन ने निरस्त कर दिया था। शासन द्वारा की गई आपत्ति पर नगर पंचायत का नाम तरबगंज दर्ज कर दिया गया है।
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बता देंकि भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में तरबगंज तहसील मुख्यालय को नगर पंचायत का दर्जा देने की कवायद शुरू हो गई थी। इस नगर पंचायत में रामापुर, कटहा, सेमरा जमालखानी, रेतादलसिंह और ढोढे़पुर ग्राम पंचायतों को शामिल करने का प्रस्ताव विधायक प्रेम नरायन पांडेय की पहल पर भेजा गया था। तत्कालीन ग्राम प्रधानों ने भी सहमति जताई थी। शासन ने स्थानीय लोगों से आपत्तियां भी मांगी थीं। इसके बाद तहसील प्रशासन और पंचायती राज विभाग की ओर से आपत्तियों का बिंदुवार निस्तारण कर शासन को रिपोर्ट भेज दी गई थी, लेकिन रिपोर्ट में नगर पंचायत का नाम रामापुर अंकित कर दिया गया था।
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शासन के अनुसचिव महावीर प्रसाद ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर आपत्ति निस्तारण के दौरान नगर पंचायत रामापुर का नाम भेजे जाने पर संशोधित सूचना तलब करते हुए परीक्षण कराने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी ने एसडीएम और जिला पंचायत राज अधिकारी को तत्काल संशोधित सूचना देने के निर्देश दिए थे।
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एसडीएम शत्रुघ्न पाठक ने रिपोर्ट में लिपिकीय त्रुटिवश तरबगंज के स्थान पर रामापुर लिखे जाने की बात स्वीकार करते हुए संशोधित सूचना जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेज दी है। इससे तरबगंज नाम से नगर पंचायत गठन का रास्ता साफ हो गया है।
आपत्तियों की थी भरमार, प्रशासन ने किया खारिज
प्रस्तावित नगर पंचायत के गठन में आपत्तियों की भरमार थी। तहसील मुख्यालय तरबगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत रामापुर में स्थित है। नगर पंचायत गठन में बगल की चार अन्य ग्राम पंचायतों कटहा, ढोढेपुर, रेतादलसिंह और सेमरा जमालखानी को शामिल किया गया था। शासन ने अनंतिम सूचना 22 दिसंबर 2020 को जारी की। जिसके बाद स्थानीय स्तर पर सियासत भी गरमाई। लोगों ने शासन के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। इसका निस्तारण तहसील प्रशासन और पंचायत विभाग ने करके भेज दिया था।
कटहा ग्राम पंचायत के दुर्गेश सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि क्षेत्र की 75 प्रतिशत से अधिक आबादी कृषि पर आश्रित है। प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में 25000 जनसंख्या के द्वारा 44 प्रतिशत भूभाग पर कृषि कार्य करने की बात स्वीकार की। क्षेत्र में 12 किलोमीटर तक के गांव को शामिल किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन प्रशासन ने दूरी महज डेढ़ से दो किलोमीटर दिखाकर आपत्तियां निस्तारित कर दीं। आपत्ति कर्ताओं की शिकायत थी कि प्रस्तावित नगर पंचायत यातायात की व्यवस्था से महरूम है। बरसात में अधिकांश मार्गों पर जलभराव हो जाता है। जवाब में प्रशासन ने तरबगंज-नवाबगंज मार्ग टूलेन होने और प्रस्तावित नगर पंचायत की अधिकांश सड़कें डामरयुक्त होने का दावा करते हुए घाघरा नदी की दूरी तहसील मुख्यालय से 35 किलोमीटर दिखाते हुए आपत्तियों को निरस्त कर दिया है।
कटहा गांव के श्रीराम सिंह ने जनसंख्या मानक न पूरा होने समेत विभिन्न मुद्दों पर शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर प्रशासन ने वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 20 हजार से अधिक होने का दावा करते हुए शिकायत निरस्त कर दी। इसी गांव के विजय प्रताप सिंह, ढोढ़ेपुर के मोहन, रेता दलसिंह के रोहित तिवारी, सेमरा जमालखानी के राजेंद्र सिंह, सुजीत कुमार पांडेय तथा अधिवक्ता राहुल कुमार पांडेय द्वारा विभिन्न विषयों पर की गई आपत्तियों को प्रशासन ने निरस्त कर दिया था। शासन द्वारा की गई आपत्ति पर नगर पंचायत का नाम तरबगंज दर्ज कर दिया गया है।