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पहले गर्भस्थ शिशु के लिए मां को मिलेेंगे 5 हजार
अमर उजाला/गोंडा
Updated Thu, 07 Sep 2017 10:24 PM IST
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Priscilla Chan welcome second child
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पहली बार गर्भधारण करने वाली महिलाओं को अल्पपोषित होने से बचाने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के नाम से एक ऐसी योजना लागू की है। जिसमें धात्री महिलाओं को गर्भावस्था के पंजीकरण से लेकर नवजात के टीकाकरण होने तक अलग-अलग तीन किश्तों में 5 हजार रुपये का भुगतान उनके आधार कार्ड के माध्यम से सीधे बैंक एकाउंट में किया जाएगा।
योजना का मुख्य उद्देश्य नकद प्रोत्साहन राशि के माध्यम से गर्भवती महिला एवं धात्री माता के स्वास्थ्य व्यवहार में सकारात्मक सुधार लाना है। ताकि आर्थिकरूप से कमजोर किसी प्रसूता महिला को प्रसवोपरांत कोई मेहनतकश काम न करना पड़े और वह पूर्णरूप से विश्राम कर सके।
भारत सरकार की ओर से लागू इस कंडीशनल मैटरनिटी बेनिफिट कार्यक्रम का लाभ किसी प्रसूता महिला को अपने पहले शिशु के जन्म पर ही मिलेगा। खास बात यह भी है कि इस योजना का लाभ केंद्र, राज्य, पब्लिक सेक्टर इकाइयों में कार्यरत कर्मियों अथवा किसी अन्य समानांतर योजना में लाभ प्राप्त महिलाओं को नहीं मिलेगा।
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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभ के लिए पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को अपना रजिस्ट्रेशन नजदीकी सीएचसी पर कराना जरूरी होगा। जैसे ही वह गर्भधारण का रजिस्ट्रेशन कराती हैं, उन्हें सीएचसी से पहली किश्त के तौर पर एक हजार रुपये का भुगतान डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक एकाउंट में कर दिया जाएगा। जबकि दूसरी किश्त के रूप में 2000 रुपये प्रसव पूर्व जांच (6 महीने के बाद) डीबीटी के तहत ट्रांसफर किए जाएंगे। वहीं तीसरी किश्त के तौर पर 2000 रुपये प्रसवोपरान्त नवजात शिशु के पंजीकरण व पहले टीकारण के दौरान मिलेंगे।
एक जनवरी 2017 से पूरे प्रदेश में लागू कंडीशनल मैटरनिटी बेनिफिट कार्यक्रम में अब तक बीते 8 महीनों में जितनी भी महिलाओं ने जिले में पहली बार गर्भधारण किया है, उन सभी को इसका लाभ मिलेगा। जिसके लिए सीएमओ ने हर अधीक्षक को अपने यहां पंजीकृत महिलाओं की पूरी डिटेल जुटाने के निर्देश दे दिए हैं। वहीं अगर पहली बार गर्भधारण करने वाली किसी महिला ने अब तक अपना पंजीकरण नजदीकी सीएचसी-पीएचसी व एएनएम सेंटर पर नहीं कराया है तो वह जितनी जल्दी हो सके अपना पंजीकरण करा दें।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की मानीटरिंग के लिए केंद्र सरकार ने सूबे की सरकार को इसकी मानटरिंग जिला, तहसील, ब्लाक से लेकर गांव स्तर पर कराए जाने के निर्देश दिए हैं। जिले में जहां जिलाधिकारी को मानीटरिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है तो वहीं सीएमओ सहित तीन लोग इसके सदस्य होंगे।
कुल 8 लोगों की कमेटी जिला स्तर पर इस योजना की मानीटरिंग करेगी। जबकि तहसील व ब्लाकस्तर पर उपजिलाधिकारी सहित सीएचसी के अधीक्षक समेत 9 लोग इसकी निगरानी करेंगे। वहीं ग्राम स्तर पर ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति इस पर नजर रखेगी।
प्रदेश सरकार में मुख्य सचिव की ओर से प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी के हस्ताक्षर से जारी जिस पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को पूरे सूबे में लागू किए जाने के लिए इसका शासनादेश अपर मुख्य सचिव, सभी मंडलायुक्तों, मंडलीय अपर निदेशकों के साथ ही सीएमओ व सीएमएस को जारी किया गया है। उसमें धात्री महिलाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के एक हजार रुपये का कोई अता-पता नहीं है।
शासनादेश में निर्धारित शर्तों के आधार पर जो धनराशि लाभार्थी महिलाओं को दिए जाने की बात कही गई है, वह 5 हजार है। जबकि नीचे उसी धनराशि का उल्लेख 6 हजार रुपये किया गया है। ऐसे में धात्री महिलाओं को प्रोत्साहन राशि के तौर पर 5 हजार रुपये मिलेंगे या फिर 6 हजार यह स्पष्ट नहीं है। यहां तक कि खुद सीएमओ भी इससे अंजान हैं।
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योजना का मुख्य उद्देश्य नकद प्रोत्साहन राशि के माध्यम से गर्भवती महिला एवं धात्री माता के स्वास्थ्य व्यवहार में सकारात्मक सुधार लाना है। ताकि आर्थिकरूप से कमजोर किसी प्रसूता महिला को प्रसवोपरांत कोई मेहनतकश काम न करना पड़े और वह पूर्णरूप से विश्राम कर सके।
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भारत सरकार की ओर से लागू इस कंडीशनल मैटरनिटी बेनिफिट कार्यक्रम का लाभ किसी प्रसूता महिला को अपने पहले शिशु के जन्म पर ही मिलेगा। खास बात यह भी है कि इस योजना का लाभ केंद्र, राज्य, पब्लिक सेक्टर इकाइयों में कार्यरत कर्मियों अथवा किसी अन्य समानांतर योजना में लाभ प्राप्त महिलाओं को नहीं मिलेगा।
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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभ के लिए पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को अपना रजिस्ट्रेशन नजदीकी सीएचसी पर कराना जरूरी होगा। जैसे ही वह गर्भधारण का रजिस्ट्रेशन कराती हैं, उन्हें सीएचसी से पहली किश्त के तौर पर एक हजार रुपये का भुगतान डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक एकाउंट में कर दिया जाएगा। जबकि दूसरी किश्त के रूप में 2000 रुपये प्रसव पूर्व जांच (6 महीने के बाद) डीबीटी के तहत ट्रांसफर किए जाएंगे। वहीं तीसरी किश्त के तौर पर 2000 रुपये प्रसवोपरान्त नवजात शिशु के पंजीकरण व पहले टीकारण के दौरान मिलेंगे।
एक जनवरी 2017 से पूरे प्रदेश में लागू कंडीशनल मैटरनिटी बेनिफिट कार्यक्रम में अब तक बीते 8 महीनों में जितनी भी महिलाओं ने जिले में पहली बार गर्भधारण किया है, उन सभी को इसका लाभ मिलेगा। जिसके लिए सीएमओ ने हर अधीक्षक को अपने यहां पंजीकृत महिलाओं की पूरी डिटेल जुटाने के निर्देश दे दिए हैं। वहीं अगर पहली बार गर्भधारण करने वाली किसी महिला ने अब तक अपना पंजीकरण नजदीकी सीएचसी-पीएचसी व एएनएम सेंटर पर नहीं कराया है तो वह जितनी जल्दी हो सके अपना पंजीकरण करा दें।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की मानीटरिंग के लिए केंद्र सरकार ने सूबे की सरकार को इसकी मानटरिंग जिला, तहसील, ब्लाक से लेकर गांव स्तर पर कराए जाने के निर्देश दिए हैं। जिले में जहां जिलाधिकारी को मानीटरिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है तो वहीं सीएमओ सहित तीन लोग इसके सदस्य होंगे।
कुल 8 लोगों की कमेटी जिला स्तर पर इस योजना की मानीटरिंग करेगी। जबकि तहसील व ब्लाकस्तर पर उपजिलाधिकारी सहित सीएचसी के अधीक्षक समेत 9 लोग इसकी निगरानी करेंगे। वहीं ग्राम स्तर पर ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति इस पर नजर रखेगी।
प्रदेश सरकार में मुख्य सचिव की ओर से प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी के हस्ताक्षर से जारी जिस पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को पूरे सूबे में लागू किए जाने के लिए इसका शासनादेश अपर मुख्य सचिव, सभी मंडलायुक्तों, मंडलीय अपर निदेशकों के साथ ही सीएमओ व सीएमएस को जारी किया गया है। उसमें धात्री महिलाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के एक हजार रुपये का कोई अता-पता नहीं है।
शासनादेश में निर्धारित शर्तों के आधार पर जो धनराशि लाभार्थी महिलाओं को दिए जाने की बात कही गई है, वह 5 हजार है। जबकि नीचे उसी धनराशि का उल्लेख 6 हजार रुपये किया गया है। ऐसे में धात्री महिलाओं को प्रोत्साहन राशि के तौर पर 5 हजार रुपये मिलेंगे या फिर 6 हजार यह स्पष्ट नहीं है। यहां तक कि खुद सीएमओ भी इससे अंजान हैं।