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Gonda News: दूध लावा व चना चढ़ाकर नाग देवता की हुई पूजा
Fri, 09 Aug 2024 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 09 Aug 2024 11:46 PM IST
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गोंडा। नाग पंचमी का पर्व शुक्रवार को मंदिरों में भगवान शिव के साथ नागदेवता की पूजा की गई। बच्चों ने तालाब, पोखरे व नदी के किनारे परंपरागत तरीके से गुड़िया पीटा। कुंडली में कालसर्प के दोष से मुक्त होने के लिए नाग देवता को दूध लावा और चना चढ़ाकर नाग देवता की पूजा की। गांवों में दंगल का आयोजन किया गया।
कटरा बाजार के राजगढ़ अमीनपुर में स्थित बांकी तालाब के पास नागदेवता मंदिर परिसर में मेले का आयोजन किया गया। जिसमें आस पास के सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए। शिवलिंग व नाग देवता के विग्रह पर सुहागिनों दूध व चना चढ़ाकर मनोकामना पूरी करने का आशीर्वाद मांगा। प्रभारी निरीक्षक संजय गुप्ता ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से इस बार नदी में नाव चलाने पर रोक थी। खरगूपुर नगर पंचायत सहित ग्रामीण क्षेत्रों में नाग पंचमी (गुड़िया) का त्योहार मनाया गया। मान्यता है कि इस दिन कुछ खास पकवान बनाये जाते है। जिसमें चने का खास इस्तेमाल होता है। यह भी मान्यता है कि सांपों के अस्तित्व को मिटाने के लिए एक यज्ञ किया गया था। इस दौरान ऋषि आस्तिक ने इस यज्ञ को रोका और सांपों को बचाया। तब से ही नागपंचमी के रूप में इसे मनाया जाने लगा। प्रभारी निरीक्षक कमलाकांत त्रिपाठी ने बताया कि चौकसी बरती गई।
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कटरा बाजार के राजगढ़ अमीनपुर में स्थित बांकी तालाब के पास नागदेवता मंदिर परिसर में मेले का आयोजन किया गया। जिसमें आस पास के सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए। शिवलिंग व नाग देवता के विग्रह पर सुहागिनों दूध व चना चढ़ाकर मनोकामना पूरी करने का आशीर्वाद मांगा। प्रभारी निरीक्षक संजय गुप्ता ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से इस बार नदी में नाव चलाने पर रोक थी। खरगूपुर नगर पंचायत सहित ग्रामीण क्षेत्रों में नाग पंचमी (गुड़िया) का त्योहार मनाया गया। मान्यता है कि इस दिन कुछ खास पकवान बनाये जाते है। जिसमें चने का खास इस्तेमाल होता है। यह भी मान्यता है कि सांपों के अस्तित्व को मिटाने के लिए एक यज्ञ किया गया था। इस दौरान ऋषि आस्तिक ने इस यज्ञ को रोका और सांपों को बचाया। तब से ही नागपंचमी के रूप में इसे मनाया जाने लगा। प्रभारी निरीक्षक कमलाकांत त्रिपाठी ने बताया कि चौकसी बरती गई।
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